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जब तक बेटा नहीं होता तब तक ट्राई करता है इंडि‍या, इकोनॉमिक सर्वे का चौंकाने वाला आंकड़ा

भारतीय समाज में अभी भी बेटा पैदा होने की इच्‍छा काफी प्रबल है।

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नई दि‍ल्‍ली। इस बार के इकोनॉमि‍क सर्वे में भारतीय समाज के इस सच को फि‍र से सामने रखा गया है। भारतीय समाज में अभी भी बेटा पैदा होने की इच्‍छा काफी प्रबल है। सर्वे की रि‍पोर्ट कहती है कि‍ कई मां-बाप ऐसे हैं जो तब तक संतान पैदा करते हैं जब तक कि लड़का नहीं मि‍ल जाता या जब तक कि‍ लड़कों की गि‍नती उतनी नहीं हो जाती जितनी उन्‍हें चाहि‍ए। यह कि‍सी एक पि‍छड़े राज्‍य की कहानी नहीं है, अच्‍छी आय वाले राज्‍यों में भी यही हाल है। कुल मि‍लाकर पूरे भारत की तस्‍वीर ऐसी ही है। 


हालांकि‍ यह तथ्‍य भारतीय समाज के लि‍ए नया नहीं है, अगर आपको कुछ अर्सा पहले रिलीज हुई फि‍ल्‍म दंगल की कहानी याद हो तो उसमें भी महावीर सिंह फोगाट ने बेटा पैदा करने की चाहत में 4 लड़कि‍यां पैदा की थीं। इकोनॉमिक सर्वे में पेश डाटा भारतीय और चीनी जनमानस की इसी सोच की गवाही देता है। 

 

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एक जैसी है भारत और चीन की स्‍थि‍ति‍ 
सर्वे रि‍पोर्ट में भारत और चीन के 1970 और 2014 के आंकड़े दि‍खाए गए हैं। इसके मुताबि‍क, जन्‍म पर लिंग अनुपात (SRB) यानी नेचुरल सैक्‍स रेशियो 1 लड़की पर 1.05 लड़का है। अगर लिंगानुपात इससे अलग होता है तो इसका मतलब उसमें कि‍सी वजह से बदलाव हुआ है यानी कुछ ऐसा कि‍या गया है जिसकी वजह से इसमें बदलाव हुआ है।

 

चीन के मामले में वन चाइल्‍ड पॉलि‍सी लागू होने के बाद यह स्थिति और खराब हो गई। जहां 1970 में सैक्‍स रेशियो एट बर्थ 1.070 था वहीं 2014 में यह 1.156 हो गया। भारत के हालात भी कुछ ठीक नहीं है। यहां 1970 में सैक्‍स रेशियो एट बर्थ 1.060 था जो 2014 में बढ़कर 1.108 हो गया। वैसे तो वि‍कास को लिंगानुपात में सुधार की एक वजह माना जाता है, मगर इन दोनों ही देशों में आर्थि‍क और सामाजिक तरक्‍की के बावजूद रेशियो सुधरने की बजाए बढ़ गया। 


अमीर राज्‍यों की सोच ज्‍यादा गरीब 
सबसे रईस होने के बावजूद पंजाब और हरि‍याणा की हालत सबसे खराब है, जहां लिंगानुपात 1000 लड़कि‍यों पर 1200 लड़के के आसपास है। यहां दो तरह से रेशियो बि‍गड़ रहा है, पहला तो गर्भपात और दूसरा लड़के हो जाने पर संतान पैदा करना बंद कर देना। इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि अगर कि‍सी को एक ही संतान चाहि‍ए और वह लड़की हो गई तो मां-बाप लड़के के लि‍ए फि‍र ट्राई करेंगे, लेकि‍न अगर पहली बार में लड़का हो गया तो वहीं रुक जाएंगे। यह महज एक उदाहरण है, इकोनॉमि‍क सर्वे में कही गई बात को समझाने के लि‍ए। 

 

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सबसे अच्‍छा है मेघालय 
इस मामले में सबसे अच्‍छा रि‍कॉर्ड मेघायल का है। जहां सैक्‍स रेशो एट बर्थ और सैक्‍स रेशो ऑफ लास्‍ट चाइल्‍ड दोनों बिल्‍कुल आदर्श स्‍थि‍ति में हैं। असम, अरुणाचल और मणिपुर जैसे राज्‍यों की स्‍थि‍ति भी कुछ ठीक है, हालांकि यहां के लोगों मन में भी लड़के की चाहत है। लेकि‍न पंजाब, हरि‍याणा और यहां तक कि दि‍ल्‍ली में लड़कों की चाहत बहुत ज्‍यादा दि‍खाई देती है। 
सर्वे में पेश आंकड़ों के मुताबि‍क, इनकम बढ़ने के बावजूद लोग लड़की की बजाए लड़कों को ही प्राथमिकता देते हैं। ऐसा नहीं है कि लड़की पैदा हो जाने के बाद उसकी देखभाल ठीक नहीं होती, लेकि‍न अगर लड़के पैदा हो जाएं तो कई लोग वहीं पर फुल स्‍टॉप लगा देते हैं यानी वो लड़की के लि‍ए ट्राई नहीं करते। 

 

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