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60 हजार MW के प्‍लांट बंद होने से गहराएगा बिजली संकट, 5% की दर से बढ़ी डिमांड

60 हजार मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट्स बंद होने के कारण बिजली संकट गहराने के आसार हैं

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नई दिल्‍ली। गर्मी के साथ ही बिजली की डिमांड भी बढ़ने लगी है। पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक पावर डिमांड में 5 फीसदी इजाफा हो गया है। जबकि 60 हजार मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट्स बंद होने के कारण बिजली संकट गहराने के आसार हैं। अभी देश भर में लगभग 3.47 फीसदी पावर शॉर्टेज है। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि यदि आने वाले दिनों में बंद पड़े पावर प्‍लांट्स शुरू नहीं हुए तो पावर शॉर्टेज बढ़ सकती है। जबकि एमएसएमई संगठनों का कहना है कि पिछले एक-सवा साल से उन्‍हें कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ी है और आने वाले दिनों में यदि पावर शॉर्टेज हुई तो उनकी परेशानी और बढ़ सकती है। 

 

 

क्‍या है पावर डिमांड 


नेशनल लोड डिस्‍पेच सेंटर (एनएलडीसी) के मुताबिक 7 अप्रैल 2018 को पूरे देश में मैक्सिमम डिमांड 151012 मेगावाट रही। जबकि 7 अप्रैल 2017 को मैक्सिमम डिमांड 148343 मेगावाट रही। एनएलडीसी के मुताबिक, शनिवार को देश में लगभग 15.7 मिलियन यूनिट की शॉर्टेज रिकॉर्ड रिकॉर्ड की गई। 


किन राज्‍यों में कितना पावर शॉर्टेज 
एनएलडीसी के मुताबिक, 6 अप्रैल को हरियाणा में 183 मेगावाट, यूपी में 125 मेगावाट, जम्‍मू कश्‍मीर में 546 मेगावाट बिजली की कटौती हुई। वहीं, गर्मी के कारण सभी राज्‍यों ने सेंट्रल शेड्यूल से अधिक पावर ओवरड्रॉ किया। नॉर्दर्न रीजन के राज्‍यों ने सबसे अधिक ओवरड्रॉ किया। 7 अप्रैल 2018 को हरियाणा ने 700 मेगावाट, राजस्‍थान ने 880 मेगावाट, दिल्‍ली ने 378 मेगावाट, यूपी ने 634 मेगावाट, मध्‍यप्रदेश ने 428 मेगावाट, महाराष्‍ट्र ने 536 मेगावाट बिजली ओवरड्रॉ की।

 

पावर प्‍लांट्स बंद

कोयले से चलने वाले थर्मल प्‍लांट के ठप होने का बड़ा कारण कोयले की कमी है। कोयले की कमी के चलते 26 थर्मल यूनिट ठप पड़ी हैं। जबकि गैस से चलते वाले पावर प्‍लांट्स की 22 यूनिट गैस की कमी के कारण बंद पड़ी हैं। रिपोर्ट बताती है कि 36113 मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट्स फोर्स मेंटेनेंस (मेजर) के कारण बंद हैं, जबकि 16125 मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट्स फोर्स मेंटेनेंस (माइनर) की वजह से बंद पड़े हैं। यानी कुल 52238 मेगावाट के पावर प्‍लांट फोर्स मेंटेनेंस के कारण बंद हैं, जबकि 6029 मेगावाट पावर प्‍लांट्स प्‍लांड मेंटेनेंस के कारण बंद हैं। इसी तरह अन्‍य कारणों से 9304 मेगावाट कैपेसिटी के पावर प्‍लांट बंद हैं।

 

एमएसएमई सेक्‍टर चिंतित

पिछले लगभग डेढ़ साल से एमएसएमई सेक्‍टर अलग-अलग चुनौतियों से जूझ रहा है। पहले नोटबंदी, उसके बाद मंदी, फिर जीएसटी और अब ई-वे बिल के कारण एमएसएमई सेक्‍टर सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। ऐसे में, यदि आने वाले दिनों में उद्योगों को पूरी बिजली नहीं मिलती है तो मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर पर प्रभाव पड़ेगा। हरियाणा के संगठन मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन, फरीदाबाद के महासचिव रमणीक प्रभाकर ने कहा कि उनके लिए गर्मी का सीजन नई तरह की चुनौती भरा होगा, इसलिए सरकारें उद्योग को पूरी बिजली मुहैया कराए।

 

 

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