GST रिटर्न फॉर्म्स में कर देनदारी की तुलना कर सकेंगे टैक्सपेयर्स, GSTN ने दी नई सुविधा

अब जीएसटी (GST) के अंतर्गत रजिस्टर्ड कारोबारी अपनी घोषित टैक्स देनदारी के साथ ही अपने फाइनल और समरी सेल्स रिटर्न में क्लेम किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (input tax credit) का मिलान कर सकेंगे। जीएसटी नेटवर्क (GST Network) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। जीएसटी नेटवर्क इस इनडायरेक्ट टैक्स के टेक्नोलॉजी से जुड़े इन्फ्रा को संभालता है।

moneybhaskar

Mar 12,2019 07:46:00 PM IST


नई दिल्ली.
अब जीएसटी (GST) के अंतर्गत रजिस्टर्ड कारोबारी अपनी घोषित टैक्स देनदारी के साथ ही अपने फाइनल और समरी सेल्स रिटर्न में क्लेम किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (input tax credit) का मिलान कर सकेंगे। जीएसटी नेटवर्क (GST Network) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। जीएसटी नेटवर्क इस इनडायरेक्ट टैक्स के टेक्नोलॉजी से जुड़े इन्फ्रा को संभालता है।

रिपोर्ट देखने और डाउनलोड करने की भी मिली सुविधा

जीएसटी नेटवर्क (GST Network) ने टैक्सपेयर्स को फाइनल सेल्स रिटर्न जीएसटीआर-1 (GSTR- 1) में घोषित टैक्स देनदारी पर रिपोर्ट देखने और डाउनलोड करने की सुविधा दी है। इसके साथ ही फॉर्म जीएसटीआर-3 बी (समरी सेल्स रिटर्न) में घोषित और दिए गए रिटर्न को भी देखा जा सकेगा। जीएसटीआर-1 (GSTR-1) जहां अगले महीने की 11 तारीख तक फाइल किया जाता है, वहीं जीएसटीआर-3बी (GSTR-3B) अगले महीने की 20 तारीख तक फाइल किया जाता है।

एक ही जगह पर देनदारियां देख सकेंगे टैक्सपेयर्स

जीएसटीएन (GSTN) ने एक बयान में कहा कि जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी को अलग-अलग फाइल किया जाता है, इसलिए दोनों फॉर्म्स में घोषित देनदारी को एक ही जगह पर देखने की सुविधा दी गई है। इस नई सुविधा से टैक्सपेयर्स के लिए अपनी दोनों देनदारियों को एक ही जगह पर देखना संभव हो गया है और वह अब इनकी तुलना कर सकेंगे।

जीएसटी पोर्टल पर मिलेगी सुविधा

इसके अलावा जीएसटीएन (GSTN) ने जीएसटीआर 3बी में क्लेम किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और सप्लायर द्वारा अपलोड किए गए रिटर्न के आधार पर जीएसटीआर 2ए में उल्लिखित डाटा के संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई है। टैक्सपेयर्स को यह सुविधा जीएसटी पोर्टल के रिटर्न डैशबोर्ड पर ‘कम्पेरिजन ऑफ लायबिलिटी डिक्लेयर्ड एंड आईटीसी क्लेम्ड’ हेडिंग के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई है।

कर सकेंगे मासिक मिलान

जीएसटीएन (GSTN) के सीईओ प्रकाश कुमार ने कहा, ‘इस सुविधा से टैक्सपेयर्स को अपनी देनदारी और आईटीसी की डिटेल्स का मिलान करने में मदद मिलेगी। वे संबंधित महीने तक कुल डाटा के साथ ही मासिक मिलान भी कर सकेंगे। इससे उन्हें जरूरी कदम उठाने में मदद मिलेगी।’

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