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पकड़ में आए बि‍ना चीन की अकड़ नि‍कालेंगे ये 4 लड़ाके, 200 अरब खर्च कर रहा है भारत

हिंद महासागर में चीन लगातार अपना दबदबा बना रहा है और भारत इस पर बारीकी से नजर रखे हुए है।

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नई दि‍ल्‍ली। हिंद महासागर में चीन लगातार अपना दबदबा बना रहा है और भारत इस पर बारीकी से नजर रखे हुए है। यह समुद्री इलाके हमारी सुरक्षा के लि‍ए लिहाज से बेहद महत्‍वपूर्ण है और यहां चीन की तैयारियों ने भारत सरकार को भी बड़े फैसले लेने पर मजबूर कर दि‍या है। हिंद महासागर में चीनी दबदबे की हवा नि‍कालने के लि‍ए भारत ने 200 अरब से नौसेना की मारक क्षमता मजबूत करने का फैसला कि‍या है। भारत ने इसके लि‍ए अपने पुराने दोस्‍त रूस से बहुत बड़ी डील की है।  इस डील के अमली जामा पहन लेने के बाद भारत की हमला करने की ताकत में जबरदस्‍त इजाफा हो जाएगा और हम चीन की बढ़ती ताकत को कड़ी चुनौती दे पाएंगे।  आगे पढ़ें 

रूस से कि‍या करार 
भारत ने इसके लि‍ए रूस से चार stealth frigates की सप्‍लाई का सौदा कि‍या है। stealth frigates  वो जंगी नौसेनि‍क जहाज होते हैं जो रडार, सोनार,  इंफ्रारेड यहां तक कि‍ आंखों से भी आसानी से नजर नहीं आते। इसे सामान्‍य भाषा में अदृश्‍य कहते हैं। भारतीय नौसेना को एक फ्रिगेट करीब 50 अरब रुपए का पड़ेगा। पहले दो जंगी जहाज रूस में बनाए जाएंगे। इसके बाद दो जहाज गोवा शि‍पयार्ड, भारत में बनाए जाएंगे। इसके लि‍ए रूस अपनी तकनीक भारत को देगा। कांट्रेक्‍ट पर हस्‍ताक्षर कोने के 4 साल बाद से डि‍लि‍वरी शुरू हो जाएगी। बि‍जनेस स्‍टैंडर्ड की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, कॉस्‍ट नेगोसि‍एशन कमेटी ने इसे ओके कर दि‍या है। अब फाइनेंस मि‍नि‍स्‍टरी और कैबि‍नेट को इसे क्‍लि‍यर करना है। इन्‍हें अपग्रेडेट क्रि‍वाक 3 क्‍लास का नाम दि‍या गया है।  आगे पढ़ें ये है नेवी की तैयारी 

 

10 हो जाएगी गि‍नती 
अभी भारतीय नौसेना क्रि‍वाक 3 ग्रेड के छह जहाजों का संचालन कर रही है। पहले तीन जून 2003 और अप्रैल 2004 में आए थे। उसके बाद अप्रैल 2012 और जून 2013 बाकी के आए। अब इस समझौते के बाद सेना के पास इस तरह के 10 जंगी जहाज हो जाएंगे।  भारतीय नौसेना ने अपनी मध्‍यकालीन योजना में वाशि‍प की ताकत को 140 से बढ़ाकर 198 करने का फैसला लि‍या है। इस लक्ष्‍य को 2027 तक पूरा करना है। इसका मतलब ये हुआ कि‍ हर साल 5 से 6 वारशि‍प जोड़े जाएंगे। 

 

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