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टैक्स / 2 महीने तक फाइल नहीं किया GST रिटर्न, तो ई-वे बिल जेनरेट नहीं कर सकेंगे कारोबारी

GST return: वित्त मंत्रालय का आदेश, 21 जून से होगा प्रभावी

Non filers of GST returns for 2 months to be barred from generating e way bills from June 21
  • लगातार दो महीने तक GST return फाइल नहीं करने वाले जेनरेट नहीं कर पाएंगेई-वे बिल
  • जीएसटी कम्पोजिशन स्कीम के कारोबारियों पर भी होगी कार्रवाई

   
नई दिल्ली. लगातार दो महीने तक जीएसटी रिटर्न (GST return) फाइल नहीं करने वालों को ई-वे बिल (e-way bills) जेनरेट किए जाने से बैन कर दिया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह फैसला 21 जून से प्रभावी हो जाएगा। हालांकि जीएसटी कम्पोजिशन स्कीम (GST composition scheme) के अंतर्गत आने वाले कारोबारी अगर लगातार दो फाइलिंग पीरियड्स के लिए टैक्स रिटर्न फाइल करने में नाकाम रहते हैं, तो उन्हें ई-वे (e-way) बिल जेनरेट करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

 

...तो ई-वे बिल नहीं होगा जेनरेट

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स यानी CBIC (Central Board of Indirect Taxes and Customs) ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि जीएसटी (GST) नियमों के तहत निश्चित समय तक टैक्स रिटर्न (tax return) फाइल करने में नाकाम रहने पर ‘माल भेजने वाला (कंसाइनर), माल पाने वाला (कंसाइनी), ट्रांसपोर्टर, ई-कॉमर्स ऑपरेटर या कुरियर एजेंसी’ को ईलेक्ट्रॉनिक वे या ई-वे जेनरेट करने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

 

जानें किन पर होगी कार्रवाई

नियमों के तहत लगातार दो टैक्स पीरियड के दौरान रिटर्न फाइल नहीं करने वाले एक कम्पोजिशन स्कीम के टैक्सपेयर और लगातार दो महीने रिटर्न फाइल नहीं करने वाले नियमित टैक्सपेयर को ई-वे बिल जेनरेट करने से बैन कर दिया जाएगा।

 

महीने की 20 तारीख तक फाइल करना होता है रिटर्न

गुड्स एंड टैक्स (Goods and Services Tax) रेजीम में किसी महीने के लिए उसके बाद के महीने की 20 तारीख तक मंथली टैक्स रिटर्न फाइल करना होता है। हालांकि कम्पोजिशन स्कीम के तहत आने वाले कारोबारियों को किसी तिमाही के समाप्त होने के बाद के महीने की 18 तारीख को अपना तिमाही रिटर्न फाइल करना होता है।

 

जीएसटी नेटवर्क ने तैयार किया आईटी नेटवर्क

गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स नेटवर्क (GSTN) ने ऐसा आईटी सिस्टम तैयार किया है, जो निर्धारित अवधि तक टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करने वाले कारोबारियों को ई-वे बिल जेनरेट करने से बैन कर देगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे जीएसटी चोरी रोकने में मदद मिलेगी। अप्रैल-दिसंबर के दौरान 15,278 करोड़ रुपए की जीएसटी की चोरी के 3,626 मामले हुए थे।

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