Home » Economy » Infrastructureटेंडर की प्रक्रिया में रेलवे कर रहा है सुधार, एस्टिमेट में नहीं होगा अंतर

टेंडर जारी करने से पहले जमीन का अधिग्रहण करेगा रेलवे, डिले नहीं होंगे प्रोजेक्‍ट

रेलवे बोर्ड ने निर्णय लिया है कि जब तक जमीन का अधिग्रहण नहीं हो जाता, तब तक टेंडर जारी नहीं होंगे।

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नई दिल्‍ली। रेलवे बोर्ड ने निर्णय लिया है कि जब तक जमीन का अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक प्रोजेक्‍ट का टेंडर जारी नहीं किया जाएगा। जमीन अधिग्रहण में देरी की वजह से जहां प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट में इजाफा नहीं होगा, वहीं प्रोजेक्‍ट के डिले होने के आसार भी कम हो जाएंगे। बोर्ड ने रेलवे के सभी जीएम से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि इस तरह के प्रोजेक्‍ट्स का टेंडर तब तक अवार्ड न किया जाए, जिनके लिए जमीन की जरूरत है। खासकर नई रेलवे लाइन बिछाने वाले प्रोजेक्‍ट्स को जमीन की उपलब्‍धता के बिना शुरू नहीं किया जाए।

 

यह होता है नुकसान

रेलवे बोर्ड ने अपने पत्र में कहा है कि बिना जमीन का अधिग्रहण किए प्रोजेक्‍ट का टेंडर जारी होने से रेलवे को कोई खास फायदा नहीं होता। वहीं, कॉन्‍ट्रेक्‍टर को भी प्रोजेक्‍ट में डिले होने का डर रहता है और वह अपना काम तेजी से नहीं करता। इससे प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट भी बढ़ती है और प्रोजेक्‍ट निरंतर डिले होता चला जाता है। चूंकि रेलवे ने जमीन का अधिग्रहण नहीं किया होता तो वह कॉन्‍ट्रेक्‍टर के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं कर पाती।

 

एस्टिमेट में न हो अंतर

इस लेटर में रेलवे बोर्ड के फाइनेंशियल कमिश्‍नर बीएन मोहापात्रा ने कहा है कि यह देखने में आया है कि अलग अलग जोन द्वारा एक ही तरह के प्रोजेक्‍ट के एस्टिमेट में काफी अंतर होता है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए, इसलिए सभी जनरल मैनेजर्स को अपने अपने जोन के एस्टिमेट्स को रिव्‍यू करना चाहिए और एक ही तरह के प्रोजेक्‍ट्स का मिनिमम और हायर कॉस्‍ट तय करनी चाहिए, ताकि एस्टिमेट्स में अंतर न आए। पिछले अप्रूव्‍ड रेट्स को मार्केट ट्रेंड से रिव्‍यू करना चाहिए।

 

रेवेन्‍यू पर हो फोकस

फाइनेंशियल कमिश्‍नर ने कहा है कि अभी जो प्रोजेक्‍ट्स सेंक्‍शन किए जा रहे हैं, वे एस्टिमेटेड कॉस्‍ट और रेवेन्‍यू के आधार पर किए जा रहे हैं,  जबकि वर्तमान में जरूरत है कि दोनों का रियलेस्टिक एस्टिमेशन किया जाए। इसके लिए प्रोजेक्‍ट से मिलने वाले रेवेन्‍यू का डिटेल एनालाइसिस किया जाए, जो पिछले कई सालों से नहीं हो रहा है। 

 

प्रोजेक्‍ट्स में तेजी है मकसद

रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि जब से पीयूष गोयल ने रेल मंत्रालय और अश्विनी लोहानी ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन पर संभाला है, तब से ही रेलवे की कार्यप्रणाली में बदलाव की कोशिशें चल रही हैं। सालों से चल रहे कामकाज में सुधार किया जा रहा है। इसी कड़ी में अब बोर्ड ने रेलवे के टेंडर प्रोसेस में सुधार के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। इससे जहां प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट में कमी आएगी, वहीं प्रोजेक्‍ट्स समय से पूरे होंगे। 

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