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Lok Sabha Election 2019: नेताजी की रैली के लिए तैयार हो रहे हैं लक्जरी वाहन, 300 करोड़ रुपए का है कारोबार

किसी वाहन को लक्जरी बनाने में 5 लाख रुपए से पांच करोड़ रुपए तक का खर्च आता है

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नई दिल्ली.

चुनाव शुरू होने वाले हैं। यानी अब नेताओं के रैली करने का समय आ गया है। नेताजी कम समय में ज्यादा से ज्यादा रैलियां कर सके इसके लिए खास वे खास लक्जरी गाड़यों में घूमते हैं। ये गाड़ियां इतनी सुविधाओं से लैस होती हैं कि इनमें सफर करना लक्जरी होटल में रहने जैसा होता है। लगातार रैलियां करने के लिए नेता लक्जरी बसों, वैन और एसयूवी का इस्तेमाल करते हैं। ये वाहन पुराने वाहनों को रिफर्बिश्ड करके बनाए जाते हैं। एक वाहन को नया बनाने में 5 लाख रुपए से पांच करोड़ रुपए तक का खर्च आता है। नेताओं की रैलियों के लिए लक्जरी गाड़ियां बनाने का कारोबार 300 करोड़ रुपए का है।

 

ये होती हैं खासियत

इन लक्जरी गाड़यों में लकड़ी का महंगा फर्नीचर, आरादायक सोफा-कम-बिस्तर, शौचालय (विमान में इस्तेमाल किया जाने वाला), होम थिएटर, घूमने वाली सीटों से युक्त लिफ्ट, डीवीआर, मालिश करने वाली कुर्सी तक लगी होती है। इसके अलावा ये हाइड्रॉलिक प्लेटफॉर्म, एलईडी लाइट, स्पीकर (जिससे नेताओं की आवाज 1.6 किलोमीटर तक सुनी जा सकती है), संचार और मनोरंजन प्रणाली से लैस होते हैं।

 

होते हैं खास सुरक्षा प्रणालियों से लैस

ये लक्जरी वाहन बख्तरबंद और बुलेट प्रुफ होते हैं। ऑटो विशेषज्ञों के मुताबिक मूल वाहन की विशेषताओं में बदलाव नहीं किए जाते हैं। नियमों के अनुसार कोई भी वाहन में संरचनात्मक रूप से फेरबदल नहीं कर सकता है। इसलिए रीफर्बिश करने में वाहन की लंबाई, चौड़ाई या ऊंचाई में परिवर्तन शामिल नहीं होता है।

इन कारखानों में बनते हैं नेताओं के लिए रिफर्बिश्ड वाहन

चेन्नई स्थित एसआरएम ऑटो टेक प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई स्थित डीसी डिजाइन, आंध्र प्रदेश स्थित जयलक्ष्मी डिजाइनर्स और कोयंबत्तूर स्थित कोयस ऐंड संस के कारखानों में ऐसे वाहन बनते हैं। डीसी डिजाइन विभिन्न मुख्यमंत्रियों और प्रमुख राजनेताओं सहित भारतीय राजनीति के प्रसिद्ध व्यक्तियों के लिए प्रमुख वाहनों का डिजाइन और निर्माण करती है। डीसी डिजाइन के संस्थापक दिलीप छाबड़िया भी मांग बढ़ने की बात पर सहमत हैं। वे कहते हैं कि हर साल देश भर में मांग बढ़ रही है। राहुल गांधी के साथ काम कर चुके छाबड़िया कहते हैं कि आराम, संपर्क, सुविधा और सुरक्षा प्रमुख बातें हैं। हेलीकॉप्टर की तुलना में जमीन पर चलने वाले वाहन अधिक लोगों से संपर्क करने में नेताओं की मदद करते हैं। डिजाइन के बाद ग्राहक जिस खास चीज पर ध्यान देते हैं, वह है विश्वसनीयता।

वोल्वो बस को लक्जरी बनाने में लगते हैं पांच करोड़ रुपए

वे चुनिंदा ऑर्डर लेते हैं और ज्यादातर भारतीय राजनीति के शीर्ष नेताओं के लिए वाहनों का डिजाइन करते हैं। अकेले इनोवा को रीफर्बिश करने में 30 लाख रुपए और वोल्वो बस के लिए पांच करोड़ रुपए तक की लागत आ सकती है। वे कहते हैं कि इन वाहनों को लेने वाले कई लोग हैं लेकिन नामों का खुलासा नहीं किया जा सकता है। इनके पुर्जे भारत में निर्मित होते हैं जबकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आयात किया जाता है।

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