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मांगे 8600 करोड़, मिले 3000 करोड़, ऐसे कैसे होगी हाईवे की रिपेयर एंड मेंटेनेंस

साल 2018-19 के लिए हाईवे के रिपेयर एंड मेंटेनेंस में 65 फीसदी की कटौती कर दी गई है।

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नई दिल्‍ली। साल 2018-19 के लिए हाईवे के रिपेयर एंड मेंटेनेंस में 65 फीसदी की कटौती कर दी गई है। ट्रांसपोर्ट पर बनी पार्लियामेंटरी स्‍टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। अपनी रिपोर्ट में कमेटी ने मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट से पूछा है कि आखिर वह केवल 35 फीसदी पैसे से हाईवे की रिपेयर एंड मेंटेनेंस कैसे कर पाएगी। दिलचस्‍प बात यह है कि साल 2017-18 में रिपेयर एंड मेंटेनेंस के लिए मिले कुल बजट का 65 फीसदी ही खर्च हो पाया है। इस पर स्‍टैंडिंग कमेटी ने निराशा जताई है। हालांकि एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि ज्‍यादातर हाईवे टोल एजेंसियों के पास हैं, इसलिए मिनिस्‍ट्री को रिपेयर एंड मेंटनेंस के लिए ज्‍यादा बजट की जरूरत ही नहीं है। 

 

कितनी हुई कटौती 
स्‍टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट ने साल 2018-19 के लिए रिपेयर एंड मेंटेनेंस मद में 8600 करोड़ रुपए मांगे थे, लेकिन फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने केवल 3017.12 करोड़ रुपए की ही मंजूरी दी है। फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने रिपेयर एंड मेंटेनेंस के बजट में लगभग 65 फीसदी की कटौती कर दी। वहीं, रोड मिनिस्‍ट्री़ ने नक्‍सल प्र‍भावित इलाकों में रोड  कनेक्टिविटी के लिए 1475 करोड़ रुपए मांगे थे, लेकिन फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने केवल 860 करोड़ रुपए ही मंजूर किए हैं। 

 

कमेटी ने जताई चिंता 
अपनी रिपोर्ट में कमेटी ने कहा है कि रिपेयर एंड मेंटेनेंस के बजट में इस भारी कटौती को रोड मिनिस्‍ट्री गंभीरता से ले और इस बारे में फाइनेंस मिनिस्‍ट्री से बात करे। कमेटी ने सिफारिश की है कि रोड मिनिस्‍ट्री रिवाइज्‍ड एस्टिमेट के मौके पर अलोकेशन को बढ़ाने के लिए प्रयास करे। 

 

2017-18 का बजट खर्च नहीं किया  
कमेटी ने कहा है कि इससे भी अधिक निराशाजनक यह है कि मिनिस्‍ट्री ने साल 2017-18 के लिए आवंटित राशि को अब तक खर्च नहीं किया है। रिपोर्ट के मुताबिक रोड एंड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍ट्री को 2017-18 में रिपेयर एंड मेंटेनेंस के लिए 2967 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन जनवरी 2018 तक मिनिस्‍ट्री़ इस मद में केवल 1384 करोड़ रुपए (लगभग 46 फीसदी) ही खर्च कर पाई है। कमेटी ने सिफारिश की है कि इस मुद्दे पर मिनिस्‍ट्री़ मॉनीटरिंग कराए और पता करे कि रिपेयर एंड मेंटेनेंस पर खर्च क्‍यों नहीं हो पा रहा है। 

 

आवंटित ज्‍यादा, खर्च कम 
 रिपेयर एंड मेंटेनेंस पर मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट का रवैया लगभग ऐसा ही है। कमेटी ने पिछले तीन साल के बजट के हवाले से बताया है कि मिनिस्‍ट्री को जितना पैसा आवंटित हुआ है, उसे पूरा खर्च नहीं किया। 
- 2015-16 में मेंटेनेंस एंड रिपेयर के लिए 2698 करोड़ रुपए अलोकेट हुए और खर्च हुए 2528 करोड़ रुपए 
- 2016-17 में 2845 करोड़ रुपए रिपेयर एंड मेंटेनेंस के लिए अलोकेट हुए और खर्च 2503 करोड़ रुए हुए 
- 2017-18 में 2967 करोड़ में से केवल 1384 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं 

 

पैसे की जरूरत नहीं 
रोड सेक्‍टर के एक्‍सपर्ट नितिन झंवर ने कहा कि दरअसल, ज्‍यादातर नेशनल हाईवे टोल एजेंसियों को सौंप दिए गए हैं, जिनका रिपेयर एंड मेंटेनेंस करना है। इसलिए एनएचएआई के पास रिपेयर एंड मेंटेनेंस का काम काफी कम हो गया है। ऐसे में यदि फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने बजट कम कर दिया है तो ठीक ही किया है। वैसे भी अब एनएचएआई ने टोल ऑपरेट एंड ट्रांसपोर्ट (टीओटी) नीति अपनाई है, इससे एनएचएआई को रिपेयर के लिए पैसे की जरूरत नहीं है। बल्कि एनएचएआई को अब मॉनिटरिंग की भूमिका निभानी चाहिए और टोल एजेंसियों से रिपेयर करवानी चाहिए। 

 

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