Home » Economy » Infrastructureपड़ोसी देशों से कारोबार बढ़ाने लिए बनेंगी सड़कें - facilitate trade with bordering countries will link its major highway corridors

ग्लोबल ट्रेड बढ़ाने के लिए 25 हजार करोड़ की लागत से बनेंगी सड़कें, पड़ोसियों से बढ़ेगा करोबार

पड़ोसी देशाें जैसे नेपाल और बंग्‍लादेश से ट्रेड बढ़ाने के लिए भारत सड़कों पर 25 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगा।

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नई दिल्‍ली. पड़ोसी देशाें जैसे नेपाल और बंग्‍लादेश से ट्रेड बढ़ाने के लिए भारत सड़कों पर 25 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगा। इस निवेश से इंटरनेशलन ट्रेड प्‍वांइट को महामार्गों से जोड़ा जाएगा। इस बात की जानकारी ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍टर नितिन गडकरी ने दी है। उन्‍होंने कहा कि इस योजना के तहत करीब 2 हजार किलोमीटर की सड़कें बनाई जाएंगी।

 

 

इंटरनेशनल ट्रेड प्‍वाइंट को जोड़ने की योजना

उन्‍होंने कहा कि भारत की योजना अपने पड़ोसी देशों से व्‍यापार के प्‍वाइंट को महामार्गों से जोड़ने की है। इससे कारोबार आसान और सस्‍ता पड़ेगा। इस योजना के तहत भारत में 2000 किलोमीटर की सड़कें बनाई जाएंगी। उन्‍होंने कहा कि नेपाल, भूटान, बंग्‍लादेश और वर्मा के साथ इन सड़कों के निर्माण से आसानी होगी। उन्‍होंने बताया कि यह सड़कें भारतमाला परियोजना के तहत बनाई जाएंगी।

 

 

कैबिनेट ने दी मंजूरी

उन्‍होंने बताया कि कैबिनेट ने 25 अक्‍टूबर 2017 को 83,677 सड़कें बनाने के लिए मंजूरी दी है। इन सड़कों का निर्माण मार्च 2022 तक किया जाएगा। इन परियोजना पर करीब 7 लाख करोड़ रुपए की लागत आएगी।

 

 

पैसे जुटाने की यह है योजना

इन परियोजनाओं के लिए पैसा जुटाने की योजना का खुलासा करते हुए उन्‍होंने बताया कि 2.37 लाख करोड़ रुपए सेंट्रल रोड फंड से मिलेगा। इसके अलावा 2.05 लाख करोड़ रुपए उधारी से जुटाया जाएगा। बाकी पैसों के लिए हाइवे मोनेटाइजेशन स्‍कीम से 34 हजार करोड़ रुपए और 60 हजार करोड़ रुपए बजटरी सपोर्ट से जुटाया जाएगा।

 

 

कई सड़क परियोजनाओं पर चल रहा काम

उन्‍होंने कहा कि इंटरनेशनल ट्रेड प्‍वाइंट को जोड़ने वाली सड़कों की परियोजना के अलावा भी कई सड़क परियोजनाआें पर काम चल रहा है। इन सड़क परियोजनाओं से भारत की अपने पड़ोसी देशाें के साथ इनेक्टिविटी बढ़ेगी। इन देशों में आसियान और दक्षिण एशिया के देश शामिल हैं। इसके अलावा नेपाल के साथ 2016 में हुए ट्रेड पैक्‍ट से नेपाल के तराई वाले इलाकों से भी ट्रेड को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस काम के लिए एक विशेष कंपनी का गठन किया गया है।

 

 

 

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