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खास खबर : क्‍या 2 लाख करोड़ के इंफ्रा प्रोजेक्‍ट मोदी के लिए 2019 चुनाव में साबित होंगे गेम चेंजर

देश भर में चल रहे लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्‍ट्स मोदी सरकार के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।

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नई दिल्‍ली.  मोदी सरकार को 2019 चुनाव में जीत का रास्‍ता बड़े बड़े इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट में दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिल्‍ली मेरठ हाईवे के पहले फेज का उद्घाटन करते हुए इस बात का साफ संकेत दिया है। मोदी सरकार 2 लाख करोड़     रुपए की लागत वाले 10 बड़े इंन्‍फ्रा प्रोजेक्‍ट पर तेजी से काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि मार्च 2019 से पहले इन सभी प्रोजेक्‍ट को आम लोगों के लिए खोल दिया जाए। इसके लिए प्रोजेक्‍ट को पूरा करने की समय सीमा को भी आगे बढ़ाया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्‍या 2019 आम चुनाव में ये 10 बड़े इंफ्रा प्रोजेक्‍ट मोदी सरकार के लिए गेम चेंजर साबित होंगे। 

 

इंफ्रा प्रोजेक्‍ट्स से बदलेगी तस्‍वीर 
ग्‍लोबल कंसलटिंग फर्म अर्न्स्‍ट एंड यंग, इंडिया के पार्टनर एंड इंडस्‍ट्री लीडर (इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर) कुलजीत सिंह ने http://moneybhaskar.comसे कहा कि इंफ्रा प्रोजेक्‍ट्स से न केवल आम लोगों की दिक्‍कतें कम होती है, बल्कि इकोनॉमी पर भी पॉजिटिव असर पड़ता है। अकेले डेडिके‍टेड फ्रेट कॉरिडोर शुरू होने से लॉजिस्टिक कॉस्‍ट में कमी आएगी, उससे कंज्‍यूमर और इंडस्‍ड्री पर बहुत अच्‍छा प्रभाव पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि अब तक भूमि अधिग्रहण और कॉन्‍ट्रैक्‍ट अवार्ड की प्रक्रिया जटिल होने के कारण प्रोजेक्‍ट डिले होते थे, लेकिन अब हालात बदले हैं, जिस कारण इंफ्रा प्रोजेक्‍ट्स तेजी से पूरे हो रहे हैं। 

 

 

1. डेडिके‍टेड फ्रेट कॉरिडोर 


करीब 12 साल पहले शुरू हुआ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) का पहला फेज मोदी सरकार के कार्यकाल में पूरा होगा। सरकार ने इस प्रोजेक्‍ट में तेजी लाने के लिए काफी प्रयास भी किए हैं। इसलिए सरकार इसका फायदा उठाने की कोशिश भी करेगी। इससे जहां गुड्स ट्रेन 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी, वहीं गुड्स ट्रेन के लिए अलग कॉरिडोर होने पर पैसेंजर ट्रेन की रफ्तार भी काफी बढ़ जाएगी। इस पर कुल 81459 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है। 

 

इस साल शुरू होगा पहला फेज 


रेलवे का दावा है कि अगस्‍त 2018 में पहला फेज शुरू हो जाएगा। वैसे तो यह पूरा कॉरिडोर दिल्‍ली से मुंबई और दिल्‍ली से हावड़ा के बीच बनेगा। वेस्‍टर्न फ्रेट कॉरिडोर दिल्‍ली के निकट दादरी से शुरू होगा और लगभग 1500 किलोमीटर दूर मुंबई में जवाहर लाल नेहरू पोर्ट पर खत्‍म होगा। इसी तरह लगभग 1800 किलोमीटर लंबा वेस्‍टर्न फ्रेट कॉरिडोर पंजाब के लुधियाना से शुरू होगा और पश्चिम बंगाल के दनकुनी पर खत्‍म होगा। वेस्‍टर्न और ईस्‍टर्न दोनों का पहला फेज नवंबर से शुरू होगा। वेस्‍टर्न कोरिडोर पर 432 किेलोमीटर और ईस्‍टर्न कोरिडोर पर 343 किलोमीटर रूट पर ऑपरेशन शुरू हो जाएगा। जबकि दूसरा फेज 2019 और पूरा प्रोजेक्‍ट 2020 तक पूरा होने की उम्‍मीद है। 

 

2. दिल्‍ली-जयपुर एक्‍सप्रेस-वे : दो घंटे में दिल्‍ली से जयपुर पहुंचने के लिए 225 किमी एक्‍सप्रेस-वे की शुरुआत यूपीए कार्यकाल में शुरू हुआ, जो 2016 में बन जाना चाहिए था, लेकिन कई तरह की बाधाओं को दूर करने के बाद अब मोदी सरकार ने इस डेडलाइन 31 मार्च 2019 तय की गई है। प्रोजेक्‍ट की मुख्‍य बाधा लैंड एक्विजिशन है, जिसे दूर कर लिया गया है। लगभग 18 हजार करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्‍ट मोदी सरकार के रिपोर्ट कार्ड की शोभा बढ़ा सकता है। 

 

3. दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेस-वे : मात्र 60 मिनट में दिल्‍ली से मेरठ पहुंचाने वाला दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेस-वे भी मोदी सरकार  का ड्रीम प्रोजेक्‍ट है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चार पैकेज में बन रहे इस प्रोजेक्‍ट का पहला फेज पूरा होने के बाद खुद प्रधानमंत्री ने रोड-शो किया। हालांकि यह प्रोजेक्‍ट देरी से चल रहा है, लेकिन सरकार की कोशिश है कि पैकेज तीन को मार्च 2019 से पहले पूरा कर लिया जाए। इसकी प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट 1057 करोड़ रुपए है। जो डासना से हापुड़ के बीच बनना है। 

 

4. वाराणसी हाईवे 
प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लिए एक बड़ा प्रोजेक्‍ट है 178 किमी हाईवे का चौड़ीकरण। इस पर 2200 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। एक डेडलाइन मई 2018 मिस हो चुकी है, लेकिन प्रधानमंत्री ने उत्‍तर प्रदेश सरकार को कहा है कि 2019 आम चुनाव से इस प्रोजेक्‍ट को पूरा कर लें। अब इस प्रोजेक्‍ट की नई डेडलाइन इस प्रकार हैं। 
घाघरा ब्रिज - वाराणसी पैकेज तीन : दिसंबर 2018 
घाघरा ब्रिज - वाराणसी पैकेज दो : दिसंबर 2018 
घाघरा ब्रिज - वाराणसी पैकेज एक: जून 2018 

 

5. चार धाम यात्रा प्रोजेक्‍ट 
देश के चार धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री तक 12 महीने का सफर आसान और सुरक्षित करने के लिए मोदी सरकार ने साल 2017 में ऑल वेदर रोड प्रोजेक्‍ट की शुरुआत की थी। इस पर लगभग 12 हजार करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है।  इस प्रोजेक्‍ट को पूरा करने की डेडलाइन पहले मार्च 2019 तय की गई थी, लेकिन अब प्रोजेक्‍ट की डेडलाइन एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। बावजूद इसके, एनएचएआई की कोशिश है कि इसके एक बड़े हिस्‍से को मार्च 2019 तक चालू कर दिया जाए। 

 

6. दुनिया का सबसे ऊंचा ब्रिज 
रेलवे ने साल 2002 में जम्‍मू-कश्‍मीर में चिनाब नदी पर एफिल टॉवर से भी ऊंचा पुल बनाने की योजना बनाई थी। लगभग 1.315 किमी लंबा और 359 मीटर ऊंचा इस पुल की पहली डेडलाइन 2009 थी, लेकिन उस समय कंस्‍ट्रक्‍शन रोक दिया गया। 2010 में काम शुरू तो हुआ, लेकिन गति नहीं पकड़ पाया। मोदी सरकार ने इसे नई स्‍पीड दी और अब टारगेट है कि मार्च 2019 से पहले इसे पूरा कर दिया जाए। इस प्रोजेक्‍ट की कॉस्‍ट 1198 करोड़ रुपए बताई गई है। 

 

7. सेतु भारतम 
मार्च 2016 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए सेतु भारतम प्रोजेक्‍ट का मकसद सभी नेशनल हाईवे को रेलवे फाटक मुक्‍त करना है। इसके तहत 208 रेलवे फाटक पर रेल ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं। इस पर लगभग 20 हजार 800 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ये सभी आरओबी मार्च 2019 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। इस प्रोजेक्‍ट के तहत ब्रिटिश काल के लगभग 1500 पुल को भी रिप्‍लेस किया जाना है, जो 2022 तक पूरे हो पाएंगे। 

 

8. स्‍मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश में 100 स्‍मार्ट सिटी हों। हालांकि 2019 में होने वाले चुनाव से पहले यह सपना पूरा नहीं हो पाएगा, लेकिन 20 शहरों में स्‍मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट्स शुरू हो जाएंगे। सरकार द्वारा इस मिशन पर 50 हजार करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है। 

 

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9. वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे:  
राजधानी दिल्‍ली के चारों ओर पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे बनाने को लेकर भी मोदी सरकार बेहद सक्रिय है। यह एक बड़ा प्रोजेक्‍ट है। ईस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे का काम तो पूरा हो चुका है अब सरकार का टारगेट है कि जून 2018 तक वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे भी पूरा हो जाए। इस पर लगभग 1850 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान है। 

 

10.  उड़ान 
देश में आम आदमी को हवाई सफर  से जोड़ने के लिए मोदी सरकार द्वारा शुरू किए उड़ान मिशन की शुरुआत की गई। मार्च 2019 तक काफी हद तक काम हो जाएगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा 2018-19 के लिए 2500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे कई एयरपोर्ट के एक्‍सपेंशन का काम पूरा होने की उम्‍मीद जताई है। जनवरी 2019 तक एयर एशिया ने अपनी उड़ानें शुरू करने की घोषणा कर दी है। कई और कंपनियां भी जल्‍द ही उड़ान स्‍कीम के तहत सस्‍ता हवाई सफर शुरू करा सकती हैं। 

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