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अंग्रेजों की शान कही जाती थी यह कंपनी, मोदी सरकार लगाएगी ताला

दुनिया भर में थी प्रोडक्ट्स की डिमांड, आजादी के बाद बिगड़े हालात

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नई दिल्ली . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA)  की बैठक में Biecco Lawrie लिमिटेड को बंद करने का फैसला लिया गया। दिलचस्प यह है कि यह कंपनी कभी अंग्रेजों की शान हुआ करती थी। इस कंपनी के बने पंखे बेको फैैन काफी पॉपुलर थे और सस्ते होने के कारण इसकी खूब बिक्री होती थी। इस कंपनी का 100 साल का इतिहास है और आज मोदी सरकार ने इसे बंद करने की घोषणा कर दी। 

 

क्यों किया बंद 

इस निर्णय की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि Biecco Lawrie लिमिटेड नाम की यह कंपनी सीपीएसयू है और कई साल से लगातार घाटे में चल रही है। उन्होंने कहा कि इस कंपनी का नेटवर्थ माइनस (-) 78 करोड़ रुपए है और 31 मार्च 2018 तक इसका लॉस 143.95 करोड़ रुपए है। इस कंपनी को रिवाइव करने की सरकार की सारी कोशिशें नाकाम रही हैं, इसलिए इसे बंद करने का फैसला लिया गया। 

 

100 साल पहले शुरू हुई थी कंपनी 
साल 1919 में इस कंपनी की शुरुआत हुई। उस समय इसका नाम ब्रिटिश इंडिया इलेक्ट्रिक कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड था। 
1919 - इस कंपनी ने टी गार्डन मशीन की मैन्युफैक्चरिंग और रिपेयर का काम शुरू किया। 
1924 - यहां इलेक्ट्रिकल रिपेयर शॉप लगाई गई। 
1932 - इस साल कंपनी ने Biecco Fans की शुरुआत की। इसका उद्देश्य भारत जैसे बड़े मार्केट में पहचान बनाना था। इसलिए सस्ती कीमत पर पंखे बेचने शुरू किए गए। 
1939 - इस साल कंपनी ने भारत में पहली बार इलेक्ट्रिक मोटर्स बनाने का काम शुरू किया और जल्द ही भारत की मार्केट में Biecco Motors ने पूरी तरह कब्जा कर लिया। 

 

आगे पढ़ें : वर्ल्ड वार में हुई फेमस 

वर्ल्ड वार में बनाई बड़ी पहचान 
1939 से 42 के बीच हुई दूसरी वर्ल्ड वार के दौरान कंपनी ने अपनी खास पहचान बनाई। यहां बने शेल केस, फूड कंटेनर्स, मिलिट्री के लिए बने केमोफ्लैग सेट काफी इस्तेमाल किया गया और वार के बाद कंपनी की वर्ल्ड वाइड पहचान स्थापित हो गई।  
1950 - कंपनी ने जॉनसन एंड फिलिप्स लिमिटेड, इंग्लैंड के साथ मिलकर 11 केवी स्विचबोर्ड बनाने की शुरुआत की। 

 

आगे पढ़ें : आजादी के बाद बदले हालात 

 

आजादी के बाद बदले हालात 

साल 1970 में भारत सरकार ने इसका नाम बदल दिया और कंपनी का नाम Biecco Lawrie लिमिटेड रख दिया गया। 
1972 - इसे सरकारी कंपनी बना दिया गया और इसमें IBP Co. Limited और Balmer Lawrie की भागीदारी सुनिश्चित की गई। 
1979 - यह कंपनी पूरी तरह सरकारी बन गई और इसे पेट्रोलियम एंड नेचुरल मिनिस्ट्री के अंडर कर दिया गया। 
2011 - इस कंपनी का कैपिटल रिस्ट्रक्चरिंग किया गया और कंपनी का शेयर होल्डिंग पैटर्न इस प्रकार कर दिया गया। 
राष्ट्रपति : 32.23%
ऑयल इंडस्ट्री डेवलपमेंट बोर्ड, भारत सरकार : 67.23%
अन्य : 0.44 %

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