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इक्विपमेंट फेल होने से हो रही हैं ट्रेनें लेट, 100 फीसदी बढ़ी रेल फ्रैक्‍चर की घटनाएं

रेलवे अधिकारी ट्रेन लेट होने का कारण रिपेयर एंड मेंटनेंस बता रहे हैं

Indian Railway: Train late

नई दिल्‍ली. पिछले कुछ महीनों में ट्रेन लेट होने का कारण रेलवे अधिकारी रिपेयर एंड मेंटनेंस बता रहे हैं, लेकिन रेलवे की ही एक रिपोर्ट बताती है कि इक्विपमेंट फेल होने की घटनाएं बढ़ने से ट्रेनें लेट हो रही हैं। इतना ही नहीं, इससे रेलवे की सेफ्टी पर भी असर पड़ रहा है। रेलवे की इस रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2018 में रेल फ्रेक्‍चर (पटरी टूटने) की 121 घटनाएं हुई, जो कि अप्रैल 2017 में केवल 58 थी। इसी तरह, इक्विपमेंट फेलियर की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है। 

 

क्‍या है रिपोर्ट 

रेलवे के एफिशिएंसी एवं रिसर्च निदेशालय ने अपनी एक रिपोर्ट में अप्रैल में हुए‍ इक्विपमेंट फेलियर के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक - 

इक्विपमेंट फेल

अप्रैल 2018

अप्रैल 2017

इलेक्ट्रिक लोको

1062

142

ओएचई

223

17

रेल फ्रेक्‍चर

121

58

वेल्‍ड फ्रेक्‍चर

85

71

कोच डिटेचमेंट

74

4

हॉट एक्‍सल

37

23

पुअर पॉवर ब्रेक

142

0

ट्रेन पार्टिंग

45

20

वैगन डिटेचमेंट

161

58

डीजल लोको

904

239

सिग्‍नल फेल

8858

11690

 

कम हुई सिग्‍नल फेल की घटनाएं 

यह रिपोर्ट बताती है कि केवल सिग्‍नल फेल होने की घटनाओं में कमी आई है। अप्रैल 2017 में जहां सिग्‍नल फेल की 11690 घटनाएं हुई थी, वहीं अप्रैल 2018 में यह घटकर 8858 घटनाएं हुई। हालांकि औसतन रोजाना 295 सिग्‍नल फेल होना भी कोई अच्‍छी बात नहीं है। 

 

इस कारण होती हैं ट्रेनें लेट 
रेलवे के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इक्विपमेंट फेल होने के कारण ही ट्रेनें लेट होती हैं। जैसे कि ओएचई ( ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर) खराब हो जाए तो पूरे रूट की ट्रेनें प्रभावित हो जाती हैं। हालांकि इसकी सूचना मिलते ही एक निश्चित एरिया में बिजली की सप्‍लाई बंद करके मरम्‍मत की जाती है, लेकिन इस प्रोसेस में आधा घंटा तक लग जाता है। इसी तरह रेल फ्रेक्‍चर का पता लगने के बाद मरम्‍मत में एक से दो घंटे लग जाते हैं। इस वजह से ट्रेनों  को रोकना पड़ता है। या उन्‍हें धीमी गति से चलाया जाता है। 

 

सेफ्टी के लिए भी है खतरा 

हालांकि रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड का दावा है कि पिछले सालों के मुकाबले ट्रेन एक्‍सीडेंट कम हुए हैं, लेकिन एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि इक्विपमेंट फेलियर की बढ़ती घटनाओं के कारण रेलवे की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। उन्‍होंने कहा कि यह एक अच्‍छी बात है कि रेलवे ने अपने इंफॉरमेशन सिस्‍टम में काफी सुधार किया है, जिससे पहले के मुकाबले इक्विपमेंट फेलियर की घटनाएं अधिक रिकॉर्ड हो रही हैं। यही वजह है कि पिछले सालों के मुकाबले इक्विपमेंट फेलियर की घटनाएं बढ़ी हुई दिख रही हैं, लेकिन इससे रेलवे को सबक लेना चाहिए और समय रहते न केवल इक्विपमेंट का मेंटनेंस करना चाहिए, बल्कि आगे ऐसी घटनाएं न हों, उन्‍हें रोकने का प्रयास करना चाहिए। उनके मुताबिक, अब इक्विपमेंट फेलियर की घटनाएं आईसीएमएस सॉफ्टवेयर में रिकॉर्ड की जा रही हैं। 

 

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