Home » Economy » Infrastructure70000 MW of power projects may go under bankruptcy

70 हजार MW के पावर प्रोजेक्‍ट्स पर NPA का खतरा, सरकार देगी साथ

केंद्र ने आरबीआई से कहा है कि वे 70 हजार मेगावाट के पावर प्रोजेक्‍ट्स को एनपीए होने से बचाने के लिए नियम सरल करे

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नई दिल्‍ली। केंद्र ने रिजर्व बैंक से सिफारिश की है कि वे पावर सेक्‍टर में 70 हजार मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्‍ट्स को एनपीए होने से बचाने के लिए नियमों को नरम करे। एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स (एपीपी) के साथ बैठक के बाद पावर मिनिस्‍टर आरके सिंह ने यह जानकारी दी। 

 

बैठक में पहुंचे ये प्रोड्यूसर 
शुक्रवार को हुई बैठक में पावर सेक्‍टर में एनपीए व बैड लोन पर विचार विमर्श किया। बैठक में पावर प्रोड्यूसर्स जैसे जीएमआर, अदाणी पावर, जेएसडब्‍ल्‍यू एनर्जी, जेपी पावर, लैंको के साथ साथ एनपीटीसी, पीएफसी और आरईसी के अधिकारी उपस्थित थे। 

 

बैंकरप्‍सी का खतरा 
बैठक के बाद एपीपी के डायरेक्‍टर जनरल अशोक खुराना ने बताया कि बैठक में पावर प्रोड्यूसर्स ने पावर मिनिस्‍टर को जानकारी दी कि एनपीए पर आरबीआई के नए सर्कुलर के कारण 60 से 70 हजार मेगावाट क्षमता के पावर प्रोजेक्‍ट्स बैंकरप्‍सी हो सकते हैं। 

 

सख्‍त है आरबीआई के नए नियम 
गौरतलब है कि आरबीआई के नए नॉर्म्‍स कहते हैं कि लोन के इंस्‍टॉलमेंट में एक दिन की भी देरी होने पर डिफॉल्‍टर घोषित कर दिया जाए। जबकि पावर प्रोड्यूसर्स का कहना है कि वे कोयले के लिए तो एडवांस में भुगतान करते हैं, जबकि डिस्‍कॉम्‍स उन्‍हें 90 से 150 दिन के भीतर पेमेंट करते हैं, ऐसे में लोन की इंस्‍टॉलमेंट देने में अकसर देरी हो जाती है। 

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