बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Infrastructureपावर प्‍लांट्स चलाने के लिए नहीं है नेचुरल गैस, 25 फीसदी ही हो रही है सप्‍लाई

पावर प्‍लांट्स चलाने के लिए नहीं है नेचुरल गैस, 25 फीसदी ही हो रही है सप्‍लाई

नेचुरल गैस की वजह से भी पावर जनरेशन प्रभावित हो रही है।

1 of

नई दिल्‍ली। इन दिनों कोयले की वजह से कई पावर प्‍लांट ठप तो हैं ही, लेकिन नेचुरल गैस की वजह से भी पावर जनरेशन प्रभावित हो रही है। हालात यह हैं कि गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स की जरूरत के मुकाबले केवल 25 फीसदी ही गैस सप्‍लाई की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि डोमेस्टिक नेचुरल गैस का प्रोडक्‍शन बढ़ाया जाए, लेकिन पावर मिनिस्‍ट्री की एक रिपोर्ट बताती है कि अभी डोमेस्टिक गैस की सप्‍लाई बढ़ने के आसार कम हैं। 

 

कितनी गैस की है जरूरत

मिनिस्‍ट्री ऑफ पावर ने कुछ समय पहले कमेटी ऑन ऑप्टिमल एनर्जी मिक्‍स इन पावर जनरेशन का गठन किया था। इसकी रिपोर्ट पिछले सप्‍ताह सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी को सौंपी गई है। कमेटी की रिपोर्ट में गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स के जनरेशन को लेकर सरकार को चेताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017-18 के दौरान (अक्‍टूबर 2017 तक) पावर प्‍लांट्स को लगभग 22 एमएमएससीएमडी गैस सप्‍लाई की गई, जबकि उनको लगभग 87 एमएमएससीएमडी गैस का अलोकेशन किया गया था। यानी कि पावर प्‍लांट्स को लगभग 25 फीसदी गैस ही सप्‍लाई की गई।

 

22 फीसदी पावर जनरेशन

सेंट्रल इलैक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीइए) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स की कुल कैपेसिटी 25274 मेगावाट है, लेकिन ये पावर प्‍लांट्स केवल 5680 मेगावाट पावर ही प्रोड्यूस कर रहे हैं। सीइए के मुताबिक गैस पावर प्रोजेक्‍ट्स का प्‍लांट लोड फैक्‍टर 22.54 फीसदी है। यानी कि इन प्‍लांट्स ने अपने कैपेसिटी के मुकाबले केवल 22 फीसदी पावर का जनरेशन किया।

 

 

बाजार में गिरावट बढ़ी, सेंसेक्स 250 अंक टूटा, निफ्टी 10400 के नीचे फिसला

 

 

इंपोर्ट से चल रहा है काम

वर्तमान में गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स को डोमेस्टिक गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से पावर प्‍लांट्स को नेचुरल गैस इंपोर्ट करनी पड़ रही है। हालांकि, इंपोर्ट की जा रही गैस की कीमत अधिक होने के कारण पावर की जनरेशन कॉस्‍ट बढ़ रही है। गैस से चलने वाले प्‍लांट्स में 6.89 मिलियन मीट्रिक स्‍टैंडर्ड क्‍यूबिक मीटर रोजाना (एमएमएससीएमडी) ने कंज्‍यूम की और 2016-17 में अप्रैल से अक्‍टूबर 2017 के दौरान 8.71 एमएसएससीएमडी गैस इंपोर्ट की गई। कमेटी की रिपोर्ट बताती है कि इंपोर्ट गैस पर निर्भरता कम करने के लिए डोमेस्टिक गैस का उत्‍पादन बढ़ाने की जरूरत है।

 

अब नहीं लगेंगे पावर प्‍लांट

देश में नेचुरल गैस की कमी के चलते अब गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट नहीं बनेंगे। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) ने साल 2017-22 के लिए तैयार किए गए नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्‍लान में कहा है कि गैस से चलने वाले वे प्‍लांट जो कमीशन होने हैं या अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन हैं, को छोड़कर नए प्‍लांट नहीं लगाए जाएंगे। हालांकि सीइए का कहना है कि गैस से चलने वाले ज्‍यादा इफिशन्‍ट होते हैं, इसलिए गैस उपलब्‍ध होने पर पहले इन प्‍लांट को प्राइऑरटी दी जाएगी।

 

 

800 से ज्यादा लोन डिफॉल्टर पर कसेगा शिकंजा, बैंक सौंप सकते हैं CBI को लिस्ट

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट