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बंदरगाहों के पीपीपी प्रोजेक्‍ट के लिए आसान हुए नियम, निवेश को मिलेगा बूस्ट

नई दिल्‍ली. सरकार ने बड़े पोर्ट्स (बंदरगाह) पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) प्रोजेक्‍ट्स के लिए मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसका मकसद पोर्ट सेक्‍टर को इन्वेस्‍टर फ्रेंडली बनाना है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई। 

 

डेवलपर्स के लिए एग्जिट आसान 
इस रिवाइज्‍ड मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट (एमसीए) में डेवलपर्स को एग्जिट रूट प्रोवाइड कराया गया है। डेवलपर्स प्रोजेक्‍ट के कॉमर्शियल ऑपरेशन डेट के दो साल बाद अपनी इक्विटी को 100 फीसदी तक डायवर्ट कर सकेंगे। इस तरह का प्रावधान हाइवे सेक्‍टर के एमसीए में भी है। 

 

इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ेगा 
मिनिस्‍ट्री ऑफ शिपिंग द्वारा जारी स्‍टेटमेंट में कहा गया है कि यूनियन कैबिनेट के इस फैसले से पोर्ट सेक्‍टर में इन्‍वेस्‍टमेंट तेजी से बढ़ेगा। एमसीए में किए गए इस संशोधन को सोसायटी फॉर अफोर्डेबल रिड्रेसल ऑफ डिस्पयूट - पोर्ट (सरोद-पोर्ट) में समाहित किया जाएगा। इसी तरह का डिस्‍पयूट रिजॉल्यूशन मैकेनिज्‍म हाइवे सेक्‍टर में भी उपलब्‍ध है। 

 

कम होगा किराया 
सरकार ने कहा कि इस प्रावधान के तहत कंसेशनर की अतिरिक्‍त जमीन का किराया 120 फीसदी की बजाय 200 फीसदी कम किया जाएगा। 

 

रॉयल्‍टी चार्ज का तरीका बदलेगा 
इस प्रावधान के तहत रॉयल्‍टी चार्ज के वर्तमान तरीका बदल जाएगा और जो ग्रोस रेवेन्‍यू के परसन्‍टेज के समान होगा, जिसका कैलुकेशन टैरिफ अथॉरिटी फॉर मेजर पोर्ट द्वारा बिडिंग के दौरान किया जाता है। 

 

पेंडिंग शिकायतों का समाधान 
सरकार का कहना है कि इससे पीपीपी प्रोजेक्‍ट ऑपरेटर्स की लंबे समय से पेंडिंग शिकायतों का समाधान करना आसान हो जाएगा। नए एग्रीमेंट में अब वास्‍तविक प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट को टोटल प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट में बदला जाएगा। साथ ही चेंज इन लॉ की परिभाषा में टैम्‍प की गाइडलाइंस व ऑर्डर, इन्‍वायरमेंट लॉ और लेबर लॉ, नए टैक्‍स, ड्यटी में बदलाव किया जाएगा, जो कंसेशनर को फायदा पहुंचाएंगे। 

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