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तेल की कीमतों से परेशान मोदी सरकार को वेनेजुएला ने दि‍ए 2 बड़े ऑफर

बीते एक महीने से कच्‍चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। वेनेजुएला ने भारत को ऑफर दि‍ए है।

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नई दि‍ल्‍ली. अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से भारत में डीजल-पेट्रोल की कीमतें रि‍कॉर्ड हाई पर पहुंच गई हैं। इस वजह से सरकार पर एक्‍साइज ड्यूटी घटाने को लेकर काफी दबाव बन गया है। बीते एक महीने से कच्‍चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। 

 


पहला ऑफर - मई के पहले सप्‍ताह में 
वेनेजुएला ने अरब देशों से 30 फीसदी सस्‍ता कच्‍चा तेल देने का ऑफर दिया। हालांकि इसके लिए उसकी एक शर्त है। वेनेजुएला चाहता है कि क्रूड के बदले भारत सरकार जो पैसा दे वह उसकी क्रिप्‍टोकरंसी पैक्‍ट्रो के जरिए दे। दरअसल अपनी क्रिप्‍टोकरंसी को मजबूत बनाने के इरादे से वेनेजुएला ने कई देशों को इस तरह का ऑफर दिया है। 

यह किसी देश की ओर से जारी की गई पहली पेट्रो वर्चुअल करंसी है, जि‍सका इस्‍तेमाल पेट्रोल की खरीद फरोख्‍त के  लि‍ए कि‍या जा सकता है। वेनेजुएला ने अपने ऑयल रिजर्व को ध्‍यान में रखकर ही इस करंसी की शुरुआत की है। बता दें कि करीब 300 अरब बैरल के साथ  वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा पेट्रोलियम ऑयल रिजर्व है। 

 


दूसरा ऑफर - मई के तीसरे सप्‍ताह में 
वेनेजुएला अब तेल के बदले रुपए में पेमेंट लेने को तैयार है। भारत में वेनेजुएला के राजदूत अगस्‍तो मोंटि‍यल ने कहा कि‍ ऐसा करने से दोनों देश अमेरि‍का की ओर से लगाई गई पाबंदी को बाईपास कर पाएंगे। उन्‍होंने कहा कि‍ इन पाबंदि‍यों की वजह से वेनेजुएला के तेल उत्‍पादन को चोट पहुंची है। 

उनका देश चाहता है कि‍ भारत उनसे तेल खरीदे और उसके बदले रुपए में पेमेंट करे, ताकि‍ इस पैसे से वह भारत से दवाएं और खाने-पीने की चीजें खरीद सकें। वेनेजुएला ने इसी तरह का समझौता तुर्की, चीन और रूस के साथ भी कि‍या है। कई मोर्चों पर वि‍रोध करने की वजह से अमेरि‍का ने वेनेजुएला पर व्‍यापारि‍क प्रति‍बंध लगा दि‍ए हैं। 

 

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85 डॉलर का बैरियर पार कर सकता है क्रूड  

एक्‍सपर्ट का मानना है कि क्रूड की कीमतें मौजूदा के 80 डॉलर प्रति डॉलर के लेवल से आगे बढ़कर 85 डॉलर का बैरियर तोड़ सकता है। केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, आने वाले दिनों में क्रूड 85 से 86 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। ग्लोबल एजेंसी मॉर्गन स्टैनली के अनुसार क्रूड का कंसर्न अभी 2 साल और बना रहेगा और 2020 में यह 90 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर सकता है। मतलब साफ है, पेट्रोलियम को लेकर मोदी सरकार पर दबाव आगे भी बना रहेगा। 

 

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