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अब लगाएं अपना खुद का माइक्रो ग्रिड, हो जाएगी 92% बिजली की बचत 

दिल्ली की इस कंपनी ने चार लोकेशन पर की शुरुआत, जानें क्या आएगी लागत

Solar energy : What is Personal Micro grid

बिजली उपभोक्ता अब अपना खुद का, पर्सनल माइक्रो ग्रिड (Micro Grid) लगवा सकते हैं। इससे जहां एक ओर बिजली के पारंपरिक ग्रिड पर से उपभोक्ताओं की निर्भरता लगभग पूरी तरह खत्म हो जाएगी, वहीं दूसरी ओर यह माइक्रो ग्रिड उनके बिजली बिल को भी करीब-करीब शून्य कर देगा। बीवाईपीएल ने अभी हाल ही में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर, अपने चार लोकेशनों पर ये माइक्रो ग्रिड्स लगाए हैं, जिसके चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। माइक्रो ग्रिड लगने के बाद बिजली के पारंपरिक ग्रिड पर इन चारों लोकेशनों की निर्भरता अचानक 92 प्रतिशत कम हो गई। यानी, माइक्रो ग्रिड लगने के बाद, इन चारों लोकेशनों ने बिजली के पारंपरिक ग्रिड से सिर्फ 8 प्रतिशत बिजली का उपयोग किया। इन लोकेशनों ने 92 प्रतिशत बिजली अपने खुद के माइक्रो ग्रिड से ली और उसका इस्तेमाल किया। ये माइक्रो ग्रिड्स लगाने के लिए बीवाईपीएल ने पैनासॉनिक के साथ साझेदारी की थी। बीआरपीएल में भी जल्द ही माइक्रोग्रिड्स लगने शुरू होंगे


नई दिल्ली. बिजली उपभोक्ता अब अपना खुद का, पर्सनल माइक्रो ग्रिड (Micro Grid) लगवा सकते हैं। इससे जहां एक ओर बिजली के पारंपरिक ग्रिड पर से उपभोक्ताओं की निर्भरता लगभग पूरी तरह खत्म हो जाएगी, वहीं दूसरी ओर यह माइक्रो ग्रिड उनके बिजली बिल को भी करीब-करीब शून्य कर देगा। बीवाईपीएल ने अभी हाल ही में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर, अपने चार लोकेशनों पर ये माइक्रो ग्रिड्स लगाए हैं, जिसके चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। माइक्रो ग्रिड लगने के बाद बिजली के पारंपरिक ग्रिड पर इन चारों लोकेशनों की निर्भरता अचानक 92 प्रतिशत कम हो गई। यानी, माइक्रो ग्रिड लगने के बाद, इन चारों लोकेशनों ने बिजली के पारंपरिक ग्रिड से सिर्फ 8 प्रतिशत बिजली का उपयोग किया। इन लोकेशनों ने 92 प्रतिशत बिजली अपने खुद के माइक्रो ग्रिड से ली और उसका इस्तेमाल किया। ये माइक्रो ग्रिड्स लगाने के लिए बीवाईपीएल ने पैनासॉनिक के साथ साझेदारी की थी। बीआरपीएल में भी जल्द ही माइक्रोग्रिड्स लगने शुरू होंगे।

क्या है माइक्रो ग्रिड
माइक्रो ग्रिड, दरअसल, अपने आप में एक पूरा का पूरा ग्रिड है। लेकिन पारंपरिक ग्रिड के उलट, माइक्रो ग्रिड सौर ऊर्जा से चलने वाले पैनलों के माध्यम से काम करता है। आम तौर पर सौर ऊर्जा पैनलों द्वारा बनाई गई बिजली डिस्काॅम के ग्रिड में चली जाती है और बाद में उपभोक्ता ग्रिड से बिजली लेकर उसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, माइक्रो ग्रिड के साथ ऐसा नहीं है। माइक्रो ग्रिड की खासियत यह है कि सौर ऊर्जा के पैनलों से बनने वाली बिजली को वह, वहीं उपभोक्ता के घर पर ही लिथियम लो बैटरी में स्टोर कर देगा और उपभोक्ता के घर के उपकरणों को उस बैटरी से कनेक्ट कर दिया जाएगा। यानी, जब उपभोक्ता के घर के बिजली उपकरण काम करेंगे, तो वे डिस्कॉम के ग्रिड की बिजली का उपयोग न कर, अपने माइक्रो ग्रिड की बैटरी में स्टोर बिजली का उपयोग करेंगे।

