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जीएसटी /बदल रहा है इन्वॉइस फॉर्मेट, 1 जनवरी से लागू होगा स्टैंडर्ड ई-इन्वॉइस

  • इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिल बनाने के बाद कई जगह फाइलिंग नहीं करनी पड़ेगी
  • मैन्युअल डाटा इंट्री की ज़रूरत होगी ख़त्म, गलती की नहीं होगी संभावना 

Moneybhaskar.com

Dec 06,2019 06:45:51 PM IST

नई दिल्ली : जीएसटीएन ने शुक्रवार को बिजनेस सॉफ्टवेयर विकसित करने वाली अग्रणी कंपनियों के साथ एक वर्कशॉप का आयोजन किया। इस वर्कशॉप का उद्देश्य ई-इन्वॉइस को शुरु करने के लिए सॉफ्टवेयर कंपनियों के बीच तालमेल स्थापित करना था और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना था। ई-इन्वॉइस को जनवरी 2020 से शुरू करने का प्रस्ताव है। वर्कशॉप में उद्योग संगठनों द्वरा आमंत्रित प्रमुख बिज़नेस सॉफ्टवेयर कंपनियों जैसे- माइक्रोसॉफ़्ट, टीसीएस, इनफोसिस, विप्रो, एचसीएल, टैली, ओरेकल, बिजी और सैप आदि के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जीएसटीएन की देशभर के विभिन्न शहरों में ऐसे ब्रीफिंग सत्रों के आयोजन की योजना है।

यह मैन्युअल डाटा इंट्री की ज़रूरत को ख़त्म करेगी

बहुत से व्यवसाय आज ई-इन्वॉइस या इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉइस जेनेरेट करते हैं। हालांकि, वे सभी ईआरपी याबिलिंग सॉफ्टवेयर द्वारा उपलब्ध कराए गए फॉर्मेट का उपयोग करते हैं,लेकिन एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट के अभाव में एक बिलिंग सॉफ्टवेयर पर जेनेरेट किए गए ई-इन्वॉइस को दूसरे द्वारा पढ़ा जाना मुश्किल होता है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से जेनेरेट की गई इन्वॉइस से मैनुअल डाटा भरने की ज़रूरत होती है। एक स्टैंडर्ड ई-इन्वॉइस प्रणाली से पूरे जीएसटी ईको-सिस्टम में ई-इन्वॉइस को कहीं भी बिना किसी दिक्कत के इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही, यह मैन्युअल डाटा इंट्री की ज़रूरत को ख़त्म करेगी। यही नहीं, इस से त्रुटियों की संभावना भी नहीं रहेगी। ई-इन्वॉइस स्टैंडर्ड को व्यापार / उद्योग निकायों और आईसीएआई की सलाह से तैयार किया गया था।

प्रक्रिया की जटिलता को देखते हुए लिया गया फैसला

जीएसटीएन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश कुमार ने कहा, 'यह सत्र 20 सितम्बर 2019 को आयोजित जीएसटी काउंसिल की 37 वीं बैठक में अनुमोदित स्टैंडर्ड ई-इन्वॉइस के परिप्रेक्ष्य में अगला चरण था। काउंसिल ने एक पूरी रूपरेखा अपने पोर्टल पर प्रकाशित की है। प्रक्रिया की जटिलता को देखते हुए जीएसटीएन ने सभी प्रकार की भ्रांतियों को दूर करने के लिए एक डेमो सेशन आयोजित करने की ज़रूरत महसूस की थी।' जीएसटी काउंसिल ने 1 जनवरी 2020 से ई-इन्वॉइस को स्वैच्छिक और चरणबद्ध रूप से शुरूआत को मंजूरी दी है। जीएसटी प्रणाली के अलावा, इस स्टैंडर्ड को अपनाना यह भी सुनिश्चित करेगा कि एक विक्रेता द्वारा अपने खरीदार या बैंक या एजेंट या किसी अन्य साझीदार के साथ साझा किए गए ई-इन्वॉइस को पूरे व्यावसायिक व्यवस्था में मशीनों द्वारा पढ़ा जा सके और इस तरह यह डाटा एंट्री से संबन्धित त्रुटियों कोभी समाप्त करेगा। उन्होंने कहा "जहां तक व्यवसायों का संबंध है तो उन्हें कोई भी बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है। वे ई-इन्वॉइस जैसे ईआरपी, अकाउंटिंग और बिलिंग सॉफ्टवेयर, एक्सेल आधारित बिलिंग आदि बनाने के लिए समान यूजर-इंटरफ़ेस के साथ समान सॉफ्टवेयर का उपयोग जारी रख सकेंगे। अपने सॉफ्टवेयर को अनुमोदित मानकों के अनुरूप बनाने के लिए ईआरपी या बिलिंग सॉफ्टवेयर विकसित करनेवाली कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर कोड में बदलाव करना होगा।”

यह डॉक्यूमेंट करदाताओं, कर सलाहकारों और सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनियों के लिए होगी उपयोगी

व्यावसायिक सॉफ्टवेयर प्रदाताओं के साथ तालमेल विकसित करने के अलावा जीएसटीएन विभिन्न माध्यमों से ई-इन्वॉइस से संबन्धित धारणाओं और संदेहों को दूर करने का प्रयास भी कर रहाहै। वेबपोर्टल पर अपलोड किये गए डॉक्यूमेंट के माध्यम से ई-इन्वॉइस की अवधारणा जैसे-इसके संचालन और मानकों से संबन्धित मूल बातों को समझाने का प्रयास किया गया है। इसमें एक FAQ सेक्शन भी है जिसके माध्यम से ई-इन्वॉइस और मानकों से संबन्धित लोगों के प्रश्नों का जबाब दिया गया है। ऐसी उम्मीद है कि यह डॉक्यूमेंट करदाताओं, कर सलाहकारों और सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा।

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