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इन शहरों में शुरू होगी सस्ती हेलिकॉप्टर सेवा, ‘उड़ान’ स्कीम का मिलेगा फायदा

सरकार ने दी पवनहंस को हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने की मंजूरी 

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नई दिल्ली. छोटे तथा मझौले शहरों को हवाई नेटवर्क में शामिल करने के उद्देश्य से शुरू की गई सस्ते टिकट की रीजनल कनेक्टविटी स्कीम उड़े देश का आम नागरिक ‘उड़ान’ के तहत नियमित हेलिकॉप्टर सेवा की शुरुआत एक महीने में चंडीगढ़, शिमला और मंडी से हो सकती है। ‘उड़ान’ के दूसरे चरण में हेलिकॉप्टर सेवा के लिए मार्गों का आवंटन किया गया था। हालांकि, हेलिपोर्टों का निर्माण और प्रमाणन अब तक पूरा नहीं हो पाने के कारण करीब एक साल बीत जाने के बाद भी इन मार्गों पर सेवा शुरू नहीं हो सकी है। 

 

पवनहंस को दी अनुमति 
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब सरकार ने सार्वजनिक हेलिकॉप्टर सेवा प्रदाता पवनहंस को उन हवाई अड्डों से नियमित हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने की अनुमति देने का फैसला किया है जहाँ विमानों के साथ हेलिकॉप्टरों का परिचालन भी करना संभव है। 

 

इन शहरों के लिए भी है योजना 
उन्होंने बताया कि पवनहंस को चंडीगढ़-कसौली-शिमला मार्ग पर हेलिकॉप्टर सेवा के लिए मार्ग का आवंटन किया गया था। कसौली में हेलिपोर्ट तैयार नहीं हो सका है, इसलिए अब उसे छह महीने के लिए चंडीगढ़-शिमला मार्ग पर सेवा शुरू करने की अनुमति दी जायेगी। इसी प्रकार शिमला-कुल्लू-मंडी मार्ग पर कुल्लू हेलिपोर्ट तैयार नहीं होने के कारण उसे शिमला-मंडी उड़ान शुरू करने की अनुमति देने की योजना है। 

 

एक महीने में मिलेगा लाइसेंस 
अधिकारी का कहना है कि पवनहंस को एक महीने के भीतर शिड्यूल कम्यूटर का लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। उसके बाद वह ये सेवाएँ शुरू कर सकेगी क्योंकि उसके पास हेलिकॉप्टर, पायलट और अन्य कर्मचारी तथा बुनियादी ढाँचा पहले से मौजूद है। पवनहंस के पास नॉन कम्यूटर ऑपरेटर का लाइसेंस पहले से है। 

ये हैं चुनौतियां 
हेलिपोर्टों के निर्माण तथा प्रमाणन में आ रही चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने बताया कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने हेलिपोर्टों के विकास की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया है। उसका कहना है कि वह पहले ही 50-60 हवाई अड्डों के विकास का बीड़ा उठा चुका है। इसलिए, अब पवनहंस और भारतीय रेल की इंजीनियरिंग कंपनी आरआईटीईएस को हेलिपोर्टों के निर्माण के लिए नयी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी है। यह रिपोर्ट राज्य सरकारों को सौंपी जायेगी जो निर्माण का कार्य पवनहंस और आरआईटीईएस की देखरेख में करेंगी। 

यहां बन रहे हैं हवाई अड्‌डे 
उन्होंने बताया कि हिमाचल में शिमला के पास संजोली और उत्तराखंड में सहस्त्रधारा, चिन्यालीसौर तथा गौचर हवाई अड्डे निर्माण के अग्रिम चरण में हैं और इनका निर्माण कार्य दो-तीन महीने में पूरा हो जायेगा। 

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