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100 साल से भी पुराने 37 हजार पुलों पर चलती है भारतीय रेल, स्टैंडिंग कमेटी ने जताई चिंता

पुलों की मेंटनेंस और इंस्पेक्शन करने वाले कर्मचारियों के 40 फीसदी पद खाली

Indian Railway : how safe are rail bridges

Indian Railway : भारतीय ट्रेनें रोजाना ऐसे पुलों से होकर गुजरती हैं, जो 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। ऐसे पुलों की संख्या 37689 है, जबकि कुल रेल पुलों की संख्या 1 लाख 47 हजार 523 है। यानी कि हर तीसरा पुल 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। बृहस्पतिवार को संसद में रखी गई रेलवे पर बनी स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। कमेटी ने न केवल इस हैरानी जताई है, बल्कि इसे रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरनाक भी बताया है। 

राजू सजवान

 

भारतीय ट्रेनें रोजाना ऐसे पुलों से होकर गुजरती हैं, जो 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। ऐसे पुलों की संख्या 37689 है, जबकि कुल रेल पुलों की संख्या 1 लाख 47 हजार 523 है। यानी कि हर तीसरा पुल 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। बृहस्पतिवार को संसद में रखी गई रेलवे पर बनी स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। कमेटी ने न केवल इस हैरानी जताई है, बल्कि इसे रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरनाक भी बताया है। 

 

सदन में रखी रिपोर्ट  
इंडियन रेलवे में पुलों की मरम्मत पर एक रिव्यू रिपोर्ट स्टैंडिंग कमेटी की ओर से लोकसभा और राज्यसभा में रखी गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय रेलवे का कुल ट्रेक 67368 किलोमीटर लंबा है, लेकिन ट्रेक के साथ-साथ रेल पुल भी रेल ट्रांसपोर्ट के लिए लाइफ लाइन काम करते हैं। भारत में एक अप्रैल 2018 तक कुल रेल पुलों की संख्या 147523 थी, जिन्हें तीन कैटेगिरी में बांटा गया हे। इनमें 700 बेहत महत्वपूर्ण कैटेगिरी में हैं, जबकि 12085 पुल बड़े हैं और 135738 पुल छोटे हैं। 

 

160 साल पुराना नेटवर्क 
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में रेल नेटवर्क 160 साल पुराना है। उसके बाद से नेटवर्क को जोड़ने के लिए रेल पुलों का निर्माण किया गया। इनमें से कुछ पर रेल परिचालन बंद कर दिया गया है, लेकिन अभी भी 37689 पुल ऐसे हैं, जो 100 साल से भी अधिक पुराने हैं। 

 

सेफ्टी पर संदेह 
कमेटी ने रिपोर्ट के अंत में सारांश में कहा कि जब पुराने पुलों की सेफ्टी के बारे में रेल मंत्रालय से पूछा गया तो मंत्रालय ने जवाब दिया कि पुल की सेफ्टी का पूरा ख्याल रखा जाता है, लेकिन हमें (कमेटी को)  संदेह है कि पुराने पुलों पूरी तरह सेफ हैं, क्योंकि पिछले कुछ सालों दौरान ट्रेनों की संख्या और गति बढ़ाई गई है और ट्रेन का वजन भी बढ़ा है, ऐसे में इन पुलों पर ट्रेन चलाना खतरनाक हो सकता है। 

 

40 फीसदी पद खाली 
रिपोर्ट में कमेटी ने इस बात पर भी हैरानी जताई है कि एक ओर रेलवे दावा कर रहा है कि पुलों का रेगुलर इंस्पेक्शन के साथ-साथ मेंटनेंस किया जाता है, लेकिन रेलवे के ही आंकड़े बताते हैं कि पुलों के मेंटनेंस और इंस्पेक्शन स्टाफ के 40 फीसदी पद खाली पड़े हैं। इसमें कुल सेंक्शन पदों की संख्या 7669 है, जबकि अभी 4517 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। बाकी कर्मचारियों की भर्ती नहीं की जा रही है। 

 

8611 नए पुल बन रहे हैं 
कमेटी ने जब रेल मंत्रालय से पूछा कि क्या रेलवे नए पुल भी बना रहा है तो मंत्रालय की ओर से बताया गया कि पिछले तीन सालों में 2015 से 2018 के बीच 8611 नए पुल बने हैं, क्योंकि नई लाइनें बिछाई गई हैं और उन्हें डबल किया गा हे। इसके अलावा इन तीन सालों में 2347 पुराने पुलों को फिर से बनाया गया है, जबकि 3017 पुल को फिर से बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल चुकी है। 

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