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पाकिस्तान से भी दूर है यूपी का न्याय का मंदिर, यहां तक पहुंचने में खर्च हो जाते हैं हजारों रुपए

किसी भी राजनीतिक दल ने इस मुद्दे को नहीं दी अहमियत

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नई दिल्ली. पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की अलग खंडपीठ की मांग लंबे अरसे से जारी है। इस मांग को लेकर पश्चिमी यूपी के लोग कई बार आंदोलन कर चुके हैं। लेकिन किसी भी सरकार ने इसकी सुध नहीं ली है। सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा की सरकारें सत्ता में आती और जाती रही हैं। लेकिन आज तक मुद्दा ज्यों का त्यों बना हुआ है। पश्चिमी यूपी के हितों को सर्वोपरि मानने वाले राष्ट्रीय लोकदल ने इस मुद्दे को नजरअंदाज करने का काम किया है। 

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट से पास है लाहौर कोर्ट 

पश्चिमी यूपी के लोगों के लिए यूपी के प्रयागराज (इलाहाबाद हाईकोर्ट) जाकर कोर्ट केस लड़ना कितना मुश्किल है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पश्चिमी यूपी के मेरठ के लोगों के लिए पाकिस्तान का लाहौर हाईकोर्ट पास है, जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट दूर है। मेरठ से इलाहाबाद की दूरी 703 किमी है, जबकि मेरठ से लाहौर हाईकोर्ट लगभग 514 किमी है। 

इलाहाबाद जाकर कोर्ट केस लड़ना नहीं आसान 

मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना निवासी पीयूष जयजान के मुताबिक वकील की फीस से ज्यादा खर्च प्रयागराज आने-जाने में खर्च हो जाता है। पीयूष की मानें तो देश की न्याय व्यवस्था ऐसी है कि कई वर्षों तक मामले की सुनवाई चलती है। इसकी वजह से कई बार कोर्ट आना-जाना होता है, जो काफी खर्चीला होता है। मेरठ से इलाहाबाद की दूरी और फिर कोई सीधा साधन न होने की वजह से एक दिन में मेरठ से इलाहाबाद आना जाना संभव नहीं होता है। इसके चलते रहने-खाने और आने जाने में हजारों रुपए फिजूल के खर्च हो जाते हैं।

 

 

5 से 7 हजार रुपए आता है खर्च 

मेरठ से प्रयागराज का बस टिकट 1000 से 2000 रुपए के बीच आता है और वहां एक रात रुकने और खाने पीने में 1000 रुपए तक खर्च आता है। ऐसे में एक बार की कोर्ट की सुनवाई में 5000 से 7000 रुपए खर्च हो जाते हैं।   
  

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