Home » Economy » Infrastructure46 Percent of Outlay Utilized by Govt in Highway Repair

हाईवे के रिपेयर-मेंटेनेंस पर आधा पैसा भी नहीं हुआ खर्च, अब फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने की भारी कटौती

2017-18 में रिपेयर एंड मेंटेनेंस के लिए आवंटित राशि में केवल 46 फीसदी ही खर्च किया गया है

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नई दिल्‍ली। एक ओर मोदी सरकार दावा कर रही है कि देश में रोजाना 20 किलोमीटर से अधिक नए हाईवे बनाए जा रहे हैं तो दूसरी ओर सरकार हाईवे के मेंटेनेंस पर ध्‍यान नहीं दे रही है। मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट ने बजट 2017-18 में रिपेयर एंड मेंटेनेंस के लिए आवंटित राशि में केवल 46 फीसदी ही खर्च किया है। इसका खामियाजा मिनिस्‍ट्री को बजट 2018-19 में भुगतना होगा। मिनिस्‍ट्री ऑफ फाइनेंस ने रिपेयर एंड मेंटेनेंस के बजट में 65 फीसदी कटौती कर दी है। वहीं, पार्लियामेंटरी स्‍टैंडिंग कमेटी (ट्रांसपोर्ट) ने संदेह जताया है कि साल जनवरी-मार्च 2018 के आखिरी क्‍वार्टर में यदि रिपेयर एंड मेंटेनेंस का 50 फीसदी से अधिक पैसा खर्च किया गया तो इससे गड़बड़ी और खराब क्‍वालिटी की पूरी आशंका है। 

 

2017-18 का बजट खर्च नहीं किया  
कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निराशाजनक है कि मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट ने साल 2017-18 के लिए आवंटित राशि को अब तक खर्च नहीं किया है। रिपोर्ट के मुताबिक रोड एंड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍ट्री को 2017-18 में रिपेयर एंड मेंटेनेंस के लिए 2967 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन जनवरी 2018 तक मिनिस्‍ट्री़ इस मद में केवल 1384 करोड़ रुपए (लगभग 46 फीसदी) ही खर्च कर पाई है। कमेटी ने सिफारिश की है कि इस मुद्दे पर मिनिस्‍ट्री़ मॉनीटरिंग कराए और पता करे कि रिपेयर एंड मेंटेनेंस पर खर्च क्‍यों नहीं हो पा रहा है। 

 

आवंटित ज्‍यादा, खर्च कम 
 रिपेयर एंड मेंटेनेंस पर मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट का रवैया लगभग ऐसा ही है। कमेटी ने पिछले तीन साल के बजट के हवाले से बताया है कि मिनिस्‍ट्री को जितना पैसा आवंटित हुआ है, उसे पूरा खर्च नहीं किया। 
- 2015-16 में मेंटेनेंस एंड रिपेयर के लिए 2698 करोड़ रुपए अलोकेट हुए और खर्च हुए 2528 करोड़ रुपए 
- 2016-17 में 2845 करोड़ रुपए रिपेयर एंड मेंटेनेंस के लिए अलोकेट हुए और खर्च 2503 करोड़ रुए हुए 
- 2017-18 में 2967 करोड़ में से केवल 1384 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं 

 

कितनी हुई कटौती 
स्‍टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट ने साल 2018-19 के लिए रिपेयर एंड मेंटेनेंस मद में 8600 करोड़ रुपए मांगे थे, लेकिन फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने केवल 3017.12 करोड़ रुपए की ही मंजूरी दी है। फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने रिपेयर एंड मेंटेनेंस के बजट में लगभग 65 फीसदी की कटौती कर दी। वहीं, रोड मिनिस्‍ट्री़ ने नक्‍सल प्र‍भावित इलाकों में रोड  कनेक्टिविटी के लिए 1475 करोड़ रुपए मांगे थे, लेकिन फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने केवल 860 करोड़ रुपए ही मंजूर किए हैं। 

 

कमेटी ने जताई चिंता 
अपनी रिपोर्ट में कमेटी ने कहा है कि रिपेयर एंड मेंटेनेंस के बजट में इस भारी कटौती को रोड मिनिस्‍ट्री गंभीरता से ले और इस बारे में फाइनेंस मिनिस्‍ट्री से बात करे। कमेटी ने सिफारिश की है कि रोड मिनिस्‍ट्री रिवाइज्‍ड एस्टिमेट के मौके पर अलोकेशन को बढ़ाने के लिए प्रयास करे। 

 

पैसे की जरूरत नहीं 
रोड सेक्‍टर के एक्‍सपर्ट नितिन झंवर ने कहा कि दरअसल, ज्‍यादातर नेशनल हाईवे टोल एजेंसियों को सौंप दिए गए हैं, जिनका रिपेयर एंड मेंटेनेंस करना है। इसलिए एनएचएआई के पास रिपेयर एंड मेंटेनेंस का काम काफी कम हो गया है। ऐसे में यदि फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने बजट कम कर दिया है तो ठीक ही किया है। वैसे भी अब एनएचएआई ने टोल ऑपरेट एंड ट्रांसपोर्ट (टीओटी) नीति अपनाई है, इससे एनएचएआई को रिपेयर के लिए पैसे की जरूरत नहीं है। बल्कि एनएचएआई को अब मॉनिटरिंग की भूमिका निभानी चाहिए और टोल एजेंसियों से रिपेयर करवानी चाहिए। 

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