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1.12 लाख करोड़ रु के मकान हैं खाली, नहीं मिल रहे खरीदार, बिक्री में लग जाएंगे तीन साल

फाइनेंसियल कंपनियों को हुई लिक्विडिटी की कमी

Unsold Housing Inventory in India

नई दिल्ली. देश में पूरी तरह से बन चुके मकान की लंबी लिस्ट है, जिन्हें खरीददार नहीं मिल रहे है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2018 की तिमाही में भारत के टॉप 27 लिस्टेड कंपनियां के पास करीब 1 लाख 12 हजार करोड़ की संपत्ति है, जिसे कोई खरीददार ढूढने से नहीं मिल रहे हैं। मकानों की यह लिस्ट मार्च की तिमाही तक 93,358 करोड़ रुपए की थी। 

 

मकान की बिक्री में गिरावट का दौर जारी 

कंपनियों की बैलेंस सीट के मुताबिक मार्च 2014 के अंत तक करीब 90 हजार करोड़ की कीमत के मकान नहीं बिके थे। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2019 में बढ़कर 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपए हो गया। वहीं अगर सेल्स की बात करें, तो वित्त वर्ष 2014 में 46, 196 करोड़ रुपए की कीमत के मकान बिके, जो वित्त वर्ष 2019 में घटकर 42, 598 रुपए तक गए। यह पिछले एक दशक में मकान बिक्री का सबसे बुरा दौर रहा है। 

 

फाइनेंसिस कंपनियों के पास लिक्विडिटी की कमी 

विशेषज्ञों के मुताबिक देश में रेवेन्यू और मकान की बिक्री न होने अंतर से रियल एस्टेट को नुकसान हो रहा है। इसका असर हाल के दिनों में नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (NBFC) पर देखने को मिला है, जिसके पास लिक्विडिटी की कमी हो गई है। बता दें कि NBFC रियल एस्टेट और अन्य कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए फंड मुहैया कराती है।

 

डीएलएफ के पास है सबसे ज्यादा अनसोल्ड प्रॉपर्टी 

पिछले तीन साल में इंडस्ट्री का नेट सेल में कमी आई है। सालाना कंपाउंड एनुअल रेट (CAGR) 3.2 फीसदी रहा है, जबकि बिना बिक्री की संपत्ति 8.2 फीसदी रहा है।  सितंबर 2018 के अंत में डीएलएफ के पास सबसे ज्यादा बिना बिकी संपत्ति रही है। इसकी अनुमानित कीमत 23,815 करोड़ रुपए है। HDIL के पास 14,560 करोड़, Prestige Estates के पास 12, 795 करोड़ रुपए की संपत्ति है, जबकि इंडिया बुल्स रियल एस्टेट के पास 10 हजार करोड़ की संपत्ति है। 

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