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52 हजार मेगावाट के पावर प्‍लांट ठप, 26 थर्मल यूनिट में नहीं है कोयला

लगभग 52 हजार मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट ठप पड़े हैं।

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नई दिल्‍ली। डिमांड न होने के बावजूद कई राज्‍यों में बिजली संकट बढ़ गया है। लगभग 52 हजार मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट ठप पड़े हैं। जिनमें से 26 थर्मल यूनिट में कोयला न होने के कारण बिजली जनरेट नहीं हो रहे हैं। यही वजह है कि देश भर में लगभग 12 फीसदी पावर शॉर्टेज रिकॉर्ड की गई है। सबसे अधिक शॉर्टेज नॉर्दर्न स्‍टेट्स में हो रही है। इसके चलते इंडस्‍ट्री, खासकर एमएसएमई सेक्‍टर में प्रोडक्‍शन पर असर पड़ा है।

 

कितनी हो रही शॉर्टेज

नेशनल लोड डिस्‍पेच सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक 18 फरवरी को 155050 मेगावाट बिजली की सप्‍लाई हुई। जबकि पीक शॉर्टेज लगभग 782 मेगावाट की रही और मिलियन यूनिट के हिसाब से लगभग 12.1 फीसदी शॉर्टेज रिकॉर्ड की गई। यहां यह उल्‍लेखनीय है कि आम दिनों में 3 से 4 फीसदी ही पावर शॉर्टेज होती है।

 

कहां है शॉर्टेज

एनएलडीसी के मुताबिक, सबसे अधिक पावर शॉर्टेज नॉर्दर्न रीजन में हो रही है। यहां लगभग 11.5 फीसदी पावर शॉर्टेज रिकॉर्ड की गई, जबकि यहां पावर डिमांड लगभग 51738 मेगावाट रही और पीक अवर में लगभग 704 मेगावाट बिजली की कटौती हुई।

 

कौन से राज्‍य हैं प्रभावित

उत्‍तर प्रदेश : 290 मेगावाट

हरियाणा : 19 मेगावाट

राजस्‍थान : 165 मेगावाट

जम्‍मू कश्‍मीर : 521 मेगावाट

 

क्‍या है वजह

कोयले से चलने वाले थर्मल प्‍लांट के ठप होने का बड़ा कारण कोयले की कमी है। कोयले की कमी के चलते 26 थर्मल यूनिट ठप पड़ी हैं। जबकि गैस से चलते वाले पावर प्‍लांट्स की 22 यूनिट गैस की कमी के कारण बंद पड़ी हैं। रिपोर्ट बताती है कि 36113 मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट्स फोर्स मेंटेनेंस (मेजर) के कारण बंद हैं, जबकि 16125 मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट्स फोर्स मेंटेनेंस (माइनर) की वजह से बंद पड़े हैं। यानी कुल 52238 मेगावाट के पावर प्‍लांट फोर्स मेंटेनेंस के कारण बंद हैं, जबकि 6029 मेगावाट पावर प्‍लांट्स प्‍लांड मेंटेनेंस के कारण बंद हैं। इसी तरह अन्‍य कारणों से 9304 मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट बंद हैं। 

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