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कामयाबी / 650 किसानों ने पुणे में 700 एकड़ जमीन पर बसा दी आधुनिक सिटी मगरपट्टा, डीडीए अपनाएगा यही मॉडल

मगरपट्‌टा मॉडल देश में बन रहा है नजीर, किसानों को कंपनी का हिस्सेदार बनाया

650 farmers settle 700 acres of land in Pune modern city Magarpatta, DDA to adopt same model

नई दिल्ली. भट्‌टा परसौल। वही गांव जहां जमीन अधिग्रहण से नाराज किसानों ने ऐसा आंदोलन किया कि 110 साल पुराने कानून को बदलकर देश भर में नया भू अर्जन एक्ट बन गया। अब इसमें भी कामयाबी नहीं मिल पा रही है तो सभी की नजर पुणे की मगरपट्‌टा सिटी पर आकर टिक गई है। महज 650  किसानों ने मिलकर 700 एकड़ जमीन पर देश के सबसे आधुनिक शहर को बसा दिया। लिहाजा, अब दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) भी इस मॉडल को अपनाने जा रहा है। पुणे का गौरव कहलाने वाली मगरपट्टा की सबसे बड़ी खासियत है  कि इस प्रोजेक्ट में किसानों को कंपनी का हिस्सेदार बनाया है।

 

कंपनी ही शहर की देखभाल करती है, किसानों को भी मिले हैं फ्लैट 

 

पुणे के मगरपट्टा इलाके में किसानों ने जमीन पर एक कामयाब शहर बसाया है। कंपनी का नाम भी मगरपट्‌टा रखा गया है। इसमें 25 एकड़ में पार्क, 12 एकड़ में मॉल, 17500 रिहायशी यूनिट, कमर्शियल काम्पलेक्स आदि हैं। इसी में साइबरसिटी है, जो सबसे बड़े प्राइवेट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क में गिनी जाती है। मगरपट्टा बसाने वाली कंपनी में अब 650 सदस्य हैं। ये सभी किसान परिवार से हैं। इसमें न तो कोई बाहर से जुड़ा और न ही कोई छोड़कर गया। कंपनी ही शहर की देखरेख का काम संभालती है। यहां करीब 42 हजार लोग रहते हैं। इसमें किसानों के फ्लैट भी है। यहां करीब 1 लाख 40 हजार लोग रोज काम करने आते हैं। अस्पताल, चौड़ी सड़कें, पार्क, स्कूल, स्पोट्र्स सहित कई सुविधाएं है। 

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किसानों को मिलती है किराए से मिलनी वाली आमदनी का हिस्सा

 

कंपनी के सदस्यों को किराये के भवन और रजिस्ट्रेशन फीस सहित अन्य मदों से होने वाली आय का हिस्सा भी दिया जाता है। अब यहां पर सभी सुविधाओं के साथ लोग रह रहे हैं।  मगरपट्टा की कामयाबी को देखते हुए इसी तर्ज पर एक और टाउनशिप विकसित करने का काम भी शुरू हो गया है। करीब 850 एकड़ जमीन को विकसित करने का काम चल रहा है। 

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राज्य की दस सक्सेस स्टोरी में शामिल 

 

 मगरपट्टा में लैंड पूलिंग पॉलिसी पर शहर बसाने की शुरुआत सन 1990 में की गई थी। इसके क्रियान्वयन में लंबा समय लगा। 2012 में शहर बनकर तैयार हुआ।स्कूल, कॉलेज, बैंक, हॉस्पिटल, फूड कोर्ट्स, एंटरटेनमेंट जोन ये सब आपको यहां मिल जाएंगे। यही नहीं, यहां पर्यावरण का ख्याल रखते हुए करीब मगरपट्टा सिटी में 120 एकड़ में 32 हजार पेड़ लगाए गए हैं। 70 प्रतशित एरिया ओपन रखा गया है।  विकास का अनोखा उदाहरण पेश करने वाले मगरपट्टा सिटी को महाराष्ट्र इकोनॉमिक डेवलपमेंट काउंसिल ने राज्य की 10 सक्सेस स्टोरीज में शामिल किया है।

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न बिल्डर और न डेवलपर का हस्तक्षेप, मिलेगी स्मार्ट सिटी की सुविधाएं 

 

रिहायसी समस्या को दूर करने के लिए दिल्ली में पुणे का लैंड पूलिंग मॉडल लागू हो सकता है। इस मॉडल में न तो किसी बिल्डर का हस्तक्षेप होगा और न किसी डेवलपर का। खास बात यह कि इस मॉडल के आधार पर बसने वाले शहर में स्मार्ट सिटी की भी तमाम सुविधाएं होंगी। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) जल्द ही इस मॉडल की विशेषताओं को दिल्ली में लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत पंजीकरण करा रहे किसानों से साझा करेगा।

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हो चुके हैं कई अध्ययन 

 

इस शहर पर पहले भी कई अध्ययन हो चुके हैं। डीडीए के अधिकारी लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत बसे इस शहर का अध्ययन करने गए हैं। डीडीए उपाध्यक्ष के नेतृत्व में 11 सदस्यीय यह टीम मगरपट्टा में बसाए गए इस शहर की परेशानियों, खूबियों और क्रियान्वयन की बारीकियों को जान रही है। दो दिवसीय इस दौरे में नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआइयूए) के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।  डीडीए के उपाध्यक्ष तरुण कपूर बताते हैं कि लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत मगरपट्टा में बसा शहर देश भर में इस पॉलिसी का सबसे बेहतर नमूना है। इसीलिए वे इसे देखने और इस मॉडल को अपनाने के विचार से पुणे आए हैं। 

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