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GST काउंसिल के फैसले से टूरिज्म इंडस्ट्री नाराज, कहा-20% नौकरियां खतरे में

 

 
नई दिल्ली. शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल के फैसले से टूरिज्म इंडस्ट्री निराश है। उसके अनुसार काउंसिल ने ऐसे कोई बड़े फैसले नहीं किए है जिससे सुस्ती से जूझ रही इंडस्ट्री को बूस्ट मिले। इंडस्ट्री के अुनसार टूरिज्म सेक्टर में 20 फीसदी से ज्यादा नौकरियां खतरे में हैं। इस फैसले से इन पर सीधा निगेटिव इम्पैक्ट होगा।
 
 
टूरिज्म सेक्टर को नहीं मिली राहत
इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर (आईएटीओ) के प्रेसिडेंट प्रणब सरकार ने moneybhaskar.com को बताया कि सरकार ने टूरिज्म सेक्टर को कोई बड़ी राहत नहीं दी है। सरकार ने 7500 रुपए से ज्यादा रेंट वाले होटलों पर आईटीसी सहित 18 फीसदी टैक्स कर दिया है जो पहले 28 फीसदी था। सरकार अब पुराने वाले लेवल पर टैक्स रेट ले आई है। इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि क्रिसमस और नए साल के लिए ज्यादा टैक्स रेट के कारण इंडिया में फाइव स्टार होटल की बुकिंग ज्यादा नही हुई है। इससे टूरिज्म सेक्टर को बहुत ज्यादा फायदा नहीं होने वाला है, क्योंकि होटल के टैक्स लगाने के बाद वह पैकेज पर अलग 5 फीसदी टैक्स लगाते हैं। पैकेज में सर्विस जुड़ने से टैक्स बढ़ जाता है और इसका नेगेटिव असर पड़ रहा है।
 
इंडियन टूरिज्म सेक्टर नहीं रहा कंपिटिटव
इंडियन टैक्स स्ट्रक्चर पड़ोसी देशों के मुकाबले कॉम्पिटीटिव नहीं रहा है। बल्क कॉरपोरेट बुकिंग इंडिया की जगह म्यनमार, थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया, मलेशिया जैसे पड़ोसी देशों को मिल रही है जहां टैक्स 5 से 10 फीसदी की रेन्ज में है। देश का जटिल टैक्स स्ट्रक्चर और ज्यादा जीएसटी रेट टूरिज्म सेक्टर को नुकसान पहुंचा रहा है क्योंकि कंपनियों की बुकिंग कम हो चुकी है।
 
आगे पढ़े - नौकरी पर लटकी तलवार
 

 

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