दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल को मिली मंजूरी, 50 मिनट में पूरा हो सकेगा 2 घंटे का सफर

delhi-meerut-rapid-rail will starts soon दिल्ली से मेरठ जाने वाले यात्रियों को बड़ी खुशखबरी मिली है। दिल्ली-मेरठ के बीच रैपिड रेल को मंजूरी मिल गई है। रैपिड रेल से दिल्ली और मेरठ के बीच की यात्रा गुड़गांव या नोएडा में गाड़ी चलाने जितनी आसान हो जाएगी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम द्वारा शुरू की जाएगी।  दिल्ली-मेरठ के बीच चलते वाली यह ट्रेन 160 किलोमीटर की रफ्तार से चलती है जिससे यात्री 60 मिनट से भी कम समय में  दिल्ली से मेरठ पहुंच जाएंगे। 

Money Bhaskar

Feb 07,2019 01:48:00 PM IST

नई दिल्ली। दिल्ली से मेरठ जाने वाले यात्रियों को बड़ी खुशखबरी मिली है। दिल्ली-मेरठ के बीच रैपिड रेल को मंजूरी मिल गई है। रैपिड रेल से दिल्ली और मेरठ के बीच की यात्रा गुड़गांव या नोएडा में गाड़ी चलाने जितनी आसान हो जाएगी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम द्वारा शुरू की जाएगी। दिल्ली-मेरठ के बीच चलते वाली यह ट्रेन 160 किलोमीटर की रफ्तार से चलती है जिससे यात्री 60 मिनट से भी कम समय में दिल्ली से मेरठ पहुंच जाएंगे।

फिलहाल यूपी सरकार और केंद्र सरकार की रकम से शुरू होगा निर्माण कार्य

सूत्रों की माने तो यह भी संभावना है कि पहले यूपी सरकार और केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली रकम से ही निर्माण कार्य शुरू किया जाए और बाद में इस पर दिल्ली सरकार से बातचीत करके इस राशि का इंतजाम किया जाए। एक टॉप अफसर का कहना है कि दिल्ली सरकार का लगभग 1138 करोड़ रुपये का हिस्सा है।

दिल्ली के हिस्से की राशि को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति

परियोजना को वित्तीय मंजूरी देने के लिए वित्त मंत्रालय के तहत पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड ने बुधवार को बैठक की थी। बैठक में इस परियोजना पर मुहर लग गई है। दिल्ली के हिस्से की राशि को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसकी वजह पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड की बैठक से कुछ देर पहले पहुंचे दिल्ली सरकार के ट्रांसपॉर्ट विभाग का वह पत्र है, जिसमें इस प्रॉजेक्ट के लिए वित्तीय इंतजाम करने में असमर्थता जताई गई है।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, बुधवार की बैठक के लिए दिल्ली सरकार के अधिकारियों को पत्र भेजकर बताया गया था कि इस प्रॉजेक्ट पर पीआईबी विचार करेगा। बुधवार सुबह दिल्ली सरकार के ट्रांसपॉर्ट विभाग की ओर से मंत्रालय को पत्र भेजा गया। इसमें कहा गया है कि इस प्रॉजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार के हिस्से की 1138 करोड़ रुपये की राशि देने के लिए दिल्ली सरकार असमर्थ है। ऐसे में यह खर्च केंद्र सरकार उठाए।

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