Home » इकोनॉमी » इंफ्रास्ट्रक्चरकैसे पूरा होगा मोदी सरकार का 24 घंटे बिजली देने का वादा

IPDS का 85 फीसदी काम लेट, 24 घंटे बिजली देने का वादा मोदी के लिए बनेगा सिरदर्द

पावर स्‍कीम आईपीडीएस अभी तक केवल 15 फीसदी टारगेट ही हासिल कर पाई है

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नई दिल्‍ली। 24 घंटे बिजली देने के लिए मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई इंटिग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्‍कीम (आईपीडीएस) अभी तक केवल 15 फीसदी टारगेट ही हासिल कर पाई है। इतना ही नहीं, आईपीडीएस के तहत लगने वाले स्‍मार्ट मीटर  तो एक भी नहीं लग पाए हैं, जबकि ओवर हेड लाइन का टारगेट तो केवल 4 फीसदी ही पूरा हो पाया है। यह स्‍कीम मार्च 2019 तक पूरी होनी है, लेकिन कई राज्‍यों में कोई भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है।  

 

क्‍या है आईपीडीएस 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2015 को अपने संसदीय क्षेत्र बनारस से आईपीडीएस लॉन्‍च्‍ा की थी। साल 2019 तक सबको बिजली 24 घंटे बिजली देने के वादे को पूरा करने के लिए आईपीडीसी की शुरुआत की गई। इस स्‍कीम का मुख्‍य मकसद शहरों में बिजली सिस्‍टम को मजबूत करना है। इसके लिए सब ट्रांसमिशन नेटवर्क में सुधार, मीटरिंग, आईटी एप्लिकेशनख्‍ कस्‍टमर केयर सर्विस और सोलर पैनल लगाए जाने हैं। उस समय प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि इस पूरी स्‍कीम पर केंद्र सरकार द्वारा 45800 करोड़ रुपए का बजटीय सपोर्ट दिया जाएगा। 

 

क्‍या है हकीकत 
बृहस्‍पतिवार को आईपीडीएस की रिव्‍यू मीटिंग में बताया गया कि आईपीडीएस के तहत अब तक 26886 करोड़ रुपए के वर्क सेंक्‍शन हो चुके हैं। इसमें से 25 हजार 58 करोड़ रुपए के टेंडर फ्लोट हो चुके हैं, जबकि 23392 करोड़ रुपए के वर्क अवार्ड हो चुके हैं। इनमें से 16174 करोड़ रुपए की केंद्र सरकार की ग्रांट भी सेंक्‍शन हो चुकी है, लेकिन सरकार ने अब तक 4278 करोड़ रुपए ही रिलीज किए हैं। 

 

इन वर्क्‍स में पिछड़े राज्‍य 
पावर मिनिस्‍ट्री की रिपोर्ट बताती है कि दो साल के दौरान 1087 नए सब स्‍टेशन सेंक्‍शन हो चुके हैं। इसमें 904 सब स्‍टेशन बनाने का काम अवार्ड भी हो चुका है, परंतु केवल 90 सब स्‍टेशन ही अब तक तैयार हो पाए हैं। इसी तरह हाई टेंशन और लो टेंशन ओवर हेड लाइंस का काम भी काफी पीछे चल रहा है। 58970 किलोमीटर लंबी हाई टेंशन तार बिछाने का काम अवार्ड हुआ है, लेकिन केवल 3070 किमी (5 फीसदी) लंबी तार ही बिछाई गई है, इसी तरह लो टेंशन तार के मामले में केवल 4 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है। ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने का टारगेट लगभग 15 फीसदी पूरा हुआ है। 

 

नहीं लगे स्‍मार्ट मीटर 
यह रिपोर्ट बताती है कि दो साल के दौरान लगभग 3 लाख 12 हजार स्‍मार्ट मीटर बलगाने का सेंक्‍शन हो चुका है। इनमें से 49 हजार 708 स्‍मार्ट मीटर लगाने के काम अवार्ड भी चुका है, लेकिन अब तक एक भी मीटर नहीं लगा है। आईपीडीएस के तहत कई शहरों में अंडर ग्राउंड केबल भी बिछाई जानी है। अब तक 71980 किलोमीटर लंबी अंडर ग्राउंड केबल बिछाने का वर्क सेंक्‍शन हुआ है, परंतु अब तक 7765 किमी अंडर ग्राउंड केबल ही बिछाई गई है। 

 

ये राज्‍य पिछड़े 
रिपोर्ट बताती है‍ कि कई राज्‍यों में आईपीडीएस प्रोजेक्‍ट्स शुरू ही नहीं हो पाए हैं। इनमें दिल्‍ली, गोवा, अंडमान निकोबार, जम्‍मू कश्‍मीर, पुडुचेरी, सिक्किम शामिल है। जबकि उत्‍तराखंड, तेलंगाना, राजस्‍थान, पंजाब, नागालैंड, केरल, झारखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, आंध्रप्रदेश में टेंडर अवार्ड तक नहीं हो पाए हैं। 

 

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