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Home » Economy » InfrastructurePM Modi's flying plan for cheap air travel may seem shock

पीएम मोदी की सस्ते हवाई सफर की उड़ान योजना को लग सकता है झटका, एयर टरबाइन फ्यूल के बढ़ते दामों ने बढ़ाई मुसीबत

महंगी हो सकती हैं हवाई यात्राएं, एयरलाइंस कंपनियां की बढ़ रही है लागत

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नई दिल्ली. 
एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने और ज्यादा लोगों को हवाई सफर कराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना उड़ान का झटका लग सकता है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एयर टरबाइन फ्यूल(एटीएफ) के महंगा होने की वजह से यह आसार जताए जा रहे हैं। मार्च में एटीएफ की कीमतों में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो रही है। लिहाजा, एयरलाइंस कंपनियों को इसकी भरपाई करने के लिए फ्लाइट का किराया बढ़ाना पड़ेगा। 
अभी ज्यादातर छोटे शहरों में 3000 हजार रुपए तक में हवाई सफर का मौका मिल जाता है लेकिन अब इसमें इजाफा हो सकता है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है जब जेट एयरवेज और इंडिगो एयरलाइंस अपनी कई उड़ानों को रद्द कर रही हैं। हालांकि, दोनों एयरलाइंस कंपनियों के फ्लाइट्स रद्द होने के बिल्कुल अलग कारण हैं। इन एयरलाइंस कंपनियों की तरफ से उड़ानों की संख्या कम करने से सीटों की संख्या घटेगी। एयरलाइंस कंपनियां बढ़ती लागत को देखते हुए हवाई किराया महंगा कर सकती हैं। घरेलू उड़ानों के लिए दिल्ली और मुंबई में एटीएफ के एक किलो-लीटर की कीमत क्रमशः 58,060.97 रुपये और 58,017.33 रुपये है।


रोजाना हो रहा है 20 करोड़ रुपए का नुकसान 
 रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) ने हाल ही में कहा है कि तीन सूचीबद्ध भारतीय विमाननन कंपनियां जेट एयरवेज, इंडिगो और स्पाइसजेट को अप्रैल-सितंबर, 2018 की अवधि में 20 करोड़ रुपये रोजाना का नुकसान हुआ है।  ICRA के मुताबिक सामूहिक रूप से, भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को वित्त वर्ष 2019-20 में 8,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की आशंका है। 

ट्वीट कर बताया कि यह अच्छा नहीं है 
एयरएशिया इंडिया के सीओओ संजय कुमार ने एक ट्वीट कर बताया कि एटीएफ की कीमतें मार्च में फिर से 10 फीसदी बढ़ने जा रही हैं। यह पहले से ही संघर्ष कर रहे विमानन उद्योग के लिए अच्छा नहीं है। 


यात्री बढ़ने के बाद भी मुनाफे के लिए संघर्ष 
पिछले कुछ वर्षों में तेजी से रफ्तार पकड़ने के बाद फिलहाल जेट और एयर इंडिया को सेवाएं जारी रखने के लिए जूझना पड़ रहा है। जेट ने पिछले महीने 13 विमानों को सेवा से हटा दिया है। इसकी कई वजहें हैं। कंपनी के कुछ विमानों में गड़बड़ी है और कुछ विमानों में कलपुर्जों का इंतजार किया जा रहा है। इसके अलावा पायलटों की कमी के कारण इंडिगो ने अप्रैल तक अपनी कई उड़ानें रद्द कर दी हैं। एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें में किंगफिशर या जेट जैसी हालत से बचने के लिए कम से कम इतना किराया लेने की जरूरत है, जिससे कि लागत निकल आए। पिछले कुछ महीनों से किराए बढ़ रहे हैं। इसके अलावा इस महीने जेट फ्यूल के दाम 10 फीसदी बढ़ने से हवाई किराया और बढ़ सकता है। अधिकारी का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं हैं कि देश में घरेलू हवाई सफर करने वालों की संख्या बढ़ रही है. लेकिन एयरलाइंस कंपनियां प्रॉफिट के बगैर ग्रोथ (बिना मुनाफे की ग्रोथ) दर्ज कर रही हैं. भारत में हवाई किराया दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले कम है। 

 

जितनी दूरी दिल्ली-मुंबई की, उतनी ही दूरी वाले विदेशी शहरों में चार गुना ज्यादा है किराया 
बोइंग के वरिष्ठ वीपी (एशिया पैसिफिक एंड इंडिया सेल्स) दिनेश केसकर ने कहा कि मुंबई-दिल्ली का एक तरफ का किराया लगभग 45-50 डॉलर (3,200 से 3,500 रुपये) है। इतनी ही दूरी वाले सैन फ्रांसिस्को से सिएटल का किराया 3-4 गुना अधिक है। यही कारण है कि अमेरिका और यूरोप में एयरलाइंस कंपनियां फायदे में हैं। एयरलाइंस कंपनियों का कहना था कि किराए में 200 रुपये की बढ़ोतरी से यात्री सस्ती किराये वाली एयरलाइंस का रुख कर लेंगे। भारत में किसी भी सिंगल एयरलाइन के लिए लागत को ध्यान में रखते हुए किराया तय करना टेढ़ी खीर है।

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