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Home » Economy » InfrastructureMiG-21 Has A Bad Reputation Of Most Crashed Fighter Jet, Also Called Flying Coffin

55 साल से वायु सेना की ताकत बढ़ा रहा MiG-21, लेकिन इस वजह से उठते रहे हैं सवाल

पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट से मुठभेड़ के बाद क्रैश होने पर फिर सुर्खियों में आया विमान

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प्रतिभा सिंह। नई दिल्ली.

 

पुलवामा हमले के जवाब में भारत की ओर से पाकिस्तान में जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी बेस पर Air Strike किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। बुधवार को दोनों देशों की वायु सेना के बीच हवाई हमले हुए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत ने एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान F-16 को मार गिराया। इस कार्रवाई में भारत का एक MiG-21 फाइटर जेट क्रैश हो गया और पायलट विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान के कब्जे में हैं। हालांकि सुरक्षा को लेकर भारतीय मिग विमानों पर सवाल भी उठते रहे हैं। वायु सेना में होने वाले प्लेन क्रैश और कैजुअल्टी में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी MiG (Mikoyan-Gurevich) विमानों की है। यही वजह है कि इन्हें Flying Coffin यानी उड़ते ताबूत भी कहा जाता है। इनमें भी MiG-21 का नाम सबसे ज्यादा खराब है।

1964 से हो रहे हैं इस्तेमाल

रूस और चीन के बाद भारत MiG-21 का तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर है। 1964 में इस विमान को पहले सुपरसॉनिक फाइटर जेट के रूप में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया। भारत ने रूस से इस विमान को यहीं पर असेंबल करने का अधिकार और तकनीकी हासिल की थी। तब से लेकर अब तक इस विमान ने 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध समेत कई अहम मौकों पर अहम भूमिका निभाई है। रूस ने तो 1985 में इस विमान का निर्माण बंद कर दिया, लेकिन भारत इसके अपग्रेडिड वेरिएंट का इस्तेमाल करता आ रहा है। सितंबर, 2018 तक वायु सेना के पास तकरीबन 120 मिग-21 विमान थे। इन्हें 2021-22 तक सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।

 

177 करोड़ रुपए है एक प्लेन की कीमत

MiG-21 सोवियत संघ का प्रोडक्ट है। इसे Mikoyan-Gurevich Design Bureau ने 1950 में डिजायन किया था। इस single-engine फाइटर प्लेन का जब निर्माण शुरू हुआ तब इसकी कीमत तकरीबन 20 करोड़ रुपए (29 लाख डॉलर) थी। मौजूदा समय में इसकी कीमत 177 करोड़ रुपए (25.1 अरब डॉलर) है। 2012 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वायसेना के पास उस समय 100 से अधिक MiG-21 Bison एयरक्राफ्ट थे। उस समय एक Bison जेट की कीमत 20 करोड़ रुपए थी।

 

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इस कारण हुआ बदनाम

धुआंधार रफ्तार और तमाम खूबियों से लैस होने के साथ ही यह प्लेन सबसे ज्यादा क्रैश होता है। यही वजह है कि इस प्लेन पर सवाल मंडराते रहते हैं। 1963 के बाद से वायु सेना में शामिल हुए 800 से ज्यादा मिग-21 विमानों में से करीब 280 विमान हादसों का शिकार हो चुके हैं। 2013 में तत्कालीन रक्षा मंत्री A.K. Antony ने बताया था कि पिछले तीन साल में क्रैश हुए वायु सेना के कुल 31 विमानों में से 14 विमान MiG-21 थे। 2006 में आई बॉलीवुड फिल्म 'रंग दे बसंती’ भी MiG-21 विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने पर आधारित थी।

ये हैं इसकी कमियां

-मिग-21 विमानों में 50 के दशक में इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर काम करता है।

-इसकी लैंडिंग 340 किमी प्रति घंटे जितनी तेज रफ्तार में हो सकती है। टेक-ऑफ के लिए भी हाई-स्पीड चाहिए। इससे यह काफी खतरनाक हो जाता है।

-इसकी कैनोपी का डिजायन ऐसा है जिससे पायलट रनवे को ठीक से देख नहीं पाता।

-सिंगल इंजन होने के चलते यह हमेशा खतरे के घेरे में रहता है। किसी चिड़िया के टकरा जाने या इंजन फेल हो जाने पर प्लेन क्रैश की संभावना बढ़ जाती है।

-इसे हाई एल्टीट्यूड इंटरसेप्टर के तौर पर डेवलप किया गया था, लेकिन भारतीय वायु सेना इसे मल्टी-रोल फाइटर प्लेन के तौर पर इस्तेमाल करती है।​

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