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Home » Economy » InfrastructureDelhi Metro will give its two oldest line to be run by private players

अब प्राइवेट कंपनियों के हाथों में होगी दिल्ली मेट्रो की कमान, सबसे पुरानी इन दो लाइनों के लिए मांगे टेंडर

आर्थिक समस्या से निपटने के लिए लिया इतना बड़ा फैसला

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नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने बढ़ते नेटवर्क को देखते हुए अपनी सबसे पुरानी दो मेट्रो लाइंस को प्राइवेट हाथों में सौंपने का फैसला किया है। टीओआई में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली मेट्रो ने इसके लिए अपने सबसे पुराने कॉरिडोर रेड लाइन (दिलशाद गार्डन से रिठाला) और येलो लाइन (समयपुर बादली से हुडा सिटी सेंटर) का चयन किया है। दिल्ली मेट्रो के एक प्रवक्ता के हवाले से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों मेट्रो कॉरिडोर को निजी हाथों में सौंपने के लिए जल्द ही टेंडर मांगे जाएंगे। 

 

डीएमआरसी रखेगी नजर
दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता के अनुसार, इन दोनों कॉरिडोर पर मेट्रो ट्रेन के संचालन और मैंटेनेंस का जिम्मा निजी हाथों में सौंपा जाएगा। यह कंपनियां मेट्रो ट्रेन्स के लिए ड्राइवर और अन्य स्टाफ उपलब्ध कराएंगी। प्रवक्ता के अनुसार, इन दोनों कॉरिडोर पर तैनात दिल्ली मेट्रो का मौजूदा स्टाफ आपातकाल, फॉल्ट दूर करने और निजी कंपनियों के स्टाफ को प्रशिक्षित करने का कार्य करेगा। इन दोनों कॉरिडोर पर निजी कंपनियों के कार्य पर दिल्ली मेट्रो की पूरी नजर रखेगी। 

इसलिए लिया फैसला


इस समय दिल्ली मेट्रो में ट्रेन ऑपरेटर का वेतन ग्रेड 20,600 रुपए है। यह गैर कार्यकारी डीएमआरसी कर्मचारियों के लिए उच्चतम ग्रेड है। ट्रेन ऑपरेटर भी गैर कार्यकारी कर्मचारियों की श्रेणी में आते हैं। यह ट्रेन ऑपरेटर लंबे समय से वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वेतन में बढ़ोतरी को लेकर ट्रेन ऑपरेटर पहले कई बार हड़ताल करने की धमकी भी दे चुके हैं। इसी समस्या से निजात पाने के लिए मेट्रो ने इन दोनों कॉरिडॉर पर मेट्रो ट्रेन का संचालन और मैंटेनेंस का जिम्मा निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है। दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता के अनुसार, डीएमआरसी प्राइवेट कंपनियों को मेट्रो ट्रेन चलने के घंटों के हिसाब से भुगतान करेगा। दिल्ली मेट्रो का मानना है कि यह उसके लिए आर्थिक तौर पर फायदे का सौदा रहेगा।

प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी करेगी दिल्ली मेट्रो


दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता के अनुसार, एक बार टेंडर फाइनल होने के बाद कंपनी को नया स्टाफ हायर करने के लिए एक माह का समय दिया जाएगा। इसके बाद निजी कंपनी के स्टाफ को डीएमआरसी की तरफ से दो महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी। निजी कंपनियों के स्टाफ को ट्रेन की सुरक्षा, समय की पाबंदी और यात्रियों का विश्वास बनाए रखने के लिए गुणवत्तापरक ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही इसका नियमित निरीक्षण भी किया जाएगा।

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