क्या है फायदा
चूंकि माइक्रो ग्रिड की बिजली सोलर पैनलों द्वारा बनेगी और बैटरी में स्टोर हो जाएगी, इसलिए उपभोक्ता के पास लगभग हमेशा, बैटरी में बिजली उपलब्ध रहेगी। यह बैटरी सौर ऊर्जा से ही चार्ज होती रहेगी। चूंकि यह माइक्रो ग्रिड उपभोक्ताओं का अपना, खुद का सेटअप होगा, इसलिए डिस्कॉम के पारंपरिक ग्रिड पर से उनकी निर्भरता लगभग पूरी तरह खत्म हो सकती है और उनका बिजली बिल भी लगभग शून्य हो सकता है। यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा है, क्योंकि इससे कोयले की खपत में भी कमी आएगी। कोयला कम जलेगा, तो सीओ2 के उत्सर्जन में भी कमी आएगी। गौरतलब है कि बिजली बनाने के लिए पारंपरिक तौर पर कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। माइक्रो ग्रिड से डीजल की खपत में भी बड़े पैमाने पर कमी आएगी। 
अगर सिर्फ बीवाईपीएल के चार लोकेशनों की ही बात करें, तो माइक्रो ग्रिड की वजह से 92 प्रतिशत बिजली बचत के अलावा, इससे करीब 1245 लीटर डीजल की बचत होगी और सीओ2 में भी 205 टन की कमी आएगी।

आगे क्या संभावना है
अगर 1000 उपभोक्ताओं के यहां ऐसे माइक्रो ग्रिड लगाए जाएं, तो इससे एक साल में 62 मिलियन यूनिट बिजली की बचत होने की संभावना है। सालाना 3 लाख लीटर डीजल की बचत होने की भी उम्मीद है। इससे सीओ2 में 51,000 टन की कमी आने का अनुमान है। माइक्रोग्रिड के कॉन्सेप्ट को लोकप्रिय बनाने तथा परफॉर्मेंस का विश्लेषण करने के लिए बीवाईपीएल ने दक्षिण एशिया के नामी रिसर्च संस्थान काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरमेंट एंड वाटर से एक समझौता भी किया है। यह एक रिसर्च संस्थान है।

माइक्रो ग्रिड की लागत
प्रति किलोवाट रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की लागत 40 हजार रूपये है और इस प्लांट से बनी बिजली को स्टोर करने के लिए स्टोर करने के लिए जिस बैटरी की जरूरत होगी, उसकी लागत प्रति किलोवॉट 80 हजार रूपये है। लेकिन, आने वाले दिनों में जब ज्यादा उपभोक्ता माइक्रो ग्रिड लगवाएंगे, तो इसकी लागत में और भी कमी आने की उम्मीद है।
बीएसईएस प्रवक्ता के मुताबिक, अक्षय ऊर्जा के उपयोग को ब-सजय़ावा देने, कार्बन फुटप्रिंट्स में कमी लाने और उपभोक्ताओं के बिजली बिल को घटाने में उपभोक्ताओं की मदद करने के उद्देश्य से बीएसईएस इस क्षेत्र में नित नए प्रयोग कर रही है। बीएसईएस के इन्हीं प्रयासों का एक उदाहरण है माइक्रो ग्रिड। ग्रीन डिविजन पहल के तहत शुरू किए गए माइक्रो ग्रिड को अपनाने से उपभोक्ताओं और पर्यावरण, दोनों को ही काफी फायदा मिलेगा।

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