Home » Economy » InfrastructureCentral government pending amount 1146.86 crore for Air India VVIP charter flights

सरकार का एयर इंडिया पर 1146.86 करोड़ रुपए बकाया

पिछले दस साल से नहीं हुआ भुगतान

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नई दिल्ली। देश की सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया पर कर्ज का बोझ बढ़ता गया। ऐसेे में सरकार ने एयर इंडिया को बेंचने की योजना बनानी पड़ी। लेकिन रिटायर्ड कमांडर लोकेश बत्रा की RTI पत्र से खुलासा हुआ है कि एयर इंडिया के आर्थिक संकट के लिए कुछ हद तक केंद्र सरकार खुद जिम्मेदार है, क्योंकि उसकी ओर से एयर इंडिया को पिछले दस साल का बकाये का भुगतान नहीं किया गया। इसके चलते एयर इंडिया का कर्ज बढ़कर तीन गुना हो गया है। केंद्र सरकार के वीवीआईपी चार्टर फ्लाइट से उड़ान पर एयर इंडिया को 1146.86 करोड़ रुपए खर्च आया हैं। बत्रा के पत्र पर एयर इंडिया की ओर से 26 सितंबर को जवाब दिया गया था। 

 

किस पर कितना बकाया

केंद्र सरकार ने एयर इंड़िया को उपराष्ट्रपति की यात्राओं के पिछले दस साल के किराए का भुगतान नहीं किया गया है। पीएमओ समेत कई मंत्रालयों पर एयर इंडिया का बकाया भुगतान कुछ इस प्रकार है-  

 

रक्षा मंत्रालय -  211.17 करोड़ रुपए

विदेश मंत्रालय -  392.33 करोड़ रुपए 

कैबिनेट सेक्रेट्री और पीएमओ -  543.18 लाख रुपए 

 

आगे पढ़ें- कितना बढ़ा कर्ज 

चार गुना बढ़ा कर्ज 

एयर इंडिया की ओर से इस साल के मार्च के जवाब में बताया गया था कि सरकार पर उसका कुल बकाया बिल 325 करोड़ रुपए है। इसमें 31 जनवरी तक बकाए का बिल शामिल था। ये बिल अब बढ़कर 1146.86 करोड़ हो गया है। 

 

आगे पढ़े- कौन करते हैं सफर-

कौन करते हैं सफर
वीपीआईपी चार्टर एयरक्राफ्ट में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सफर करते हैं। उनकी फ्लाइट का सारा इंतजाम एयर इंडिया पर होता है। वीपीआईपी लोगों के लिए एयर इंडिया को अपने कामर्शियल जेट में काफी बदलाव करने पड़ते हैं। इसके लिए रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और कैबिनेट सेक्रेट्री को भुगतान करना होता है। 

 

आगे पढ़ें- कैसे बढ़ा कर्ज

कैसे बढ़ा कर्ज
कैग की ओर से वर्ष 2016 में सरकार की ओर से एयर इंडिया के भुगतान का मुद्दा उठाया गया था। लेकिन बत्रा के मुताबिक कैग ने मामले को उतनी तत्परता से नहीं दिखाई। एयर इंडिया को वर्ष 2006 से भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में एयर इंडिया पर कर्ज बढ़ता गया, जो अब बढ़कर करीब 50,000 करोड़ हो गया है। इससे पहले यूपीए की सरकार ने 2012 में एयर इंडिया को कर्ज से उबारने के लिए बेल आउट पैकेज जारी किया था। 

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