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रेलवे सेफ्टी के दावों पर सवाल, 20% बढ़ी पटरियों के फ्रेक्‍चर की घटनाएं

आंकड़ें बताते हैं कि रेल नेटवर्क में पटरियों के फ्रेक्‍चर की घटनाओं में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है

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नई दिल्‍ली। सरकार दावा कर रही है कि रेलवे सेफ्टी पर खासा फोकस किया जा रहा है, लेकिन आंकड़ें बताते हैं कि रेल नेटवर्क में पटरियों के फ्रेक्‍चर की घटनाओं में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं, पिछले कुछ माह में रेलवे ने सेफ्टी पर खासा फोकस किया है, बावजूद इसके नवंबर माह में सिग्‍नल फेल की 9786 घटनाएं हुई। रेलवे में इक्विपमेंट फेलियर की वजह से बेशक एक्‍सीडेंट तो नहीं हो रहे हैं, लेकिन इस वजह से ट्रेनों के संचालन पर असर दिख रहा है। वहीं, रिस्‍क की आशंका भी बनी रहती है। 

 

पटरियों का फ्रेक्‍चर बढ़ा 
रेलवे की नवंबर 2017 तक की इक्विपमेंट फेलियर की रिपोर्ट बताती है कि नवंबर 2017 में 10872 घटनाएं इक्विपमेंट फेलियर की हुई। इनमें पटरियों के फ्रेक्‍चर की 258 घटनाएं दर्ज की गई, जबकि वेल्‍ड फ्रेक्‍चर की 407 घटनाएं हुई। जबकि नवंबर 2016 में पटरियों के फ्रेक्‍चर की 200 और वेल्‍ड फ्रेक्‍चर की 298 घटनाएं घटी थी। इतना ही नहीं, अप्रैल से नवंबर 2016 के मुकाबले अप्रैल से नवंबर 2017 में भी ट्रैक फ्रेक्‍चर और वेल्‍ड फ्रेक्‍चर की घटनाओं में काफी वृद्धि देखी गई। 2016-17 के 8 माह में पटरियों के फ्रेक्‍चर की 765 और वेल्‍ड फ्रेक्‍चर की 1035 घटनाएं हुई, जबकि 17-18 के 8 माह में 838 और 1308 घटनाएं हुई। 

 

सिग्‍नल फेल होने की घटनाएं भी बढ़ी 
पटरियों के टूटने के अलावा ट्रेन एक्‍सीडेंट का दूसरा बड़ा कारण सिग्‍नल फेलियर होता है। सिग्‍नल फेल होने की घटनाएं भी बढ़ी हैं। नवंबर 2016 में सिग्‍नल फेल होने की 9676 घटनाएं हुई थी, जबकि नवंबर 2017 में 9786 सिग्‍नल फेलियर की घटनाएं हुई। हालांकि अप्रैल-नवंबर  2016 के मुकाबले 2017 में सिग्‍नल फेल की घटनाओं में मामूली सी कमी आई है। अप्रैल-नवंबर 2016 में 90561 बार सिग्‍नल फेल हुए, जबकि 2017 में इन महीनों के दौरान 89757 बार सिग्‍नल फेल हुए। 


इनमें आई कमी 
रिपोर्ट बताती है कि ट्रेन अलग होने की घटनाओं में थोड़ी बहुत कमी आई है। इसी पुअर ब्रेक पावर यानी कि ब्रेक न लगने की घटनाएं पिछले आठ माह में एक बार भी नहीं हुई। कोच फेलियर की घटनाओं में कमी आई है।  

 

क्‍या है वजह ?
रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि पटरियों के फ्रेक्‍चर की घटनाएं बढ़ने का कारण यह है कि पिछले सालों में ट्रेनों की संख्‍या तो बढ़ी, लेकिन नई पटरियां नहीं बिछाई गई। पटरियां पुरानी होती जा रही हैं, जबकि उन पर ट्रेनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा मौसम की वजह से भी पटरियां चटक जाती हैं। यही वजह है कि नए रेल मिनिस्‍टर पीयूष गोयल ने निर्देश दिए हैं कि नई पटरियां बिछाई जाएं और पुरानी पटरियों की मरम्‍मत का काम बढ़ाया जाए। उन्‍होंने कहा कि यही वजह है कि पिछले सालों के मुकाबले ट्रेन एक्‍सीडेंट कम हो रहे हैं। 

 

क्‍या है रेलवे का दावा ?
रेलवे का दावा है कि ट्रेन एक्‍सीडेंट की घटनाओं पर काफी अंकुश लगा है। 2016 में अप्रैल से नवंबर के बीच 84 दुर्घटनाएं हुई थी, लेकिन 2017 में अप्रैल से नवंबर के बीच केवल 49 घटनाएं हुई हैं। 

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