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GST पोर्टल यूजर फ्रेंडली न होने से डबल हुई लागत, प्राइवेट कंपनियों का सहारा ले रहे हैं कारोबारी

नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों की अकाउंटिंग और रिटर्न फाइलिंग की कॉस्ट दोगुना हो गई है। सरकार और जीएसटीएन का दावा था कि पोर्टल पर दिए ऑफलाइन टूल के जरिए ट्रेडर्स और कारोबारी बिना किसी चार्टेड अकाउंटेट या एग्रीगेटर के मदद के बगैर आसानी से स्वयं इन्वॉइस अपलोड करने से लेकर रिटर्न फाइलिंग का काम कर सकते हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। इंडस्ट्री के मुताबिक छोटे ट्रेडर को भी इन्वॉइस बनाने से लेकर रिटर्न अपलोड करने में उन्हें चार्टेड अकाउंटेट और एग्रीगेटर की सर्विस लेनी पड़ रही है जिससे उनका कॉस्ट डबल हो गई है।

 

 

पोर्टल पर इन्वॉइस बनाना है टफ

 

ट्रैवल एजेंट चला रहे संजय कुमार ने moneybhaskar.com को बताया कि जीएसटी पोर्टल पर दिया ऑफलाइन टूल किसी काम का नही है। उस पर इन्वॉइस नहीं बना सकते क्योंकि वह हर एक इंड्स्ट्री की बिल बनाने के तरीके से मैच नहीं खाता। वह एक स्टैंडर्ड फॉरमेट जिसे आपको बदलना पड़ेगा। बिल बनाने के लिए उन्हें क्लीयर टैक्स, टैली जैसे सॉफ्टवेयर की मंथली सर्विस लेनी पड़ रही है।

 

पोर्टल पर इन्वॉइस नहीं होते इंपोर्ट

 

गुप्ता स्टोर के नाम से मल्टी प्रोडक्ट स्टोर चला रहे कमल गुप्ता ने moneybhaskar.com को बताया कि अगर आपने अपने लैपटॉप पर इन्वॉइस बनाए हैं तो वह पोर्टल उसे इंपोर्ट नहीं करता। वह पोर्टल पर बने ऑफलाइन टूल पर कॉपी नहीं होते। उसे एक्सेल शीट में कन्वर्ट करना ही पड़ता है और इसके लिए सीए या एग्रीगेटर की सर्विस लेनी ही पड़ती है।

 

हाथ से बने बिल को एक्सेल में करना पड़ता है कन्वर्ट

 

बेकरी शॉप चलाने वाले राजकुमार शर्मा ने moneybhaskar.com को बताया कि जीएसटी आने के बाद अकाउंटिंग का काम डबल हो गया है। शर्मा ने बताया कि वह ज्यादातर बिल हाथ से बनाते हैं जिसे जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करने के लिए पहले पक्का बिल बनाना पड़ता है, फिर उसको एक्सेल शीट में बिल की डिटेल भरनी होती है। उसे एक्सेल शीट को अपलोड करना पड़ता है। इसमें भी पोर्टल का ऑफलाइन टूल को समझना ही काफी मुश्किल है क्योंकि उसमें इतनी सारी जिप फाइल है कि वो समझ ही नहीं आता।

 

आगे पढ़ें - और क्या है मुश्किलें..

 

 

 

 

 

 

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