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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 156 करोड़ की लागत से बनेगा फ्रेट विलेज, 100 एकड़ जमीन पर होगा निर्माण, सरकार ने दी मंजूरी

इस फ्रेट विलेज से वाराणसी में लॉजिस्टिक्‍स उद्योग को बढ़ावा मिलेगा

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नई दिल्ली.

जहाजरानी मंत्रालय ने गंगा नदी पर अंतर्देशीय जलमार्ग टर्मिनल के पास वाराणसी में 156 करोड़ रुपए की लागत से एक फ्रेट विलेज विकसित करने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी है। वाराणसी फ्रेट विलेज का विकास भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के द्वारा किया जाएगा। यह एक कार्गो हब के रूप में काम करेगा और यह माल एकत्रित करने एवं उसमें मूल्यवर्धन का भी एक केंद्र होगा। यह वाराणसी में एक पेशेवर लॉजिस्टिक्‍स उद्योग के विकास को भी प्रोत्साहित करेगा।

 

वाराणसी फ्रेट विलेज को लगभग 100 एकड़ भूमि पर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 70 एकड़ और दूसरे चरण में 30 एकड़ का अधिग्रहण होगा। दोनों चरणों की कुल अनुमानित लागत 120 करोड़ रुपए है। इसके अलावा परामर्श सेवा एवं परियोजना प्रबंधन इकाई के परिचालन जैसे अन्‍य मदों में 45 करोड़ रुपये की निवेश पूर्व लागत होने का अनुमान है।

 

क्या है फ्रेट विलेज

फ्रेट विलेज एक ऐसा निर्दिष्ट क्षेत्र है जहां परिवहन के विभिन्न साधन, माल वितरण और अन्य लॉजिस्टिक्‍स सुविधाएं सिंक्रोनाइज्ड तरीके से बड़े पैमाने पर उपलब्ध होती हैं। फ्रेट विलेज का मुख्य कार्य परिवहन के विभिन्न साधनों का प्रबंधन आैर उपयोगिता सुनिश्चित करना, उनमें तालमेल बिठाना और मौजूदा परिवहन साधन से भीड़भाड़ को कम करना है। फ्रेट विलेज बुनियादी तौर पर एक कार्गो एग्रीगेटर होता है जो शिपर/कार्गो मालिक को विभिन्‍न लॉजिस्टिक विकल्‍प यानी रेल-सड़क, रेल-जलमार्ग, सड़क-जलमार्ग आदि प्रदान करता है। माल ढुलाई संबंधी विभिन्‍न गतिविधियां एक ही छत के नीचे उपलब्‍ध होने और उनमें समन्‍वय से कारोबार आसान होता है। साथ ही इससे ट्रक क्षमता का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है और इससे कारोबारी गतिविधियों एवं आर्थिक दक्षता में सुधार हो सकता है।

 

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फ्रेट विलेज के लिए उपयुक्त है वाराणसी

विश्व बैंक के एक अध्ययन में पाया गया कि वाराणसी फ्रेट विलेज के लिए एक उपयुक्त जगह है। यह शहर सामरिक दृष्टि से उपयुक्‍त जगह पर स्थि‍त है और यह ईस्‍टर्न ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर की लॉजिस्टिक्‍स श्रृंखला का मध्‍य बिंदु है जहां से राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1, ईस्‍टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी), राष्‍ट्रीय राजमार्ग-7 और राष्ट्रीय राजमार्ग-2 गुजरते हैं। जल मार्ग विकास परियोजना के तहत बन रहे मल्‍टी मोडल टर्मिलन के चालू होने पर वाराणसी के लिए अंतर्देशीय जलमार्ग पर यातायात में वृद्धि होने की उम्मीद है। वाराणसी मल्‍टी मोडल टर्मिनल के लिए यातायात की अनुमानित मात्रा 2020 तक 3.55 एमएमटी, 2025 तक 3.82 एमएमटी, 2035 तक 10.12 एमएमटी और 2045 तक 10.32 एमएमटी है। आईडब्ल्यूटी मल्‍टी मोडल टर्मिनल 2000 डीडब्ल्यूटी तक क्षमता वाले जहाजों को ठहराने में समर्थ होगा और वहां सिंक्रो-मोडलिटी के माध्यम से जेएमवीपी एवं ईडीएफसी से कार्गो यातायात की मात्रा में इस अपेक्षित वृद्धि को संभालने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं होंगी।

 

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लॉजिस्टिक्स उद्योग को बढ़ावा मिलेगा

फ्रेट विलेज की भूमि का मालिक आईडब्ल्यूएआई होगा लेकिन इसका कुछ हिस्सा लॉजिस्टिक्‍स कंपनियों और जलमार्ग से संबंधित विनिर्माण एवं व्यापारिक कंपनियों को बाजार स्थितियों के अनुसार तय मूल्यों एवं निर्धारित शर्तों पर पट्टे पर दिया जाएगा ताकि वे अपना कारोबार स्‍थापित कर सकें। यह फ्रेट विलेज कंटेनरबल्‍क एवं ब्रेक-बल्क कार्गोतरल थोक और बैग वाले कार्गो सहित विविध कार्गो प्रोफाइल को अपनी सेवाएं मुहैया करा सकता है। इस फ्रेट विलेज से वाराणसी में लॉजिस्टिक्‍स उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

 
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