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सेल के लोहे से बनी है देश की सबसे बड़ी तोप “धनुष”, ये हैं खासियत

13 सेकेंड में 3 गोले दागने वाली इस गन को इस खास लोकेशन पर तैनात किया जाएगा

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नई दिल्ली : स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (सेल) ने देश की सबसे  बड़ी तोप बंदूक (Artillery Gun) “धनुष” के विकास के लिए स्टील की आपूर्ति करके एक बार फिर से देश की सुरक्षा को मज़बूती प्रदान करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका साबित की है। देश में ही विकसित की गई इस पहली स्वदेशी तोप बंदूक “धनुष” के लिए सेल ने अपने दुर्गापुर स्थित अलॉय स्टील्स प्लांट से स्पेशल क्वालिटी फोर्जिंग स्टील बनाकर आपूर्ति की है। “धनुष” का विकास और डिज़ाइन स्वदेशी तौर पर मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री में किया गया है, जहां इसे बीते सोमवार को भारतीय सेना को सौंपा गया।

 

देश की सुरक्षा से जुड़ी स्पेशल क्वालिटी की स्टील की जरूरतों को पूरा करता है

सेल अपने उत्पादन के 60 सालों से देश की मजबूत बुनियाद रखने के साथ-साथ देश की सुरक्षा से जुड़ी स्पेशल क्वालिटी की स्टील की जरूरतों को पूरा करता आ रहा है। सेल ने देश की सुरक्षा को मजबूती प्रदान करने के लिए आईएनएस कमोर्ता, आईएनएस विक्रांत, आईएनएस किल्टन, अर्जुन टैंक जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों के लिए स्टील की आपूर्ति की है । उल्लेखनीय है कि सेल का राउरकेला इस्पात संयंत्र भी जबलपुर गन कैरिज फैक्ट्री को गन कैरिज़ के विकास और रिपेयर से जुड़ी तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्पेशल ग्रेड स्टील की आपूर्ति करता आ रहा है।

सेल अध्यक्ष अनिल कुमार चौधरी ने कहा, “हमारे लिए यह गौरव का क्षण है कि देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों के साथ ही सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण आयुधों पर भी सेल के भरोसे और सेल की मज़बूती की छाप है। सेल देश की सुरक्षा से जुड़ी हर तकनीकी जरूरत के अनुसार स्टील के विकास और उत्पादन करने की हर चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार है।” 

 

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इस लोकेशन पर की जाएगी तैनात 

 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 38 किलोमीटर दूरी तक निशाना साधने वाली इस एकमात्र तोप की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगी सरहद पर की जाएगी। गन का संचालन पूरी तरह ऑटोमेटिक है। मतलब गन खुद गोले भरकर वार करने में सक्षम है। इस गन पर किसी भी मौसम का कोई असर नहीं होता है। इसे किसी भी स्थान पर तैनात की जा सकती है। यह गन माइनस तीन डिग्री से 70 डिग्री तक तापमान सहन कर सकती है। 

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