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कचरे को कैश में बदल रहे हैं इस शहर के लोग, आपके पास भी है मौका

कर्नाटक का शहर मैसूर वैसे तो राजा महाराजाओं के लि‍ए जाना जाता है मगर इन दि‍नों कचरे के कारण चर्चा में है।

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नई दिल्‍ली. कर्नाटक का शहर मैसूर वैसे तो राजा महाराजाओं के लि‍ए जाना जाता है मगर इन दि‍नों कचरे के कारण चर्चा में है। क्‍योंकि‍ यहां के लोगों ने देश की एक बहुत बड़ी समस्‍या का लाभकारी हल खोज लि‍या है। यहां लोग कचरे से कमाई कर रहे हैं। इससे न केवल शहर साफ सुथरा बनता जा रहा है बल्‍कि ढेर सारे लोगों को रोजगार भी मि‍ल रहा है। शहर की गलि‍यों में सुबह सुबह सीटि‍यों की आवाज गूंजती है। लोगों के घरों से कचरा इकट्ठा करने वाले लोग सीटी बजाकर सबको आने की जानकारी देते हैं। आगे पढ़ें 

कि‍सानों और कबाड़ी को बेचते हैं 
ब्‍लूमबर्ग की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क यहां के घरों में दो तरह के कूड़ेदान होते हैं एक में ऐसा कचरा रखा जाता है जिसकी खाद बन सकती है और दूसरे में अन्‍य कचरा। यहां से कचरा उठाने वाले लोग इसे रीसाइकि‍ल सेंटरों तक ले जते हैं जहां उन्‍हें अलग कि‍या जाता है। बोतल, मैटल, चप्‍पल और प्‍लास्‍टिक जैसे कचरे को अलग करके कबाड़ी को बेच दि‍या जता है और बाकी कचरे की खाद बनाकर कि‍सानों को बेच दी जाती है। लोगों ने प्रशासन के साथ मि‍लकर वेस्‍ट मैनजमेंट प्‍लांट लगा लि‍ए हैं। कुंबार कोप्‍पालू के पास अपना प्‍लांट लगाने वाले डॉक्‍टर मादेगौड़ा बड़े उत्‍साह के साथ कहते हैं, 'अगर कैश में बदल दि‍या जाए तो कचरा कोई प्रॉबलम नहीं है।' आगे पढ़ें 

 

खप जाता है कचरा 
यहां लगी ज्‍यादतार रीसाइकलिंग यूनि‍ट स्‍थानीय नागरिकों और गैर सरकारी संस्‍थाओं ने लगाई हैं। ये कबाड़ की बिक्री और कंपोस्‍ट से कमाई करते हैं। अभी मैसूर में हर दि‍न पैदा होने वाले करीब 402 टन कचरे में से करीब आधा कंपोस्‍ट में खप जाता है और करीब एक चौथाई रीसाइकलिंग सेंटर के माध्‍यम से बेच दि‍या जाता है।  इससे न केवल कचरे की समस्‍या का स्‍थाई हल नि‍कल गया है बल्‍कि‍ कई लोगों को रोजगार मि‍ल गया है। इस अनूठे प्रयास की वजह से इन दि‍नों इस शहर की वि‍दशी मीडि‍या में खूब चर्चा है। आगे पढ़ें आप क्या कर करते हैं 

 

लगा सकते हैं वेस्‍ट फर्टीलाइजर प्‍लांट 
अगर आप यहां वेस्‍ट फर्टीलाइजर प्‍लांट लगाना चाहते हैं तो प्रशासन आपसे केवल एक तयशुदा वार्षि‍क फीस और 5 फीसदी तैयार कंपोस्‍ट लेगा। इस तरह का प्‍लांट आप अपने शहर में लगाकर अच्‍छी कमाई कर सकते हैं। इसमें स्‍थानीय नि‍गम की मदद ली जा सकती है। कचरा पैदा करने के मामले में भारत के शहर दुनि‍या के टॉप शहरों में शामि‍ल हैं। यहां हर साल तकरीबन 6.2 करोड़ टन कचरा पैदा होता है। इसमें से केवल 82 फीसदी ही जमा हो पाता है और उसमें से भी केवल 28 फीसदी ही प्रोसेस कि‍या जाता है। ज्‍यादातर कचरा या तो लैंडफि‍ल साइट पर पहुंच जाता है या फि‍र सड़कों पर से धीरे धीरे नदि‍यों और नालों में पहुंच जाता है। 

 

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