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केवल 2.6 लाख रु. और 24 घंटे में बन सकता है घर, ये है खास तकनीक

घर न होने या महंगाई के चलते न बनवा पाने की इसी समस्‍या का हल टेक्‍सास की आइकन ने ढूंढ निकाला है।

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नई दिल्‍ली. हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना घर हो लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों के कारण घर बनाना या खरीदना एक आम इन्‍सान के लिए आसान नहीं रह गया है। पिछले साल जारी हुई WRI रॉस सेंटर फॉर सस्‍टेनेबल स्‍टडीज रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में शहरों में रहने वाले 120 करोड़ लोगों के पास सस्‍ते और सुरक्षित घर नहीं हैं। भारत जैसे विकासशील देशों में तो घर की समस्‍या चरम पर है। 

 

घर न होने या महंगाई के चलते न बनवा पाने की इसी समस्‍या का हल टेक्‍सास की आइकन ने ढूंढ निकाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोबोटिक्‍स कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी आइकन, नॉन-प्रॉफिट कंपनी न्‍यू स्‍टोरी के साथ मिलकर लोगों के लिए सस्‍ते घर विकसित करने का तरीका लाई है। यह तरीका है 3D प्रिन्टेड घरों का। आइकन का दावा है कि इसके तहत घर की कीमत 4000 डॉलर (लगभग 2.6 लाख रुपए) से भी कम होगी और इसे 24 घंटे के अंदर बनाया जा सकता है। अगर यह तकनीक टेस्टिंग में पास हो जाती है तो इससे विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर घरों की समस्‍या हल हो सकेगी।  

 

आगे पढ़ें- यहां किया शोकेस 

SXSW फेस्टिवल में किया शोकेस 

आइकन ने 3D प्रि‍न्‍टेड होम के आइडिया को टेक्‍सास के ऑस्टिन में चल रहे SXSW फेस्टिवल में शोकेस किया है। आइकन के 3D प्रिन्‍टेड होम एकमंजिल के, 600-800 वर्ग फुट के होंगे। इन्‍हें कंपनी की वुलकैन 3D प्रिन्‍टर का इस्‍तेमाल कर 24 घंटों के अंदर बनाया जा सकता है। कंपनी का कहना है कि इन सस्‍ते घरों को कटिंग एज मैटेरियल से बनाया जाता है। यह मैटेरियल सेफ्टी, कंफर्ट और रिसाइलेंसी के स्‍टैंडर्ड्स को लेकर टेस्‍टेड हैं। 

कंपनी ने इस तकनीक से 800 वर्ग फुट में बनाए गए एक घर के जरिए डेमो भी दिया। इसकी लागत 10,000 डॉलर (6.5 लाख रुपए) आई लेकिन आइकन इस लागत को घटाकर 4000 डॉलर (2.6 लाख रुपए) लाने पर काम कर रही है।  

 

आगे पढ़ें- क्‍या है वुलकैन प्रिन्‍टर

क्‍या है वुलकैन प्रिन्‍टर

यह प्रिन्‍टर एक तरह की मशीन है। यह एल्‍युमीनियम का होता है और इसमें एक बिल्‍ट इन बैकअप जनरेटर होता है। वुलकैन प्रिन्टिर में बिल्डिंग बनाने वाले मिक्‍सचर को भरा जाता है और फिर बिल्डिंग बनाई जाती है। यह एक तरह की कोन की तरह काम करता है। 

 

आगे पढ़ें- न्‍यू स्‍टोरी क्‍या करती है

न्‍यू स्‍टोरी का क्‍या है काम 

वुलकैन प्रिन्‍टर से बिल्डिंग का स्‍ट्रक्‍चर तैयार हो जाने के बाद न्‍यू स्‍टोरी का क्रू इसे फाइनल टच देता है। यह खिड़कियां और छत लगाने से लेकर बेसिक प्‍लंबिंग और इलेक्‍ट्रीकल वायरिंग तक का इंतजाम करता है। इस तरह 24 घंटों के अंदर घर तैयार हो जाता है। हालांकि ऐसी संभावना है कि भविष्‍य में स्‍ट्रक्‍चर खड़ा करने के बाद खिड़कियां लगाने का काम भी वुलकैन ही करेगा। इसके अलावा बाहर की दीवारों पर स्‍प्रे-पेंट या छत को प्रिन्‍ट करने के लिए ड्रोन का भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। 

 

आगे पढ़ें- सीमित इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर नहीं बनेगा रुकावट

सीमित इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में भी हो सकते हैं तैयार 

कंपनी का यह भी दावा है कि इन 3D प्रिन्टेड घरों में वेस्‍ट प्रॉडक्‍शन मेथड का इस्‍तेमाल लगभग शून्‍य है। इन्‍हें सीमित पानी, बिजली और लेबर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर जैसे अवरोधों के बीच भी बनाया जा सकता है। ये घर जहां भी जरूरत हो वहां पर बनाए जा सकते हैं। आइकन का कहना है कि कहीं की भी लोकल लेबर इन घरों को बनाने वाली मशीनों को ऑपरेट कर सकती है। 

 

आगे पढ़ें- पहला प्रोजेक्‍ट 2019 में 

2019 में शुरू होगा पहला प्रोजेक्‍ट 

द वर्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजाइन और मैटेरियल टेस्टिंग पूरी करने के बाद कंपनी की योजना अपना पहला प्रोजेक्‍ट 2019 में अल सल्‍वाडोर में शुरू करने की है। इस प्रोजेक्‍ट के तहत वहां 100 घर बनाए जाएंगे। 

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