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बंद कमरे की बैठक ने बि‍गाड़ा भारत का गणि‍त, मोदी पर पड़ी तीन गुना घाटे की मार

मोदी सरकार के लि‍ए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

Trade deficit widen current account deficit of India

नई दि‍ल्‍ली। मोदी सरकार के लि‍ए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। देश का चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.9 फीसदी हो गया है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.9 फीसदी रहा, जबकि पिछले साल 2016-17 में यह जीडीपी का 0.6 फीसदी था। बीते साल के मुकाबले यह दोगुने से भी ज्‍यादा है। 


मोटे शब्‍दों में समझें तो इंपोर्ट और एक्‍सपोर्ट के बीच के अंतर को चालू घाटा कहते हैं। अगर इंपोर्ट ज्‍यादा है और एक्‍सपोर्ट कम, तो इन दोनों के बीच जि‍तना फर्क है उसे चालू घाटा कहा जाता है। 


क्‍यों हुआ ऐसा 
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है भारत सहि‍त पूरी दुनि‍या को तेल सप्‍लाई करने वाले देशों द्वारा अप्रैल में लि‍या गया फैसला। अप्रैल के दूसरे सप्‍ताह में दुनि‍या में दूसरे नंबर पर सबसे ज्‍यादा तेल का उत्‍पादन करने वाले देश सऊदी अरब ने जेद्दा में एक बैठक बुलाई। 


बंद कमरे में हुई इस बैठक में तेल का उत्‍पादन करने वाले अन्‍य देशों के साथ रूस ने भी शि‍रकत की। बैठक में तेल का उत्‍पादन घटाने का फैसला लि‍या गया। तेल की सप्‍लाई कम होने से मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ीं। 


भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रि‍कॉर्ड हाई पर पहुंच गईं। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है। तेल के बढ़े बि‍ल ने भारतीय इकोनॉमी पर बड़ा बोझ डाला, जि‍सका नतीजा है दोगुने से भी ज्‍यादा का चालू घाटा। वैसे अभी तो बीते 15 दि‍नों से कंट्रोल में हैं। 


मोदी ने दी थी हि‍दायत 
अप्रैल महीने की शुरुआत में ही दि‍ल्‍ली में हुई एक बैठक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल उत्‍पादन करने वाले देशों (OPEC) को समझाया था कि‍ वह तेल की कीमतें जानबूझकर बढ़ाने के खेल से बाज आएं। इस बैठक में यूएई, सऊदी सहि‍त अन्‍य कई ओपेक देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस बैठक में तो सभी ने मोदी की हां में हां मि‍लाई मगर वापस लौटने के बाद पेट्रोल के उत्‍पादन में कटौती का ऐलान कर दि‍या। 

 

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