नए प्रोजेक्ट में किफायती मिलेगा आपको आशियाना पर Bedroom का साइज कम होगा

मध्यमवर्गीय परिवारों की खुद के आशियाने का सपना साकार करने के लिए बिल्डरों ने कमरों के साइज छोटे कर दिए हैं। कीमत को किफायती करने और सरकारी नीतियों का फायदा उठाने के लिए बिल्डरों ने ऐसा किया है। पीएम नरेंद्र मोदी की हाउसिंग फॉर ऑल में लोन सब्सिडी व कई राज्यों में छोटे घरों पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट के चलते बिल्डरों ने बीते पांच सालों में घर का साइज 17 प्रतिशत छोटा कर दिया है। 

money bhaskar

Mar 14,2019 01:56:00 PM IST

नई दिल्ली. मध्यमवर्गीय परिवारों की खुद के आशियाने का सपना साकार करने के लिए बिल्डरों ने कमरों के साइज छोटे कर दिए हैं। कीमत को किफायती करने और सरकारी नीतियों का फायदा उठाने के लिए बिल्डरों ने ऐसा किया है। पीएम नरेंद्र मोदी की हाउसिंग फॉर ऑल में लोन सब्सिडी व कई राज्यों में छोटे घरों पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट के चलते बिल्डरों ने बीते पांच सालों में घर का साइज 17 प्रतिशत छोटा कर दिया है।

मुंबई में घर का औसत आकार 960 से 700 वर्गफीट रह गया

एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक युवा खरीदार अच्छे लोकेशन पर किफायती घर खरीदना चाहते हैं। बिना कीमत बढ़ाए उनकी मांग को पूरा करने के लिए बिल्डरों ने घर का आकार कम करने का रास्ता चुना है। टॉप-7 शहरों में घर के आकार में सबसे ज्यादा 27% कमी मुंबई में आई है। वहां 2014 में घरों का औसत आकार 960 वर्ग फीट था। 2018 में यह घटकर 700 वर्ग फीट रह गया। सबसे बड़े घर हैदराबाद में होते हैं। वहां औसत आकार 1,830 से घटकर 1,600 वर्ग फीट रह गया है।

यह है वजह

ज्यादातर शहरों में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ी है। इसलिए डेवलपर घरों का आकार छोटा कर इसे बजट फ्रेंडली बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मिलेनियल (22 से 38 साल के युवा) खरीदारों का भी इस ट्रेंड में बड़ा योगदान है। वे अच्छी लोकेशन पर घर चाहते हैं। भले ही इसका आकार छोटा क्यों न हो। करियर में ग्रोथ के लिए बार-बार शहर बदलना युवा खरीदारों के बीच आम ट्रेंड है। इसलिए भी वे बजट फ्रेंडली घरों को तरजीह देते हैं, ताकि समय पर इसे बेचा जा सके। वहीं सरकार ने भी जीएसटी के तहत अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी की दर 8% से घटाकर 5% की गई थी। साथ ही 20 लाख रुपए तक होम लोन पर भी 6 प्रतिशत तक इंटरेस्ट सब्सिडी दी गई है।


80 लाख से ज्यादा कीमत वाले घरों का आकार 20% कम हुआ

आकार में सबसे ज्यादा कमी 40 लाख रुपए से कम कीमत वाले घरों में आई है। इनका आकार 2014 के 750 वर्ग फीट की तुलना में 2018 में 580 वर्ग फीट रह गया। यानी इनमें 23% की कमी आई। 40 से 80 लाख रु. कीमत वाले घरों के आकार में 17% गिरावट आई है। 2014 में ये 1,150 वर्ग फीट के होते थे। 2018 में 950 वर्ग फीट के रह गए। 80 लाख से ज्यादा कीमत वाले घरों का आकार 20% कम हुआ है।

एनसीआर में 16 प्रतिशत की कमी

शहर वर्ष 2014 (वर्गफुट में) वर्ष 2018 (वर्गफुट में) कमी(%)
एनसीआर 1,485 1,250 16%
मुंबई 960 700 27%
कोलकाता 1,230 950 23%
पुणे 960 750 22%
चेन्नई 1,290 1,100 15%
हैदराबाद 1830 1600 13%
बेंगलुरू 1430 1260 12
पूरा भारत 1390 1160 17




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