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भूल जाइए AK-47, भारत में बनेगी AK-103, आतंकियों के छूटेंगे पसीने

सरकार सेना के लिए AK-47 से भी खतरनाक और हल्‍की रायफल AK-103 का प्रोडक्शन देश में शुरू करने की दिशा में काम कर रही हैं..

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नई दिल्‍ली। अगर सबसकुछ ठीक रहा तो दुनिया भर में मशहूर कलाश्निकोव रायफल जल्‍द ही भारत में बनेंगी। इसे भारत में आमतौर AK 47 कहा जाता है।  सरकार मेक इन इंडिया के तहत रूस के साथ मिलकर इसका प्रोडक्‍शन शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। भारत में प्रोड्यूस होने के बाद यह फेमस रायलफ इंडियन ऑर्मी और बॉर्डर पर तैनात जवानों के काम आएगी।  

 

अंग्रेजी बिजनेस डेली इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दल  जल्‍द ही इसपर बातचीत के लिए रूस जाने वाला है। इस मामले में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण से चर्चा हो चुकी है। भारत जल्‍द से जल्‍द देश में इसका प्रोडक्‍शन कराना चाहता है। वह अपनी इस मंशा से रूस सरकार को अवगत करा चुका है।  

 

ऑर्डिनेंस फैक्‍ट्री बोर्ड के साथ मिलकर होगा प्रोडक्‍शन 
रूस की सरकार ने पिछले साल ही वर्ल्‍ड फेमस इस रायफल के भारत में निर्माण का प्रस्‍ताव दिया था। तब यह सेना के मानकों के अनुरूप नहीं थी। हाल में सेना ने 7.62 calibre श्रेणी की असॉल्‍ट रायफल में कुछ नए स्‍पेसीफिकेशन जोड़े हैं। इसके बाद यह रायलफल सेना के काम आने लायक हो गई है। ऑर्डिनेंस फैक्‍ट्री बोर्ड के साथ कोलैब्रेशन में यह रायफल भारत में प्रोड्यूस की जाएगी। कुछ रायफल्‍स को भारत में मंगाया जाएगा। बाद में इन्‍हें बड़े पैमाने पर देश में ही बनाया जाएगा। शुरुआत में इन्‍हें सेना के लिए बनाया जाएगा और बाद में इन्‍हें एक्‍सपोर्ट भी किया जाएगा।  

 

 

 

AK-47 नहीं AK-103 का होगा प्रोडक्शन 
AK-47 भले ही भारत में कलाश्‍निकोव रायफल का पर्याय हो, लेकिन भारत में AK-103 वर्जन का प्रोडक्‍शन होगा। AK-47 कलाश्‍निकोव रायफल का बेसिक मॉडल है, जबकि AK-103 सबसे एडवांस मॉडल है। AK-47 से हल्‍की, छोटी और ज्‍यादा घातक होने के चलते AK-103 को ज्‍यादा बेहतर माना जाता है। माना जा रहा है कि अपने आकार और वजन के चलते यह आतंकियों से निपटने में भी अहम रोल अदा कर सकती है।

 

 

आतंकियों के चलते देश में फेमस हुई थी AK-47 
भारत में AK-47 को 1990 के दौर में उस समय खासी प्रसिद्धि मिली जब पाकिस्‍तान में प्रशिक्षित आतंकियों ने भारतीय सेना के खिलाफ कश्‍मीर में इसका इस्‍तेमाल किया। इसके चलते सेना को भी अपने हथियारों को अपग्रेड करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बाद में इसका यूज भी किया गया। 5.56 mm कैलिबर के चलते यह आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में बेहद मदगार रही और इससे सैनिकों की मौत में भी कमी आई। हालांकि AK-103 को AK-47 से भी घातक माना जाता है। इसकी मदद से करीब 500 मीटर दूर तक निशाना लगाया जा सकता है। यह रेंज उतनी ही है, जिनती सेना की मांग थी। वहीं खाली रायफल कर वजन मात्र 3.5 केजी है, जो देसी एन्‍सास रायफल से करीब आधा किलो कम है। साथ ही इस रायफल हो कई तरह की डिवाइस से लैस किया जा सकता है।     

 

 

100 से ज्‍यादा देशों की आर्मी करती है यूज 
AK-47 या काला‍श्निकोव रायफल 106 देशों की सेना की ओर से इस्तेमाल की जाती है। इस रायफल का ब्लूप्रिंट किसी प्रयोगशाला और कई वैज्ञानिकों के बीच तैयार नहीं हुआ था, जबकि अस्पताल के बैड पर पड़े बीमार मिखाइल कलाश्निकोव के दिमाग में तैयार हुआ था। कुछ साल पहले ही उनका देहांत हुआ है। 

 

 

पानी में भी सटीन निशाना 
AK-47 वह हथियार है, जिससे पानी के अंदर से हमला करने पर भी गोली सीधे जाती है। गोलियों की गति इतनी तेज होती है, कि पानी का घर्षण भी उसे कम नहीं कर पाता है। यह बेहद सिम्पल राइफल है, बहुत आसानी से इसका निर्माण किया जा सकता है, इसलिए दुनिया में यह एक मात्र ऐसी राइफल है, जिसकी सबसे ज्यादा कॉपी की गई है। यह एक मात्र ऐसा हथियार है,  जो हर प्रकार के पर्यावरण में चलाया जा सकता है और एक मिनट के अंदर इसे साफ किया जा सकता है। इस राइफल में पहले की सभी राइफल तकनीकों का मिश्रण है। अगर विस्तार से देखें तो इसके लोकिंग डिजाइन को एम1 ग्रांड राइफल से लिया गया है। इसका ट्रिगर और सेफ्टी लोक रेमिंगटन राइफल मॉडल8 से लिया गया है, जबकि गैस सिस्टम और बाहरी डिजाइन एस.टी.जी.44 से लिया गया है।

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