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मोदी के सामने खड़ी हुईं 3 बड़ी आफत, आप भी रहें तैयार

मोदी सरकार के लि‍ए अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं।

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नई दि‍ल्‍ली। मोदी सरकार के लि‍ए अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। रुपया, तेल और ईरान का मसला मोदी के लिए परेशानी खड़ी करने वाले फैक्टर हैं। एक्‍सपर्ट्स  ने आशंका जताई है कि‍ इसका असर कई तरह से भारत पर पड़ेगा और आम आदमी को भी इसकी कीमत अपनी जेब से चुकानी पड़ सकती है। रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या व जापान की फाइनेंशि‍यल कंपनी नोमूरा होल्‍डिंग्‍स ने भारत सरकार को खाड़ी देशों से उठ रहे संकट के प्रति आगाह कर दि‍या है। 


क्या है यह तीहरी मार 
1. अप्रैल में तेल सप्‍लाई करने वाले देशों के संगठन ओपेक ने तेल की आपूर्ति‍ में कटौती का फैसला लि‍या। इसके तुरंत बाद डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ गए। भारत में इसकी कीमतें रि‍कॉर्ड स्‍तर पर पहुंच गईं।


2. अब ईरान पर अमेरि‍की प्रतिबंध की घोषणा के बाद, तेल की कीमतें नई ऊंचाई पर आ गई हैं। क्रूड की कीमतें अब 77.33 डॉलर प्रति‍ बैरल आ गई हैं। वर्ष 2014 के बाद का उच्‍चतम स्‍तर है। इसकी वजह से भारत की तेल कंपनि‍यों पर दाम और बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है। बता दें कि‍ ईरान ओपेक में शामि‍ल नहीं है।


3. रुपए में लगातार गि‍रावट आ रही है। शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्‍यू 67.17 थी। बीते एक सप्‍ताह से लगातार रुपए की वैल्‍यू गि‍र रही है।  रुपए में गि‍रावट का मतलब होता है व्‍यापार घाटे में बढ़ोतरी। आगे पढ़ें 

RBI ने चेताया 
रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या ने भी इस मसले पर चिंता जताई है। बैंक का अनुमान है कि‍ तेल की कीमतें 78 डॉलर प्रति‍ बैरल आने पर भारत के सकल घरेलू उत्‍पाद को झटका लगेगा। बैंक ने जीडीपी में बढ़ोतरी का अनुमान 7.4% लगाया था मगर अब आरबीआई का कहना है कि‍ तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी की वजह से इस रेट में 10 बेसिस प्‍वाइंट की कटौती करनी पड़ेगी। इसके अलावा बैंक ने महंगाई बढ़ने का अंदेशा भी जताया है। 
 

कटेगी आपकी जेब 
इंडि‍यन ऑयल कॉरपोरेशन चेयरमैन संजीव सिंह का कहना है कि‍ अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी जारी रहती है तो रिटेल प्राइस में बढ़ोत्तरी की जाएगी। सिंह ने कहा कि कंपनी ने तेज बढ़ोत्तरी और कंज्यूमर्स को दिक्कतों से बचाए रखने के लिए  कीमतों को ‘अस्थायी तौर पर कंट्रोल में’ रखने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की मौजूदा कीमतों को फंडामेंटल्स का सपोर्ट नहीं है। इसलिए हमने कुछ समय तक इंतजार करने का फैसला किया है। आगे पढ़ें 

 

बढ़ेगा सरकार का घाटा
भारत के आयात में सबसे बड़ी हि‍स्‍सेदारी कच्‍चे तेल की ही है। महंगा इंपोर्ट और रुपए की नीचे जाती वैल्‍यू की वजह से भारत का व्‍यापार घाटा और बढ़ेगा। सरकार के खजाने पर और भार पड़ेगा। 
नोमूरा होल्‍डिंग्‍स के अनुमान के मुताबि‍क, अगर 2018 में तेल की कीमतें 75डॉलर रहती हैं तो भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 2.5 फीसदी हो जाएगा जोकि 2017 में 1.5 फीसदी था। 


तीसरा बड़ा एक्सपोर्टर है ईरान
2017-18 के आधिकारिक आंकड़े अभी तक उपलब्ध नहीं है, हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल, 2017 से फरवरी, 2018 के बीच ईरान के लिए भारत तीसरा बड़ा ऑयल एक्सपोर्टर रहा। वहीं इराक, सऊदी अरब को पछाड़कर भारत के लिए सबसे बड़ा सप्लायर बन गया। भारत की चार सरकारी रिफाइनिंग कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में ईरान से लगभग 2.05 लाख बीपीडी ऑयल का इंपोर्ट किया था।

 

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