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पावर सेक्‍टर पर साइबर अटैक का खतरा, CEA ने तैयार किया क्राइसिस मैनेजमेंट प्‍लान

पावर डिस्ट्रिब्‍यूशन सेक्‍टर पर साइबर अटैक के खतरे की आशंका को देखते हुए CEA ने क्राइसिस मैनेजमेंट प्‍लान तैयार किया है

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नई दिल्‍ली. पावर डिस्ट्रिब्‍यूशन सेक्‍टर पर साइबर अटैक के खतरे की आशंका को देखते हुए सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ने क्राइसिस मैनेजमेंट प्‍लान तैयार किया है। सीइए ने सभी डिस्‍कॉम्‍स्‍ा से कहा है कि वे साइबर अटैक से बचने के लिए अपने आईटी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को मजबूत करें। 

 

क्‍यों बढ़ा खतरा 
सीईए ने सभी डिस्‍कॉम्‍स को लिखे पत्र में कहा है कि विश्‍व के साथ गति बनाए रखने के लिए पावर सेक्‍टर को नई टैक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल करना बहुत जरूरी है। यही वजह है कि भारत सरकार ने 11वें प्‍लान में पावर सेक्‍टर में ऑटोमेशन और आईटी सेक्‍टर को प्रमोट करने के लिए कई कदम उठाए और देश में स्‍मार्ट ग्रिड को लागू किया। इन दिनों पावर डिस्ट्रिब्‍यूशन सेक्‍टर में स्‍काडा और स्‍मार्ट ग्रिड का इस्‍तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। 59 शहर ऐसे हैं, जहां स्‍काडा प्रोजेक्‍ट्स अलग अलग स्‍टेज पर कम्‍प्‍लीट होने वाले हैं। साथ ही, 10 अलग-अलग जगह स्‍मार्ट ग्रिड पर भी काम चल रहा है। सरकार हर घर में स्‍मार्ट मीटर लगाने की योजना पर भी काम कर रही है। लेकिन जैसे-जैसे पावर डिस्ट्रिब्‍यूशन सेक्‍टर में आईटी का इस्‍तेमाल बढ़ा है, वैसे-वैसे साइबर अटैक का खतरा भी बढ़ा है। 

 

क्‍या हो सकता है नुकसान 
सीईए के मुताबिक सभी डिस्‍कॉम्‍स द्वारा अपने रोजाना के ऑपरेशन के लिए इंफॉर्मेशन एंड कॉम्‍युनिकेशन टैक्‍नोलॉजी (आईसीटी) का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। इसमें बिलिंग, स्‍काडा, जीआईएस और मीटरिंग शामिल है। एक डिस्ट्रिब्‍यूशन कंपनी में साइबर अटैक से नेशनल ग्रिड के ऑपरेशन को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। साथ ही, डिस्‍कॉम के सेंट्रल कंट्रोल सेंटर से पावर सप्‍लाई को रोका जा सकता है, इससे घरों की सप्‍लाई तो बंद होगी ही, साथ ही अस्‍पताल, मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट, वीवीआईपी गर्वनमेंट ऑफिस में बिजली सप्‍लाई रोक कर बड़ा नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा एडवांस मीटरिंग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर (एएमआई) के डाटा कलेक्‍शन में गलत रिपोर्टिंग करके राजस्‍व का भी नुकसान हो सकता है। 

 

क्‍या है प्‍लान 
सीइए ने डिस्‍कॉम्‍स से कहा है कि साइबर सिक्‍योगिरी के पुख्‍ता इंतजाम कर लें और साइबर स्क्यिोरिटी पॉलिसी बनाएं। डिस्‍कॉम्‍स को अपने ऑर्गनाइजेशन का क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर तैयार करना होगा। ऐसे सभी रिस्‍क और संभावनाओं को डॉक्‍यूमेंट बनाना होगा। डिस्‍कॉम्‍स को समय-समय पर साइबर ऑडिट करना होगा। डिस्‍कॉम्‍स को चीफ इंफॉर्मेशन सिक्‍योरिटी ऑफिसर को अप्‍वाइंट करना होगा और सीआईएसओ के नेतृत्‍व में एक टीम का गठन करना होगा। 

 

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