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कमर्शियल कोल माइनिंग से बचेंगे 30 हजार करोड़, पावर-स्‍टील सेक्‍टर को होगा फायदा

मोदी सरकार ने कॉमर्शियल कोल माइनिंग की इजाजत देकर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए के कोल इंपोर्ट की बचत होगी

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नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने कमर्शियल कोल माइनिंग की इजाजत देकर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए के कोल इंपोर्ट की बचत होगी। अभी विदेशों से लगभग 59 हजार करोड़ रुपए का नॉन-कूकिंग कोल इंपोर्ट किया जाता है। ग्‍लोबल एनालिटक्‍स कंपनी क्रिसिल का दावा है कि कमिर्शयल कोल माइनिंग से लगभग 50 फीसदी इंपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे पावर और स्टील सेक्‍टर को काफी फायदा होगा। 

 

कैबिनेट ने लिया फैसला 
पिछले सप्‍ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कमिर्शयल कोल माइनिंग की इजाजत दी गई। इस फैसले के बाद खनन करने वाली प्राइवेट कंपनियां किसी को भी कोयला बेच सकेंगी, जिस पर अब तक प्रतिबंध था। अब तक के नियम के मुताबिक, प्राइवेट खनन कंपनियां केवल अपने इस्‍तेमाल के लिए ही खनन कर सकती हैं। कोल, पावर व स्‍टील इंडस्‍ट्री के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

 

कितना कोयला मंगाता है भारत 
मंगलवार को क्रिसिल द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी भारत कोयले की कुल सालाना जरूरत का पांचवा हिस्‍सा विदेशों से आयात करता है। जिसकी कुल कीमत लगभग एक लाख करोड़ रुपए का कोयला विदेशों से मंगाता है। इसमें से 59 हजार करोड़ रुपए नॉन-कूकिंग कोल और 41 हजार करोड़ रुपए कूकिंग कोल है। नॉन-कूकिंग कोल का इस्‍तेमाल पावर और स्‍टील सेक्‍टर में होता है। यदि कमर्शियल माइनिंग शुरू होती है तो देश में नॉन-कूकिंग कोल की मात्रा बढ़ जाएगी। 

 

बढ़ेगा उत्‍पादन 
क्रिसिल के मुताबिक, कोल माइनिंग में प्राइवेट सेक्‍टर को इजाजत मिलने के बाद कॉम्पिटशन बढ़ेगा। वहीं, प्राइवेट सेक्‍टर बड़ी तेजी से इस सेक्‍टर में इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ाएगा। इससे कोयले का उत्‍पादन काफी बढ़ जाएगा। क्रिसिल का अनुमान है कि इस कदम से 2022 में कोयले का सालाना उत्‍पादन 1.5 बिलियन टन तक पहुंच जाएगा। 
 

सरकारी कंपनियों का वर्चस्व कम होगा

वर्तमान में लगभग 94 फीसदी माइनिंग सरकारी कम्पनियों कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड द्वारा किया जाता है। केवल 6 फीसदी प्राइवेट सेक्टर ही कोयला खनन करता है। इसकी बड़ी वजह यह थी कि प्राइवेट सेक्टर को कमर्शियल माइनिंग की इजाजत नहीं थी। अब यह प्रतिबंध खत्म होने के बाद प्राइवेट सेक्टर का रुझान कोल माइनिंग के प्रति बढ़ेगा। क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर सचिन गुप्ता ने कहा कि कोल इम्पोर्ट विशेषकर नॉन कुकिंग वैरायटी में काफी कमी आएगी और कोल माइनिंग में प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां आएंगी।

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