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Home » Economy » InfrastructureGST Council Meeting: Flats costing Up to 45 lakh rs to get cheaper

45 लाख रुपए तक के घर एक अप्रैल से हो जाएंगे सस्ते, पहले लगता था 8 फीसदी जीएसटी अब लगेगा एक फीसदी

सामान्य श्रेणी के मकान पर 12 फीसदी की जगह 5 फीसदी जीएसटी

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एजेंसी | नई दिल्ली
अप्रैल से जो हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू होंगे, उन पर जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। 31 मार्च तक जो प्रोजेक्ट अधूरे रहेंगे, उनके डेवलपर नई या पुरानी व्यवस्था में से कोई भी चुन सकते हैं। इसके लिए जीएसटी काउंसिल ने मंगलवार को ट्रांजिशन प्लान को मंजूरी दे दी। काउंसिल ने 24 फरवरी को रियल एस्टेट के लिए जीएसटी रेट घटाने का फैसला किया था, लेकिन इसके साथ डेवलपर्स के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट खत्म कर दिया।

 

लग सकता है एक महीने का समय

राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने जीएसटी काउंसिल की 34वीं बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डेवलपर्स को तय समय के भीतर नई या पुरानी व्यवस्था में से किसी एक को चुनना पड़ेगा। राज्यों के साथ बात करके इसकी समय सीमा तय की जाएगा। इसमें एक महीने का समय लग सकता है। सभी राजनीतिक दल आम चुनाव में व्यस्त हैं। इसलिए वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। सचिव ने कहा कि चुनाव पूरा होने तक काउंसिल की अगली बैठक होने की उम्मीद नहीं है। लेकिन जरूरत हुई तो चुनाव आयोग की सहमति लेकर बैठक की जा सकती है।


अभी अफोर्डेबल पर 8%, सामान्य घरों पर 12% टैक्स लगता है


पुरानी व्यवस्था: सामान्य श्रेणी के घरों पर 12% और अफोर्डेबल पर 8% जीएसटी लगेगा। सीमेंट-सरिया जैसी चीजों पर डेवलपर जो टैक्स चुकाएंगे, उसका इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा।
नई व्यवस्था: सामान्य श्रेणी के घरों पर 5% और अफोर्डेबल पर 1% जीएसटी लगेगा। लेकिन डेवलपर को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। घटी हुई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी।

45 लाख रुपए तक के घर अफोर्डेबल


महानगरों में कम से कम 60 वर्ग मीटर और दूसरे शहरों में 90 वर्ग मीटर कार्पेट एरिया वाले फ्लैट अफोर्डेबल कहलाएंगे। इनकी कीमत 45 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 
 

डेवलपर को 80% सामान जीएसटी डीलर से खरीदना पड़ेगा


डेवलपर को कम से कम 80% मैटेरियल जीएसटी में रजिस्टर्ड डीलर से खरीदना पड़ेगा। इससे कम होने पर डेवलपर को बाकी हिस्से पर रिवर्स चार्ज के तहत 18% जीएसटी चुकाना होगा। सीमेंट पर यह 28% होगा।


दाम बढ़े तो मुनाफाखोरी रोकने वाली अथॉरिटी कार्रवाई करेगी


आशंका जताई जा रही है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट खत्म होने से बिल्डर घरों के दाम बढ़ा सकते हैं। राजस्व सचिव ने कहा कि अगर दाम बढ़े तो जीएसटी कानून के तहत बनी नेशनल एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी (एनएए) उसे देखेगी और उचित कार्रवाई करेगी।

अंडर-कंस्ट्रक्शन और नए प्रोजेक्ट के लिए अलग नियम से बिल्डरों को आसानी


रियल एस्सेट बॉडी नारेडको के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि दोनों व्यवस्था में से किसी एक को चुनने का विकल्प मिलने से डेवलपर्स को आसानी होगी। डेलॉय इंडिया के पार्टनर एमएस मनी ने कहा अंडर-कंस्ट्रक्शन और नए प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाने से बिल्डरों को सहूलियत होगी। वे इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर चिंतित थे। नए प्रोजेक्ट में इनपुट क्रेडिट नहीं मिलने से उन्हें कोई नुकसान होता है, तो उसके आधार पर वे कीमत तय कर सकते हैं।

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