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कंज्‍यूमर के हाथ में होगी बिजली कंपनियों की लगाम, 2019 के चुनाव से पहले होगा बदलाव


नई दिल्‍ली। साल 2019 में होने वाले आम चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार एक बड़ा कदम उठा सकती है। सरकार बजट सेशन में इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट एक्‍ट पेश करेगी। इसका मकसद बिजली कंपनियों के कॉम्पिटीशन कराकर कंज्‍यूमर को मजबूत करना है। दरअसल, एक्‍ट में प्रावधान किया गया है कि एक ही एरिया में कई-कई कंपनियां बिजली सप्‍लाई कर सकेंगी, जिसके चलते कंज्‍यूमर को अधिकार होगा कि वह संतुष्‍ट न होने पर मोबाइल कंपनियों की तरह बिजली कंपनियों को भी बदल सकेगा। पावर मिनिस्‍ट्री के अधिकारियों का दावा है कि यह एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है और इससे सरकार के प्रति लोगों में अच्‍छा मैसेज जाएगा। 

 

क्या है इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट एक्‍ट 
दरअसल, अभी देश में इलेक्ट्रिसिटी एक्‍ट 2003 लागू है। इस एक्‍ट के तहत राज्‍यों में बिजली बोर्डों को भंग करके तीन कंपनियां बनाई गई थी। इसमें एक जनरेशन कंपनी, दूसरी ट्रांसमिशन कंपनी और तीसरी डिस्ट्रिब्‍यूशन कंपनी। लगभग 10 साल बाद सरकार को लगा कि तीन कंपनियों में बंटने के बावजूद न तो पावर सप्‍लाई में कुछ खास सुधार हुआ है और ना ही बिजली कंपनियों के घाटे में कमी आई है। साल 2014 में एक अमेंडमेंट एक्‍ट का ड्राफ्ट तैयार किया गया। इसमें प्रस्‍ताव रखा गया कि डिस्ट्रिब्‍यूशन कंपनियों को दो हिस्‍सों में बांटा जाएगा और एक एरिया में घरों में सप्‍लाई के लिए कई कंपनियों को लाइसेंस दिया जाए, ताकि उनके बीच कॉम्पिटीशन हो सके। 
 

क्‍या होगा फायदा 
नया एक्‍ट लागू होने के बाद डिस्ट्रिब्‍यूशन कंपनियां एक फीडर या सब स्‍टेशन तक बिजली सप्‍लाई करेंगी। जहां से आगे एक मोहल्‍ला या कॉलोनी में सप्‍लाई करने का काम कई कंपनियों के पास होगा। यानी कि वे फीडर या सब स्‍टेशन से बिजली खरीदकर घरों में सप्‍लाई करेंगी। इससे उनके बीच होने वाले कॉम्पिटीशन के कारण लोगों को न केवल सस्‍ता बिजली मिलेगी, बल्कि अच्‍छी क्‍वालिटी की भी बिजली मिलेगी। 

 

देना होगा जुर्माना 
इसके साथ-साथ सरकार यह प्रावधान करने जा रही है कि जो बिजली कंपनी 24 घंटे बिजली नहीं देगी और कटौती का कारण जायज नहीं होगा तो उसे कंज्‍यूमर को जुर्माना देना होगा। 


स्‍थायी कमेटी सौंप चुकी है रिपोर्ट
एक्‍ट का ड्राफ्ट सरकार ने 19 दिसंबर 2014 को लोकसभा के समक्ष रखा गया, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते लोकसभा अध्‍यक्ष ने 22 दिसंबर को स्‍थायी कमेटी को सौंप दिया। स्‍थायी कमेटी ने इस पर अलग-अलग वर्गों से बातचीत की और मई में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। उसके बाद से पावर मिनिस्‍ट्री लगातार कोशिश कर रही है कि बजट को फिर से संसद में रखा जाए, लेकिन इस बार पावर मिनिस्‍ट्री ने पूरी तैयारी कर ली है। बल्कि जो राज्‍य इसका विरोध कर रहे थे, उनसे भी बातचीत की गई है। संभव है कि उन्‍हें बजट में कुछ इन्‍सेंटिव देकर एक्‍ट को लागू करने के लिए मना लिया जाए। 

 

क्‍या है विरोध 
बिजली कर्मचारियों व इंजीनियर के संगठनों ने मिलकर इस अमेंडमेंट बिल का विरोध करने की घोषणा की है। इन संगठनों का कहना है कि  इस एक्‍ट में निजी घरानों के मुनाफे का खास ध्यान रखा गया है जबकि आम जनता को टैरिफ में भारी वृद्धि का सामना करना पड़ेगा, क्‍योंकि इससे कंपनियों के पास मौका होगा कि वे केवल उन उपभोक्‍ताओं को बिजली दें, जो महंगी खरीदने के लिए तैयार होंगे। इससे आम उपभोक्‍ता बिजली से वंचित रह जाएंगे और उन्‍हें मजबूरन सरकारी कंपनियों से बिजली खरीदनी होगी, जो कि पहले से ही घाटे में चल रही हैं। इससे उनका घाटा और बढ़ जाएगा। 

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