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अब चार धाम जाना होगा आसान, रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री, 46,000 करोड़ अनुमानित लागत

तुर्की की कंपनी ने सर्वे का काम पूरा कर रेल विकास निगम को सौंपा

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नई दिल्ली। अब चार धाम यात्रा और आसान हो जाएगी। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग स्वप्निल रेल परियोजना के साथ ही भारतीय रेलवे ने चारों धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को भी रेल नेटवर्क से जोड़ा गया है। इसके लिए लोकेशन और एलाइनमेंट का सर्वे हो चुका है। अब सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में करीब 46 हजार करोड़ रुप की लागत आने का अनुमान है।

 

यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क हाेगा

एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क यानी भारतीय रेल ने अब नए कीर्तिमान गढ़ने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। पहाड़ में रेल दौड़ने की चुनौती को रेल विकास निगम ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के रूप में साकार करने में जुटा है। इस परियोजना पर काम काफी हद तक आगे बढ़ गया है। इसके साथ ही अब रेल विकास निगम ने उत्तराखंड के चारों धाम को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए सर्वे कराया है। चार धाम रेल नेटवर्क में बदरीनाथ और केदारनाथ के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को साईंकोट तक आगे बढ़ाया जाएगा। साईंकोट से बदरीनाथ के लिए 80 किमी लंबी रेल लाइन जोशीमठ तक पहुंचाई जाएगी। जबकि, केदारनाथ के लिए साईंकोट से सोनप्रयाग तक 98 किमी लंबी रेल लाइन बिछाई जाएगी।


 

इस प्रोजेक्ट को तुर्की कंपनी युक्सल प्रोजे देख रही है

इस प्रोजेक्ट को तुर्की कंपनी युक्सल प्रोजे देख रही है। इस कंपनी से सर्वे कराया है। डिजिटल टैरेन मॉडल (डीटीएम) विधि से किए गए इस सर्वे में रिमोट सेंसिग इंस्टीट्यूट हैदराबाद की मदद ली गई। जबकि, सर्वे के लिए सेटेलाइट इमेजरी अमेरिका से ली गई हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चार धाम रेल नेटवर्क के लिए दो चरणों में 30 अलग-अलग एलाइनमेंट तैयार किए गए। इनमें से एक एलाइनमेंट को अंतिम रूप देकर चयनित किया गया है।

बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के रेल नेटवर्क को ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से ही आगे बढ़ाया जाएगा। जबकि, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के लिए डोईवाला रेलवे स्टेशन से अलग रेल लाइन बिछाई जाएगी।

 

 

दोनों चरणों की रेल लाइन में स्टेशन भी तय कर दिए गए हैं

दोनों चरणों की रेल लाइन में स्टेशन भी तय कर दिए गए हैं। बताया कि चयनित किए गए फाइनल एलाइनमेंट सर्वे को प्रदेश सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जा रहा है। इसके बाद प्रदेश सरकार इसे केंद्र को भेजेगी।

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