अगले साल तक दौड़ेंगी दस नई ट्रेन-18, लागत कम होने की उम्मीद

Train-18 : रेलवे बोर्ड ने चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) से कहा है कि ट्रेन-18 डिजाइन की ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर फोकस किया है। इसके बाद ICF ने तैयारी शुरू कर दी है। ICF का कहना है कि इस फाइनेंशियल ईयर में ट्रेन 18 डिजाइन की दो और ट्रेनें बनाई जाएंगी, जबकि अगले फाइनेंशियल ईयर में आठ ट्रेनें बनाई जाएंगी। ICF ट्रेन और कोच का निर्माण करती है। 

Money Bhaskar

Dec 12,2018 10:56:00 AM IST


नई दिल्ली. रेलवे बोर्ड ने चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) से कहा है कि ट्रेन-18 डिजाइन की ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर फोकस किया है। इसके बाद ICF ने तैयारी शुरू कर दी है। ICF का कहना है कि इस फाइनेंशियल ईयर में ट्रेन 18 डिजाइन की दो और ट्रेनें बनाई जाएंगी, जबकि अगले फाइनेंशियल ईयर में आठ ट्रेनें बनाई जाएंगी। ICF ट्रेन और कोच का निर्माण करती है।

रेलवे बोर्ड देगा पैसा
ICF के महाप्रबंधक एस. मणि ने आईएएनएस को बताया, “ICF इस वित्तीय वर्ष दो और ट्रेन 18 ट्रेनसेट बनाने का प्रयास करेगी और रेलवे बोर्ड से मिलने वाले धन के आधार पर अगले वित्त वर्ष में आठ ट्रेनें बनाई जा सकती हैं।”

ट्रेन की लागत में आएगी कमी
मणि ने कहा कि जैसे-जैसे संख्या बढ़ती जाएगी वैसे वैसे ट्रेन सेट की लागत कम होती जाएगी। ICF को इस साल चार और ट्रेन 18 ट्रेनसेट देने के लिए रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिल गई है। बोर्ड ने पांच दिसंबर को हुई बैठक में यह फैसला किया था। उन्होंने कहा कि आईसीएफ को उसके उत्पादन कार्यक्रम में बदलाव की जरूरतों के बारे में सूचित किया जाएगा। ICF से लक्ष्य को हासिल करने हेतु निर्धारित निर्माण गतिविधियों और सामग्री के स्त्रोत के लिए आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया है.

क्या है ट्रेन-18

भारत की पहली इंजनलेस रेलगाड़ी 'ट्रेन 18' का रविवार को ट्रायल रन हुआ। इस दौरान ट्रेन ने 180 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की और इस तरह यह राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेन को पीछे छोड़ते हुए अब तक की सबसे तेज रफ्तार की ट्रेन बन गई। जहां शताब्दी और राजधानी की अधिकतम औसत रफ्तार 130 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार है। वहीं गतिमान एक्सप्रेस के नाम 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार दर्ज है


शताब्दी की जगह लेगी ट्रेन-18

देश की सबसे तेज गति वाली ट्रेन 18 को बनाने में 100 करोड़ रुपए का खर्च आया है। ट्रेन ने कोटा-सवाई माधोपुर सेक्शन में 180 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। ट्रेन का ज्यादातर ट्रायल रन पूरा हो चुका है। ट्रेन को बनाने वाली इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के जनरल मैनेजर एस मुनी ने कहा कि ट्रेन की टेक्नीकल दिक्कतें दूर कर ली गई हैं। जनवरी 2019 में इसे आधिकारिक रुप से पटरी पर उतारा जाएगा। यह ट्रेन मौजूदा शताब्दी की जगह लेगी। उन्होंने कहा कि ट्रेन अधिकतम 200 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।

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