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5 साल के उच्चतम स्तर पर मैन्‍युफैक्‍चरिंग PMI, नए ऑर्डर और आउटपुट ग्रोथ से मिला बूस्ट

दिसंबर में विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार पि‍छले 5 साल में सबसे तेज रही।

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मुंबई. दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ पि‍छले 5 साल में सबसे तेज रही, वहीं नए ऑर्डर्स में अक्टूबर 2016 के बाद की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गयी। कंपनियों ने नए रोजगार भी दिए और रोजगार वृद्धि दर अगस्त 2012 के बाद उच्चतम स्तर पर रही। एक मंथली सर्वे में ये बातें कहीं गईं। इन्हीं फैक्टर्स के चलते निक्केई पीएमआई इंडेक्स नवंबर के 52.6 से बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया।

 

5 महीने से 50 अंक से ऊपर है सूचकांक

आईएचएस मार्किट में इकोनॉमिस्ट और रिपोर्ट के लेखक आशना दोधिया ने कहा कि‍ नए ऑर्डर्स और आउटपुट में तेज बढ़ोतरी के दम पर देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिसंबर 2017 में अच्छी ग्रोथ दर्ज की। यही वजह रही कि निक्केई पीएमआई इंडेक्स बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया। ऐसे में यह लगातार 5वां महीना है कि इंडेक्स 50 अंक से ऊपर है।

 

मजबूत डिमांड से हुआ सुधार

उन्‍होंने आगे कहा कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत मांग के चलते अपट्रेंड देखने को मिल रहा। इसका फायदा मैन्युफैक्चरिंग को भी मिला। उन्‍होंने कहा कि‍ भारतीय मैन्युफैक्चरर्स ने साल के अंत में अपने स्टाफ में बढ़ोत्तरी की। ऐसे में अगस्त 2012 के बाद सबसे तेज रोजगार सृजन दर्ज किया गया।

 

 

जीएसटी का असर

कीमत के मोर्चे पर दोधिया ने कहा कि जुलाई में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने से कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी जारी रही। इससे पहले अप्रैल के बाद से इनपुट कॉस्‍ट लगातार बढ़ रही थी। इसके अलावा, चूंकि उपभोक्ता खर्च अब पटरी पर आ चुका है। हालांकि फर्म्स के लिए ऊंची लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में फर्म्स पर मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है।

 

 

अभी बनी रहेगी चुनौती

दोधिया ने कहा कि‍ हाल में लगे झटकों के चलते इकोनॉमी के लिए चुनौतियां बनी रहेंगी। लेकिन सर्वेक्षण से साफ है कि‍ पहले की तुलना में समग्र सुधार मजबूत था। वहीं, फ्यूचर आउटपुट इंडेक्स के सर्वे के मुताबिक 3 महीने में कॉन्‍फि‍डेंस लेवल मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। इसके चलते पांच से ज्यादा सर्वेक्षण प्रतिभागियों ने ज्यादा प्रोडक्शन का अनुमान लगाया है।

 

 

 

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