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100 MW के हाइड्रो प्‍लांट को क्‍लीन एनर्जी का दर्जा देने की तैयारी, मिलेगा फाइनेंशियल सपोर्ट

100 मेगावाट से कम क्षमता के हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट्स को क्‍लीन एनर्जी का दर्जा देने की तैयारी चल रही है

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नई दिल्‍ली। 100 मेगावाट से कम क्षमता के हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट्स को क्‍लीन एनर्जी का दर्जा देने की तैयारी चल रही है। हाल ही में फाइनल हुए नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्‍लान में इस प्रपोजल पर मुहर लगा दी गई है। इसके बाद पावर मिनिस्‍ट्री कैबिनेट नोट की तैयारी में जुट गई है। इंडस्‍ट्री को उम्‍मीद है कि एक से दो माह के भीतर इस प्रपोजल को कैबिनेट के पास भेजा दिया जाएगा। इस प्रपोजल का मकसद देश में हाइड्रो प्रोजेक्‍ट्स की संख्‍या बढ़ाना है और हाइड्रो पावर इंडस्‍ट्री को प्रमोट करना है। 

 

अभी क्‍या है नियम? 
अभी देश में 25 मेगावाट या उससे कम क्षमता के हाइड्रो पावर प्‍लांट्स को स्‍मॉल हाइड्रो पावर (एसएचपी) कहा जाता है और इसे न्‍यू एंड रिन्‍यूएबल एनर्जी के कैटेगिरी में रखा गया है। इस तरह के पावर प्‍लांट्स मिनिस्‍ट्री ऑफ न्‍यू एंड रिन्‍यूएबल एनर्जी (एमएनआरई) द्वारा मॉनिटर किए जाते हैं। इन हाइड्रो प्‍लांट्स को कई तरह के इन्‍सेंटिव के अलावा छूट भी दी जाती है। 

 

अब क्‍या है प्रपोजल?  
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) द्वारा पिछले साल नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्‍लान 2017-2022 और 2022-27 का ड्राफ्ट जारी किया था। इसे पर स्‍टैक होल्‍डर्स से उनकी आपत्ति व सुझाव मांगे गए। इस दौरान हरियाणा पावर परचेज सेंटर ने सुझाव दिया कि रिन्‍यूएबल पावर कैटेगिरी में हाइड्रो प्‍लांट्स की मैक्सिमम कैपेसिटी 25 मेगावाट से बढ़ाकर 100 मेगावाट कर दी जाए। इससे बड़ी कैपेसिटी के प्‍लांट्स को प्रमोट किया जा सकेगा। साथ ही, लागत में भी कमी आएगी, क्‍योंकि बड़े प्‍लांट के मुकाबले छोटे प्‍लांट लगाने में खर्च ज्‍यादा आता है। इसी तरह बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, जिंदल पावर आदि ने भी इस तरह का प्रस्‍ताव रखा। सीईए द्वारा जारी फाइनल नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्‍लान  में इसे मंजूरी दे दी गई है। 

 

क्‍या होगा फायदा? 
जानकार बताते हैं कि रिन्‍यूएबल एनर्जी की कैटेगिरी में शामिल स्‍मॉल हाइड्रो प्‍लांट्स को कई तरह के बेनिफिट दिए गए हैं। एमएनआरई द्वारा नॉर्थ ईस्‍टर्न स्‍टेट और स्‍पेशल कैटेगिरी स्‍टेट्स में 20 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्‍ट को 7.5 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट और अन्‍य राज्‍यों में 3.5 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट फाइनेंशियल स्‍पोर्ट राज्‍य सरकारों को दी जाती है। 
- प्राइवेट सेक्‍टर में नॉर्थ ईस्‍टर्न और स्‍पेशल कैटेगिरी के स्‍टेट में 5 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्‍ट लगाने पर 1.5 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट, जबकि अन्‍य राज्‍यों में 1 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट फाइनेंशियल सपोर्ट दी जाती है। 
- प्राइवेट सेक्‍टर को स्‍मॉल हाइड्रो प्‍लांट लगाने के लिए लोन दिलाने में भी सरकार मदद करती है। 

 

पर्यावरणविदों ने किया विरोध 

साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डेम, रिवर एंड पीपल के संयोजक हिमांशु ठक्‍कर ने moneybhaskar.com से कहा कि हाइड्रो लॉबी इस तरह का प्रयास कर रही है। जब पावर मिनिस्‍ट्री में यह प्रस्‍ताव आया तो हमने पूछा कि क्‍या 100 मेगावाट वाले प्रोजेक्‍ट्स को रिन्‍यूएबल कैटेगिरी में डालने से छोटे हाइड्रो प्‍लांट्स को मिल रही पर्यावरण संबंधी छूट का फायदा भी मिलेगा तो पावर मिनिस्‍ट्री़ ने स्‍पष्‍ट किया है कि 100 मेगावाट वाले हाइड्रो प्‍लांट्स को पर्यावरण संबंधी छूट नहीं मिलेगी। बावजूद इसके, इस प्रस्‍ताव पर गंभीरता से विचार विमर्श किया जाना चाहिए। 

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