55 साल से वायु सेना की ताकत बढ़ा रहा MiG-21, लेकिन इस वजह से उठते रहे हैं सवाल

MiG-21 Has A Bad Reputation Of Most Crashed Fighter Jet: भारतीय मिग विमानों की अगर बात की जाए तो ये हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। वायु सेना में होने वाले प्लेन क्रैश और कैजुअल्टी में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी Mig (Mikoyan-Gurevich) विमानों की है। यही वजह है कि इन्हें Flying Coffin यानी उड़ते ताबूत भी कहा जाता है। इसमें से भी MiG-21 का नाम सबसे ज्यादा खराब है।

Money Bhaskar

Feb 27,2019 08:27:00 PM IST

प्रतिभा सिंह। नई दिल्ली.

पुलवामा हमले के जवाब में भारत की ओर से पाकिस्तान में जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी बेस पर Air Strike किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। बुधवार को दोनों देशों की वायु सेना के बीच हवाई हमले हुए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत ने एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान F-16 को मार गिराया। इस कार्रवाई में भारत का एक MiG-21 फाइटर जेट क्रैश हो गया और पायलट विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे में हैं। हालांकि सुरक्षा को लेकर भारतीय मिग विमानों पर सवाल भी उठते रहे हैं। वायु सेना में होने वाले प्लेन क्रैश और कैजुअल्टी में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी MiG (Mikoyan-Gurevich) विमानों की है। यही वजह है कि इन्हें Flying Coffin यानी उड़ते ताबूत भी कहा जाता है। इनमें भी MiG-21 का नाम सबसे ज्यादा खराब है।

1964 से हो रहे हैं इस्तेमाल

रूस और चीन के बाद भारत MiG-21 का तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर है। 1964 में इस विमान को पहले सुपरसॉनिक फाइटर जेट के रूप में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया। भारत ने रूस से इस विमान को यहीं पर असेंबल करने का अधिकार और तकनीकी हासिल की थी। तब से लेकर अब तक इस विमान ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध समेत कई अहम मौकों पर अहम भूमिका निभाई है। रूस ने तो 1985 में इस विमान का निर्माण बंद कर दिया, लेकिन भारत इसके अपग्रेडिड वेरिएंट का इस्तेमाल करता आ रहा है। सितंबर, 2018 तक वायु सेना के पास तकरीबन 120 मिग-21 विमान थे। इन्हें 2021-22 तक सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।

177 करोड़ रुपए है एक प्लेन की कीमत

MiG-21 सोवियत संघ का प्रोडक्ट है। इसे Mikoyan-Gurevich Design Bureau ने 1950 में डिजायन किया था। इस single-engine फाइटर प्लेन का जब निर्माण शुरू हुआ तब इसकी कीमत तकरीबन 20 करोड़ रुपए (29 लाख डॉलर) थी। मौजूदा समय में इसकी कीमत 177 करोड़ रुपए (25.1 अरब डॉलर) है। 2012 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायसेना के पास उस समय 100 से अधिक MiG-21 Bison एयरक्राफ्ट थे। उस समय एक Bison जेट की कीमत 20 करोड़ रुपए थी।

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